पश्चिम बंगाल

बंगाल कैबिनेट की पहली बैठक में बड़ा फैसला, धार्मिक सहायता योजना और OBC सूची पर बदलाव

Kavita2
18 May 2026 5:54 PM IST
बंगाल कैबिनेट की पहली बैठक में बड़ा फैसला, धार्मिक सहायता योजना और OBC सूची पर बदलाव
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West Bengal वेस्ट बंगाल: पश्चिम बंगाल में सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार की पहली राज्य कैबिनेट बैठक में सोमवार को कई अहम निर्णय लिए गए। इस बैठक में दो प्रमुख फैसलों ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा है—धार्मिक आधार पर दी जाने वाली सरकारी सहायता योजनाओं को समाप्त करना और राज्य की मौजूदा OBC सूची को संशोधित करना।

सरकार ने घोषणा की है कि जून से धार्मिक श्रेणियों के आधार पर दी जाने वाली सभी प्रकार की सरकारी सहायता योजनाएं बंद कर दी जाएंगी। इसके तहत उन योजनाओं की समीक्षा की गई जो इमाम, मुअज्जिन और अन्य धार्मिक पदों से जुड़े लोगों को वित्तीय सहायता प्रदान करती थीं। सरकार का कहना है कि अब इन योजनाओं को नई नीति के तहत पुनर्गठित किया जाएगा।

दूसरा बड़ा निर्णय राज्य की OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) सूची से जुड़ा है। कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश के बाद सरकार ने मौजूदा OBC सूची को रद्द करने का फैसला किया है। इस फैसले के बाद अब राज्य में पिछड़ा वर्ग आरक्षण से जुड़े ढांचे में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि नई OBC सूची तैयार करने के लिए एक विशेष समिति का गठन किया जाएगा, जो पात्रता मानकों की समीक्षा करेगी और नए मानदंड तय करेगी। यह समिति यह सुनिश्चित करेगी कि आरक्षण व्यवस्था अधिक पारदर्शी और कानूनी ढांचे के अनुरूप हो।

कैबिनेट बैठक के बाद मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने बताया कि सरकार का उद्देश्य किसी भी प्रकार की असमानता को दूर करना और प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक स्पष्ट बनाना है। उन्होंने कहा कि नई समिति सभी वर्गों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में काम करेगी।

सरकार के इन फैसलों को राज्य की सामाजिक और प्रशासनिक नीतियों में बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक सहायता योजनाओं के समाप्त होने और OBC सूची के पुनर्गठन से आने वाले समय में राज्य की कल्याणकारी योजनाओं और आरक्षण व्यवस्था पर सीधा असर पड़ेगा।

हालांकि सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि छात्रवृत्ति और शिक्षा से जुड़ी योजनाओं में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा और वे पहले की तरह जारी रहेंगी।

इन फैसलों के बाद राज्य में राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है, क्योंकि विपक्ष इन निर्णयों को लेकर सवाल उठा सकता है।

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