पश्चिम बंगाल

अशित मजूमदार ने न्यायाधीश के फैसलों पर लगाया राजनीतिक पक्षपात का आरोप

SHIDDHANT
5 Dec 2025 11:15 PM IST
अशित मजूमदार ने न्यायाधीश के फैसलों पर लगाया राजनीतिक पक्षपात का आरोप
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Bangal बंगाल: राजनीति में एक बार फिर न्यायिक फैसलों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के विधायक अशित मजूमदार ने उच्च न्यायालय के एक पूर्व न्यायाधीश अभिजीत गांगुली द्वारा लिए गए कुछ फैसलों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अशित मजूमदार ने कहा, “हम उच्च न्यायालय और अन्य सभी अदालतों का सम्मान करते हैं। लेकिन उस समय न्यायाधीश अभिजीत गांगुली द्वारा दिए गए फैसले राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित थे। यह स्पष्ट रूप से देखा गया कि फैसलों में निष्पक्षता की बजाय राजनीतिक हितों को प्राथमिकता दी गई।”
विधायक ने अपने बयान में आगे कहा कि अदालतों के फैसले हमेशा न्याय और कानून के आधार पर होने चाहिए, न कि किसी राजनीतिक दबाव या बाहरी प्रभाव के तहत। उन्होंने आरोप लगाया कि गांगुली द्वारा दिए गए निर्णय उस समय के राजनीतिक परिप्रेक्ष्य को देखते हुए प्रभावित थे, जिससे न्याय प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं। मजूमदार ने यह भी कहा कि तृणमूल कांग्रेस हमेशा न्यायपालिका का सम्मान करती रही है, लेकिन यह आवश्यक है कि न्यायिक निष्पक्षता और स्वतंत्रता बनी रहे। उन्होंने जोर देकर कहा कि राजनीतिक हस्तक्षेप या किसी भी बाहरी दबाव के कारण दिए गए फैसलों से न्याय व्यवस्था की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचता है।
इस विवादास्पद बयान के बाद राज्य में राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। विपक्षी दलों ने मजूमदार के आरोपों पर प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि न्यायपालिका को राजनीतिक दृष्टिकोण से जोड़ना उचित नहीं है। वहीं टीएमसी के समर्थकों का कहना है कि यह बयान न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल उठाने का प्रयास नहीं बल्कि पूर्व में हुई राजनीतिक रूप से प्रभावित न्यायिक कार्रवाई की याद दिलाने के लिए है। अशित मजूमदार ने यह भी बताया कि पार्टी की ओर से न्यायिक फैसलों में सुधार और न्यायपालिका की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि टीएमसी राज्य में कानून का सम्मान करती है और सुनिश्चित करती है कि सभी कानूनी प्रक्रियाएं पारदर्शी और निष्पक्ष हों।
राज्य राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान आगामी चुनावी परिदृश्य और राजनीतिक रणनीतियों पर भी असर डाल सकता है। उनके अनुसार, न्यायपालिका और राजनीति के बीच इस तरह के विवाद अक्सर समाज और मीडिया में बड़े बहस का विषय बन जाते हैं। अशित मजूमदार के बयान ने राज्य में न्यायपालिका और राजनीतिक दलों के बीच संबंधों पर नए सिरे से चर्चा शुरू कर दी है, और राजनीतिक पर्यवेक्षक इस पर गहरी नजर बनाए हुए हैं।
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