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पश्चिम बंगाल
बंगाल चुनाव : आरामबाग मतलब लेफ्ट का पुराना किला, इस बार कांटे की टक्कर
SHIDDHANT
17 March 2026 9:53 PM IST

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Kolkata कोलकाता। आरामबाग लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र पश्चिम बंगाल के 42 संसदीय क्षेत्रों में से एक महत्वपूर्ण सीट है, जो अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित है। यह मुख्य रूप से हुगली जिले में फैला हुआ है, जिसमें हुगली के छह और पश्चिम मेदिनीपुर जिले का एक विधानसभा क्षेत्र शामिल है। इनमें हरिपाल, तारकेश्वर, पुरसुराह, आरामबाग (एससी), गोघाट (एससी), खानाकुल और चंद्रकोना जैसे क्षेत्र आते हैं। 2021 के विधानसभा चुनाव में यहां के सात में से चार क्षेत्र भाजपा ने जीते थे।
यह क्षेत्र कृषि प्रधान है, जहां चावल, आलू और जूट जैसी फसलें प्रमुख हैं। जूट उद्योग यहां की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। क्षेत्र में बाढ़ बार-बार आने वाली समस्या है, जो साल में एक-दो बार भीषण रूप ले लेती है, जिससे किसानों को भारी नुकसान होता है।
आरामबाग ब्लॉक का क्षेत्रफल लगभग 269 वर्ग किलोमीटर है, और 2011 की जनगणना के अनुसार इसकी जनसंख्या करीब 2.85 लाख थी, जिसमें जनसंख्या घनत्व 942 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर था। साक्षरता दर लगभग 79 प्रतिशत के आसपास है, जिसमें पुरुषों में अधिक और महिलाओं में कम है। यह क्षेत्र ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से भी समृद्ध है, जहां राजा राममोहन राय की जन्मभूमि राधानगर स्थित है।
राजनीतिक इतिहास की बात करें तो 1980 से 2009 तक यह सीट सीपीआई(एम) का मजबूत गढ़ रही, जिसे 'लाल किला' कहा जाता था। अनिल बसु जैसे नेता यहां से कई बार सांसद चुने गए। 2009 में सीपीआई(एम) के शक्ति मोहन मलिक ने जीत हासिल की, लेकिन तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने कड़ी टक्कर दी। 2014 में टीएमसी की अपरूपा पोद्दार (अफरीन अली के नाम से भी जानी जाती हैं) ने शक्ति मोहन मलिक को बड़े अंतर से हराया। 2019 में अपरूपा पोद्दार ने फिर जीत दर्ज की, लेकिन भाजपा के तपन कुमार राय से महज 1,142 वोटों के अंतर से। यह चुनाव बेहद करीबी रहा, जहां टीएमसी को 44.15 प्रतिशत और भाजपा को 44.08 प्रतिशत वोट मिले।
2024 के लोकसभा चुनाव में आरामबाग में फिर से टीएमसी और भाजपा के बीच कांटे की टक्कर देखी गई। चुनाव 20 मई को हुए, जहां मतदान प्रतिशत करीब 82-85 प्रतिशत रहा। टीएमसी की उम्मीदवार मिताली बाग ने भाजपा के अरूप कांति दीगर को मात्र 6,399 वोटों के अंतर से हराया। मिताली बाग को 7,12,587 वोट (45.71 प्रतिशत) मिले, जबकि अरूप कांति दीगर को 7,06,188 वोट (45.30 प्रतिशत) प्राप्त हुए। सीपीआई(एम) के बिप्लब कुमार मोइत्रा तीसरे स्थान पर रहे, उन्हें करीब 92,500 वोट मिले। यह जीत टीएमसी के लिए महत्वपूर्ण थी, क्योंकि भाजपा ने यहां मजबूत पकड़ बनाने की कोशिश की थी।
2021 के विधानसभा चुनाव में यहां के सात में से चार क्षेत्र भाजपा ने जीते थे, जिससे टीएमसी चिंतित है। भाजपा ने यहां ग्रामीण स्तर पर अपनी उपस्थिति बढ़ाई है और टीएमसी के विकास कार्यों पर सवाल उठाए हैं।
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