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पश्चिम बंगाल
दुर्गापूजा के उत्साह के बीच सतर्कता, प्रवेश और निकास मार्गों पर कड़ी निगरानी
nidhi
19 Oct 2026 7:42 AM IST

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पंडाल दर्शन के दौरान संभलकर आगे बढ़ रहे लोग
कोलकाता: चोरबागान दुर्गापूजा पंडाल में हुई भगदड़ के बाद पश्चिम बंगाल में उत्सव के बीच सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता बन गई है। हादसे से विचलित होने के बावजूद श्रद्धालुओं का पंडालों में पहुंचना जारी है। रविवार को कोलकाता के विभिन्न पूजा पंडालों में लोग दर्शन करने पहुंचे, लेकिन उनके व्यवहार में सावधानी स्पष्ट दिखाई दी। परिवार के साथ निकले लोग भीड़ का दबाव देखकर आगे बढ़ते नजर आए। बच्चों और बुजुर्गों को साथ रखने वाले दर्शनार्थी अधिक भीड़ वाले रास्तों से बचने का प्रयास कर रहे थे।
कई स्थानों पर लोगों ने धक्का-मुक्की के बीच आगे बढ़ने के बजाय इंतजार करना बेहतर समझा। श्रद्धालु एक-दूसरे को संभलकर चलने की सलाह देते भी दिखाई दिए। पंडालों की थीम और सजावट देखने की उत्सुकता के साथ अब सुरक्षित प्रवेश और बाहर निकलने की चिंता भी जुड़ गई है।
प्रमुख पंडालों में बढ़ाई गई निगरानी
श्रीभूमि स्पोर्टिंग क्लब, एकडालिया एवरग्रीन, सुरुचि संघ, सिंघी पार्क, संतोष मित्रा स्क्वायर और चेतला अग्रणी सहित प्रमुख पूजा पंडालों में सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रवेश और निकास मार्गों पर निगरानी बढ़ाई गई है। भीड़ के दबाव के अनुसार आवाजाही नियंत्रित करने की व्यवस्था की जा रही है। दमदम पार्क सार्वजनिन पूजा समिति के संयुक्त सचिव मलय दे के मुताबिक, उनके यहां पुलिसकर्मियों की संख्या तीन गुना की गई है। समिति ने स्वयंसेवकों की संख्या भी बढ़ाई है। परिसर की गतिविधियों पर 20 सीसीटीवी कैमरों से नजर रखी जा रही है। लाउडस्पीकर से दर्शनार्थियों को अनुशासन बनाए रखने के लिए कहा जा रहा है।
सुरक्षा समिति ने शुरू किया निरीक्षण
बड़े पंडालों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति ने रविवार को निरीक्षण शुरू किया। समिति ने सियालदह स्टेशन के पास संतोष मित्रा स्क्वायर से दौरा शुरू करते हुए प्रवेश द्वार, निकास रास्तों और रोशनी की व्यवस्था का जायजा लिया। अधिक भीड़ आकर्षित करने वाले दूसरे पंडालों की व्यवस्थाओं की भी जांच की जा रही है। प्रशासन ने बाहर निकलने के रास्ते पर्याप्त चौड़े रखने, रोशनी बढ़ाने और अस्थायी रस्सियों से बनने वाली रुकावटें हटाने पर जोर दिया है। निरीक्षण में यह देखा जा रहा है कि श्रद्धालुओं के प्रवेश के साथ उनकी सुरक्षित निकासी की व्यवस्था कितनी प्रभावी है। संकरे रास्तों और भीड़ के ठहराव वाले स्थानों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
कुछ पंडालों में अस्थायी रोक के बाद दोबारा प्रवेश
हादसे के बाद चेतला अग्रणी, सुरुचि संघ, टाला प्रत्यय और संतोष मित्रा स्क्वायर जैसे कुछ प्रमुख पंडालों में अस्थायी रूप से प्रवेश रोका गया था। आयोजकों ने दर्शनार्थियों से लौटने का अनुरोध किया। करीब दो से तीन घंटे बाद कुछ स्थानों पर प्रवेश फिर शुरू हुआ। आयोजक पुलिस के निर्देशों के अनुसार व्यवस्थाओं में बदलाव कर रहे हैं। संतोष मित्रा स्क्वायर में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रकाश और ध्वनि कार्यक्रम की अवधि घटाने पर सहमति बनी है। काशी बोस लेन पूजा के आयोजकों ने निरीक्षण के बाद रोशनी बढ़ाने की जानकारी दी। प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन के लिए अनुभवी पुलिस अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी है। जरूरत पड़ने पर प्रवेश सीमित रखने तथा बाहर एलईडी स्क्रीन से दर्शन कराने जैसे विकल्पों पर भी जोर दिया गया है।
चोरबागान इलाके में प्रतिबंधात्मक आदेश
चोरबागान हादसे के बाद आसपास के बड़े क्षेत्र, जिसमें सेंट्रल एवेन्यू भी शामिल है, में तीन दिन के लिए प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए गए हैं। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत पांच या अधिक लोगों के एकत्र होने, जुलूस और सार्वजनिक सभाओं पर रोक लगाई गई है। पुलिस के अनुसार, संभावित कानून-व्यवस्था संबंधी परेशानी की सूचना के आधार पर यह कदम उठाया गया। गिरीश पार्क पुलिस ने घटना को लेकर मामला दर्ज कर जांच शुरू की है। रविवार को इस सिलसिले में सात लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी दी गई। जांच का उद्देश्य दुर्घटना के कारणों का पता लगाना और जिम्मेदारी तय करना है।
चोरबागान की भगदड़ में 19 लोगों की मौत और 25 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। घटना के बाद संबंधित पंडाल बंद कर दिया गया। अन्य पंडालों में दर्शन स्थानीय सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ की स्थिति के अनुसार जारी हैं। पूरे शहर के सभी पंडाल बंद करने का कोई व्यापक आदेश सामने नहीं आया है। हालांकि, निरीक्षण और भीड़ के दबाव के आधार पर किसी आयोजन स्थल की प्रवेश व्यवस्था बदली जा सकती है।
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