पश्चिम बंगाल

ममता बनर्जी के काफिले पर पथराव का आरोप बोलीं- बड़े पत्थर और जूते फेंके गए जान को था खतरा

Kavita2
9 Aug 2026 4:40 PM IST
ममता बनर्जी के काफिले पर पथराव का आरोप बोलीं- बड़े पत्थर और जूते फेंके गए जान को था खतरा
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कोलकाता। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने रविवार को उत्तर 24 परगना जिले में अपने काफिले पर कथित हमले को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि मृत तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ता बिरजू केवट के परिवार से मुलाकात के दौरान उनके काफिले को प्रदर्शनकारियों ने रोक लिया। इस दौरान उनकी कार पर पत्थर, पानी की बोतलें और जूते-चप्पल फेंके गए।

ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों ने उनके खिलाफ नारेबाजी भी की और उन्हें ‘चोर’ कहकर संबोधित किया। उन्होंने कहा कि उनकी कार पर बड़े-बड़े पत्थर फेंके गए, जिससे स्थिति बेहद खतरनाक हो गई थी। हालांकि, घटना में किसी के घायल होने या वाहन को हुए नुकसान के संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।

मृत कार्यकर्ता के परिवार से मिलने पहुंची थीं

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, ममता बनर्जी उत्तर 24 परगना में मृत तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ता बिरजू केवट के परिवार से मुलाकात करने पहुंची थीं। इसी दौरान उनके काफिले को प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर रोक दिया।

ममता बनर्जी के अनुसार, अचानक प्रदर्शनकारियों की भीड़ ने उनके काफिले की ओर वस्तुएं फेंकना शुरू कर दिया। उन्होंने दावा किया कि कार पर पानी की बोतलें, जूते-चप्पल और पत्थर फेंके गए। इससे कुछ समय के लिए मौके पर तनाव की स्थिति बन गई।

घटना के बाद ममता बनर्जी ने सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मौके पर पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पर्याप्त कार्रवाई नहीं की गई।

‘बड़े पत्थर फेंके गए’

ममता बनर्जी ने घटना को गंभीर बताते हुए कहा कि उनकी कार पर बड़े-बड़े पत्थर फेंके गए। उन्होंने कहा कि यदि कार की खिड़कियां खुली होतीं तो उन्हें गंभीर चोट लग सकती थी।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह के हमले में किसी की जान भी जा सकती थी। उनके मुताबिक, यदि पत्थर कार के अंदर पहुंच जाते तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि काफिले में मौजूद लोगों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई थी।

ममता ने कहा कि वह खुद इस घटना से चिंतित हैं और इसे सामान्य विरोध प्रदर्शन नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार, विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन हिंसक तरीके से किसी के काफिले पर हमला करना स्वीकार्य नहीं है।

पुलिस की मौजूदगी में घटना का आरोप

ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि घटना के समय पुलिस मौके पर मौजूद थी। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों को पर्याप्त रूप से नियंत्रित नहीं किया गया। उन्होंने पुलिस की भूमिका और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि स्थिति और बिगड़ती तो गंभीर परिणाम हो सकते थे।

उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले नेताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। किसी भी राजनीतिक मतभेद या विरोध के बावजूद हिंसा की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

हालांकि, घटना के संबंध में पुलिस या प्रशासन की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया और पूरे घटनाक्रम का स्वतंत्र विवरण सामने आना अभी बाकी है। इसलिए ममता बनर्जी की ओर से लगाए गए आरोपों की पूरी पुष्टि आधिकारिक जांच के बाद ही हो सकेगी।

प्रदर्शनकारियों ने लगाए नारे

ममता बनर्जी ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों ने उनके खिलाफ नारेबाजी की और उन्हें ‘चोर’ कहकर संबोधित किया। उन्होंने कहा कि विरोध करने वाले लोगों ने राजनीतिक नाराजगी व्यक्त करने के बजाय काफिले को रोकने और उस पर वस्तुएं फेंकने का रास्ता अपनाया।

इस घटना के बाद राज्य की राजनीति में भी आरोप-प्रत्यारोप तेज होने की संभावना है। पश्चिम बंगाल में राजनीतिक दलों के बीच पहले से ही तीखी बयानबाजी होती रही है। ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री के काफिले पर कथित पथराव का मामला राजनीतिक विवाद का नया मुद्दा बन सकता है।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

घटना ने वीआईपी सुरक्षा और स्थानीय कानून-व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि किसी पूर्व मुख्यमंत्री के काफिले के आसपास बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी पहुंचते हैं, तो सुरक्षा एजेंसियों के लिए भीड़ को नियंत्रित करना और काफिले को सुरक्षित निकालना महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है।

ममता बनर्जी का आरोप है कि पुलिस की मौजूदगी के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने काफिले तक पहुंच बनाई और पथराव जैसी स्थिति पैदा हुई। अब यह जांच का विषय होगा कि मौके पर कितनी पुलिस तैनात थी, प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए और काफिले की सुरक्षा के लिए निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन हुआ या नहीं।

घटना की जांच से साफ होगी तस्वीर

फिलहाल पूरे घटनाक्रम को लेकर ममता बनर्जी की ओर से गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने इसे अपनी और काफिले में मौजूद लोगों की जान के लिए खतरा बताया है। दूसरी ओर, घटना की वास्तविक परिस्थितियों को स्पष्ट करने के लिए प्रशासनिक और पुलिस जांच महत्वपूर्ण होगी।

जांच के दौरान मौके पर मौजूद लोगों के बयान, वीडियो फुटेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाया जा सकता है कि प्रदर्शन किस तरह शुरू हुआ और स्थिति किस बिंदु पर तनावपूर्ण हुई।

ममता बनर्जी ने जिस तरह अपनी कार पर बड़े पत्थर, जूते और पानी की बोतलें फेंके जाने का आरोप लगाया है, उससे मामला गंभीर हो गया है। अब निगाहें पुलिस और प्रशासन की आधिकारिक कार्रवाई पर हैं। यदि जांच में पथराव और सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही के आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

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