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TMC के नाराज सांसद और विधायक मेदिनीपुर में शामिल हुए सुवेंदु अधिकारी की बैठक में

West Bengal वेस्ट बंगाल: पश्चिम बंगाल की राजनीति में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कुछ नाराज सांसद और विधायक अब खुले रूप से अलग रुख अपना रहे हैं। सीनियर नेता काकोली घोष दस्तीदार की लीडरशिप में 20 लोकसभा सांसदों ने हाल ही में स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर भाजपा नेतृत्व वाली NDA को “अलग ग्रुप” के रूप में समर्थन देने का दावा किया था। इसके ठीक एक दिन बाद, TMC के नाराज सांसद जून मलैया और दीपक अधिकारी (देव) पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की पूर्व मेदिनीपुर ज़िले में आयोजित एडमिनिस्ट्रेटिव बैठक में शामिल हुए।
मेदिनीपुर की यह बैठक राजनीतिक महत्व के लिहाज से अहम मानी जा रही है। मलैया, जो मेदिनीपुर के सांसद हैं, और घाटल से विधायक दीपक अधिकारी (देव) इस बैठक में पहुंचे। इन दोनों सांसदों के बारे में कहा जा रहा है कि वे लोकसभा में बागी TMC कैंप में चले गए हैं। इसके अलावा, केशपुर से विधायक सिउली साहा भी मंगलवार को कोलाघाट में हुई इस बैठक में शामिल हुए।
सिउली साहा उन 58 बागी MLAs में से एक हैं, जिन्हें विधानसभा में लेजिस्लेचर पार्टी का डिप्टी लीडर चुना गया है। उन्होंने बैठक के दौरान कहा कि चुने हुए प्रतिनिधियों का प्राथमिक उद्देश्य अपने क्षेत्रों और जनता की भलाई के लिए काम करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम किसी राजनीतिक दबाव या व्यक्तिगत फायदे के लिए नहीं, बल्कि जनता की भलाई के लिए उठाया गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में TMC के भीतर असंतोष बढ़ रहा है और बागी सांसद और विधायकों की इस तरह की सक्रियता पार्टी के लिए चुनौती पेश कर सकती है। इसके अलावा, सुवेंदु अधिकारी की मौजूदगी में हुई बैठक से यह संकेत मिलता है कि विपक्षी नेतृत्व बागी नेताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहा है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, जून मलैया और दीपक अधिकारी (देव) ने बैठक में सक्रिय भूमिका निभाई और अपनी स्थिति स्पष्ट की। उनका यह कदम पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष और संगठनात्मक तनाव को उजागर करता है। वहीं, काकोली घोष दस्तीदार ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि सांसदों का एक हिस्सा NDA के अलग ग्रुप का समर्थन कर सकता है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि TMC में बागी सांसद और विधायकों की यह चाल विधानसभा और लोकसभा स्तर पर पार्टी की मजबूती पर असर डाल सकती है। इस स्थिति में पार्टी नेतृत्व को अपनी रणनीति बदलनी पड़ सकती है और नाराज नेताओं को मनाने के लिए कदम उठाने पड़ सकते हैं।
हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इस बैठक के बाद बागी सांसद और विधायक आगे क्या राजनीतिक कदम उठाएंगे। लेकिन यह कदम पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकता है और आगामी विधानसभा सत्र में पार्टी की स्थिति को प्रभावित कर सकता है।





