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Murshidabad में बाबरी मस्जिद प्रोजेक्ट चुनावी मुद्दा बन गया

West Bengal वेस्ट बंगाल: पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में तीन विधानसभा सीटें—भरतपुर, रेजिनगर और बेलडांगा—2026 के चुनावों में सबसे बड़ा मुद्दा बनती जा रही हैं। यहाँ राजनीतिक माहौल को बदलने वाली वजह है बाबरी मस्जिद जैसी नई मस्जिद की नींव, जिसे आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के फाउंडर और पूर्व TMC विधायक हुमायूं कबीर ने पिछले साल रखी थी।
कबीर को TMC से सस्पेंड किए जाने के बाद उनका विरोध शुरू हुआ था, लेकिन अब यह मस्जिद प्रोजेक्ट इलाके में चुनावी इमोशनल मुद्दा बन गया है। स्थानीय लोग और पार्टी कार्यकर्ता मस्जिद के निर्माण में सक्रिय हैं। हर दिन ईंटें और सीमेंट पहुंचाए जा रहे हैं, डोनेशन बॉक्स भरे जा रहे हैं, और कार्यकर्ताओं के सिर पर ईंटें ढोते वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इससे मस्जिद न केवल एक धार्मिक पहचान बन रही है बल्कि इलाके में राजनीतिक प्रतीक भी बन चुकी है।
TMC के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है क्योंकि अल्पसंख्यक वोट, जो पार्टी की परंपरागत ताकत हैं, में दरार पड़ने का खतरा दिखाई दे रहा है। वहीं BJP इसे अपने लिए अवसर के रूप में देख रही है। मुर्शिदाबाद के एक वरिष्ठ BJP नेता ने कहा, “बाबरी के नाम पर ले जाई जा रही हर ईंट हिंदू वोटरों को मजबूत करने का संकेत है। लोग इसे तुष्टिकरण की पॉलिटिक्स का उदाहरण मानते हैं।”
BJP नेताओं का मानना है कि मस्जिद निर्माण इलाके में हिंदू वोटर बेस को सक्रिय कर रहा है। उनका कहना है कि यह इलाके में हिंदू समुदाय में गुस्सा और राजनीतिक चेतना बढ़ा रहा है, जिससे आने वाले चुनावों में उनके लिए फायदा हो सकता है।
इस बीच, मस्जिद के समर्थकों का कहना है कि यह धार्मिक स्थल मुस्लिम समुदाय की पहचान को मजबूत करने और उनके सांस्कृतिक अधिकारों की रक्षा के लिए जरूरी है। मार्च में इस इलाके में पहली ईद की नमाज़ में मुर्शिदाबाद, नादिया और नॉर्थ 24 परगना से भीड़ आई थी। यह दर्शाता है कि मस्जिद का प्रोजेक्ट सिर्फ धार्मिक पहलू तक ही सीमित नहीं है बल्कि राजनीतिक रूप से भी असर डाल रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस मस्जिद प्रोजेक्ट से इलाके में वोटरों की वफ़ादारी बदलने की संभावना है। यह देखना होगा कि मुस्लिम वोट कबीर के पीछे कितनी संख्या में जुटते हैं और हिंदू वोटरों की प्रतिक्रिया कैसी होती है।
तीनों विधानसभा क्षेत्रों में चुनावी कैम्पेन, बातचीत और राजनीतिक रणनीति अब इस मस्जिद के इर्द-गिर्द केंद्रित हो गई है। बाबरी मस्जिद प्रोजेक्ट ने मुर्शिदाबाद में चुनावी जमीनी हालात को पूरी तरह बदल दिया है और आने वाले महीनों में यह मुद्दा और गरमाएगा।





