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बंगाल: अनुब्रत मंडल समेत 13 TMC नेताओं के खिलाफ चुनाव हिंसा और ईंट लूट FIR दर्ज

West Bengal वेस्ट बंगाल: बंगाल के बीरभूम जिले में तृणमूल कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष और बाहुबली नेता अनुब्रत मंडल के खिलाफ गंभीर आरोपों के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। इसके साथ ही उनके करीबी माने जाने वाले मामुन शेख समेत कुल 13 लोगों के खिलाफ भी शिकायत दर्ज की गई है। आरोप है कि 2021 विधानसभा चुनाव के बाद, पार्टी की सत्ता में वापसी के बाद अनुब्रत मंडल के निर्देश पर मामुन शेख के नेतृत्व में एक गिरोह ने ईंट व्यवसायी शुभेंदु मंडल के ईंट-भट्ठे पर हमला किया।
शिकायत के अनुसार, हमले के दौरान व्यापक तोड़फोड़ की गई और लगभग 30 लाख रुपये मूल्य की ईंटें लूट ली गईं। घटना के समय, ईंट भट्ठे के कर्मचारियों में भारी डर और दहशत फैल गई थी। आरोपियों ने न केवल व्यवसायिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया, बल्कि स्थानीय प्रशासन और कानून व्यवस्था को चुनौती भी दी।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर अनुब्रत मंडल और उनके समर्थकों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच में अब तक यह सामने आया है कि हमले की योजना अनुब्रत मंडल द्वारा बनाई गई थी और मामुन शेख ने इसे क्रियान्वित किया। मामले में दर्ज एफआईआर के अनुसार, कुल 13 लोगों को आरोपी बनाया गया है।
शुभेंदु मंडल ने बताया कि उनके ईंट-भट्ठे में न सिर्फ़ सामग्री की हानि हुई, बल्कि कर्मचारियों में डर का माहौल भी बन गया। उन्होंने पुलिस से आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। इस घटना से बीरभूम में राजनीतिक हिंसा और बाहुबलियों की सक्रियता को लेकर लोगों में चिंता बढ़ गई है।
स्थानीय प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी संभावित सुराग जुटाने के निर्देश दिए हैं। पुलिस अधिकारी ने कहा कि आरोपियों की पहचान की जा रही है और जल्द ही गिरफ्तारी की कार्रवाई शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि कानून को अपने हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
इस मामले ने पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति और बाहुबली नेताओं के प्रभाव को फिर से उजागर किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि चुनाव के बाद की हिंसा और संपत्ति की लूट की घटनाएं राज्य में कानून व्यवस्था की चुनौती पेश करती हैं और प्रशासन को सतर्क रहने की आवश्यकता है।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि मामले की जांच में स्थानीय लोगों से भी साक्ष्य और जानकारी एकत्र की जा रही है, ताकि घटना के हर पहलू की पुष्टि की जा सके। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद ही पूरा मामला न्यायिक प्रक्रिया में आगे बढ़ेगा।
इस घटना ने राज्य में राजनीतिक हिंसा और बाहुबलियों के प्रभाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, और स्थानीय प्रशासन पर दबाव बढ़ा है कि वह ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए।





