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कोलकाता। पश्चिम बंगाल की चर्चित नंदीग्राम विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से पहले कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान की गिरफ्तारी ने बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। कांग्रेस नेताओं ने गिरफ्तारी के तरीके और उसके समय को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रदेश कांग्रेस सचिव सुभाषीष भट्टाचार्य ने दावा किया कि उन्हें और मिलन प्रधान को अलग-अलग वाहनों में ले जाया गया और उनकी आंखें बंद कराकर मंदारमणि की ओर ले जाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि एक रिसॉर्ट में उन पर मिलन प्रधान से नामांकन वापस कराने के लिए दबाव बनाया गया। हालांकि ये कांग्रेस नेता के आरोप हैं; पुलिस ने मिलन प्रधान की गिरफ्तारी को पुराने मामलों में लंबित गैर-जमानती वारंटों की तामील बताया है।
मामला शुक्रवार, 18 सितंबर को उस समय सामने आया, जब पुलिस ने नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक प्रधान के खिलाफ 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन से जुड़े मामलों में चार गैर-जमानती वारंट लंबित थे। इन मामलों में हत्या, हत्या के प्रयास और दंगा समेत कई गंभीर आरोप बताए गए हैं। शनिवार को उन्हें अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 3 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
इस गिरफ्तारी को लेकर विवाद इसलिए भी बढ़ गया क्योंकि घटनाक्रम नंदीग्राम के बदलते चुनावी समीकरणों के बीच हुआ। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल गुट की प्रत्याशी संचिता प्रधान डे ने चुनाव मैदान से हटने का फैसला किया था। इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा की। इसके कुछ ही घंटों बाद प्रधान की गिरफ्तारी हुई, जिसके बाद कांग्रेस और ममता समर्थक नेताओं ने कार्रवाई के समय पर सवाल उठाए।
प्रदेश कांग्रेस सचिव सुभाषीष भट्टाचार्य ने पूरे घटनाक्रम को लेकर अपना पक्ष रखते हुए दावा किया कि वह उस मकान में मौजूद थे, जहां मिलन प्रधान ठहरे हुए थे। उनके मुताबिक अचानक शोर सुनाई दिया और प्रधान ने उन्हें मदद के लिए पुकारा। बाहर निकलने पर उन्होंने देखा कि पुलिसकर्मी प्रधान को अपने साथ ले जा रहे थे। भट्टाचार्य का कहना है कि उन्होंने इसका विरोध किया और पुलिस से पूछा कि कांग्रेस प्रत्याशी को इस तरह क्यों ले जाया जा रहा है।
भट्टाचार्य के अनुसार, पुलिस के साथ उनकी करीब 15 मिनट तक बातचीत हुई। जब उन्होंने प्रधान को वाहन में ले जाने का विरोध किया तो उन्हें भी हिरासत में लेने की बात कही गई। उन्होंने दावा किया कि इसके बाद दोनों को अलग-अलग वाहनों में बैठाकर ले जाया गया। भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि उनकी आंखें बंद कराई गईं और उन्हें मंदारमणि की ओर एक रिसॉर्ट में ले जाया गया।
कांग्रेस नेता का आरोप है कि रिसॉर्ट में उनसे मिलन प्रधान को चुनाव से हटने के लिए समझाने को कहा गया। भट्टाचार्य के मुताबिक उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया। कांग्रेस ने इन आरोपों के आधार पर पूरी कार्रवाई को राजनीतिक दबाव से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, उपलब्ध पुलिस पक्ष में इन आरोपों की पुष्टि नहीं की गई है और गिरफ्तारी का आधार अदालत से जारी पुराने गैर-जमानती वारंटों को बताया गया है।
पूर्व बर्दवान से कांग्रेस नेता और प्रदेश अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने भी गिरफ्तारी पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी चुनाव मैदान से पीछे नहीं हटेगी। कांग्रेस का कहना है कि प्रत्याशी के हिरासत में होने के बावजूद कार्यकर्ता नंदीग्राम में चुनाव प्रचार जारी रखेंगे। पार्टी ने यह भी सवाल उठाया कि यदि मामले इतने पुराने थे तो चुनाव के ठीक पहले ही गिरफ्तारी क्यों की गई।
पुलिस की ओर से इस पर अलग पक्ष सामने रखा गया है। पुलिस के अनुसार, मिलन प्रधान के खिलाफ चार गैर-जमानती वारंट लंबित थे और वह लंबे समय से इन मामलों में वांछित थे। पुलिस का कहना है कि चुनाव के दौरान लंबित वारंटों को लागू करने की प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की गई। इस प्रकार कांग्रेस जहां गिरफ्तारी के समय और तरीके को लेकर राजनीतिक उद्देश्य का आरोप लगा रही है, वहीं पुलिस इसे लंबित न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बता रही है।
शनिवार को मिलन प्रधान को हल्दिया की अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उन्हें 3 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। रिपोर्टों के अनुसार, उनके खिलाफ 2007 के नंदीग्राम आंदोलन से जुड़े कई मामले हैं। प्रधान के वकील के मुताबिक कुछ वारंटों के आधार पर न्यायिक हिरासत का आदेश दिया गया है, जबकि एक अन्य वारंट से संबंधित प्रक्रिया अलग अदालत में होनी है।
नंदीग्राम का मौजूदा घटनाक्रम तृणमूल कांग्रेस के अंदर चल रहे नाम और चुनाव चिह्न संबंधी विवाद से भी जुड़ गया है। चुनाव आयोग ने प्रतिद्वंद्वी तृणमूल गुटों के बीच विवाद के बीच अंतरिम तौर पर अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए हैं। इसी राजनीतिक परिस्थितियों के बीच ममता बनर्जी समर्थित प्रत्याशी संचिता प्रधान डे ने नंदीग्राम से अपनी उम्मीदवारी वापस ली और उसके बाद ममता गुट ने कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को समर्थन देने का फैसला किया।
कांग्रेस प्रत्याशी की गिरफ्तारी पर पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि कार्रवाई राजनीतिक रूप से प्रेरित है और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। दूसरी ओर, भाजपा से जुड़े नेताओं ने इन आरोपों को खारिज करते हुए मामले को कानून और लंबित वारंटों से जुड़ी कार्रवाई बताया है। इस तरह गिरफ्तारी को लेकर राजनीतिक दलों के दावे एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं।
नंदीग्राम उपचुनाव के लिए मतदान **6 अक्टूबर 2026** को होना है और मतगणना **9 अक्टूबर** को निर्धारित है। ऐसे में मतदान से कुछ सप्ताह पहले प्रत्याशी की गिरफ्तारी ने चुनावी माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया है। कांग्रेस ने साफ किया है कि मिलन प्रधान के जेल में रहने की स्थिति में भी पार्टी अपना प्रचार अभियान जारी रखेगी।
फिलहाल इस मामले में दो अलग-अलग पक्ष सामने हैं। कांग्रेस नेता सुभाषीष भट्टाचार्य का आरोप है कि उन्हें आंखें बंद कराकर मंदारमणि ले जाया गया और कांग्रेस प्रत्याशी की उम्मीदवारी वापस कराने का दबाव बनाया गया। वहीं पुलिस का कहना है कि मिलन प्रधान की गिरफ्तारी 2007 से जुड़े मामलों में जारी चार गैर-जमानती वारंटों के आधार पर हुई। इन आरोपों और प्रत्यारोपों के बीच अदालत ने प्रधान को 3 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। अब नंदीग्राम में राजनीतिक दलों की नजर चुनावी प्रचार के साथ इस मामले में आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर भी बनी हुई है।
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