पश्चिम बंगाल

Asansol: आसनसोल साउथ में चुनावी मुकाबला हुआ रोचक

Admindelhi1
25 March 2026 2:27 AM IST
Asansol: आसनसोल साउथ में चुनावी मुकाबला हुआ रोचक
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आसनसोल: विधानसभा चुनाव से पहले सीट पर राजनीतिक मुकाबला और दिलचस्प होता जा रहा है। जनसंघर्ष मंच के प्रमुख नेता आकाश घटक ने नेशनल कंज़र्वेटिव पार्टी (एनसीपी) के टिकट पर चुनावी मैदान में उतरकर एक नई राजनीतिक पहल की शुरुआत की है।

राजन्या हलदर सीधे तौर पर भाजपा उम्मीदवार को चुनौती दे रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता ने “भूमि कन्या” के रूप में जिस भरोसे के साथ अग्निमित्रा पाल को चुना था, वे उन उम्मीदों पर खरी नहीं उतरीं और क्षेत्र की मूलभूत समस्याएं अब भी जस की तस बनी हुई हैं। उन्होंने खास तौर पर डामरा, बर्णपुर, एक नंबर तिराट और बलभपुर इलाकों में अवैध बालू उठाव को बड़ा मुद्दा बनाया। उनका कहना है कि बालू लदे वाहनों से हुई दुर्घटनाओं में कई लोगों की जान गई, लेकिन पीड़ित परिवारों को न मुआवजा मिला और न ही किसी बड़ी पार्टी ने उनकी सुध ली।

राजन्या हलदर ने खुद को “बाहरी उम्मीदवार” बताते हुए कहा कि वह की रहने वाली हैं, लेकिन आसनसोल की जनता की समस्याओं को समझकर उनके समाधान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने दावा किया कि उन्हें बांग्लाभाषी समाज और का समर्थन मिल रहा है।

वहीं से एनसीपी ने को उम्मीदवार बनाया है, जो तृणमूल कांग्रेस के को सीधी टक्कर दे रही हैं। रिया मुखर्जी ने इलाके में कथित कोयला तस्करी और स्थानीय समस्याओं को प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाया है।

राजन्या हलदर और ने आरोप लगाया कि हरेराम सिंह और उनके बेटे का इलाके के कोयला माफियाओं से गहरा संबंध है और उनके संरक्षण में जामुड़िया में अवैध कोयला तस्करी जारी है। उन्होंने दावा किया कि इस बार जनता बदलाव के मूड में है और चुनाव के बाद इन नेताओं को “घर वापसी” का रास्ता दिखाया जाएगा।

राजन्या हलदर ने बताया कि अब तक राज्य की सात विधानसभा सीटों पर एनसीपी उम्मीदवार उतारे जा चुके हैं और आने वाले दिनों में और सीटों पर उम्मीदवार घोषित किए जाएंगे। पार्टी का मुख्य उद्देश्य युवाओं को राजनीति में लाना और एक मजबूत वैकल्पिक शक्ति खड़ी करना है।

जनसंघर्ष मंच के प्रमुख नेता आकाश घटक ने एनसीपी और भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि बड़ी पार्टियों ने वर्षों से क्षेत्र के संसाधनों का इस्तेमाल किया, लेकिन आम लोगों के विकास पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया। बेरोजगारी, बंद फैक्ट्रियां, पेयजल संकट, खराब सड़कें और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया।

उम्मीदवारों ने साफ कहा कि जीतने के बाद वे किसी भी बड़ी पार्टी के साथ समझौता नहीं करेंगे और स्वतंत्र रूप से जनता के हित में काम करेंगे।

अब चुनावी मैदान में इस नए विकल्प को लेकर चर्चा तेज है—देखना होगा कि जनता इस पर कितना भरोसा जताती है।

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