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West Bengal पश्चिम बंगाल : पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी और कानूनी कार्रवाई को लेकर विवाद तेज हो गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद और पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने अपने पूर्व सहयोगी और अब बागी गुट में शामिल विधायक मदन मित्रा को कानूनी नोटिस भेजा है। नोटिस में सोशल मीडिया पर कथित रूप से मानहानि करने वाले बयान देने का आरोप लगाते हुए सार्वजनिक माफी और 10 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की गई है।
अभिषेक बनर्जी की ओर से भेजे गए इस नोटिस में आरोप लगाया गया है कि मदन मित्रा ने उनके खिलाफ झूठे, बेबुनियाद और दुर्भावनापूर्ण बयान दिए हैं, जिससे उनकी व्यक्तिगत छवि, राजनीतिक प्रतिष्ठा और सामाजिक सम्मान को नुकसान पहुंचा है। यह नोटिस मदन मित्रा के 19 जुलाई को किए गए एक फेसबुक लाइव सेशन के बाद भेजा गया है।
तृणमूल कांग्रेस की ओर से साझा किए गए कानूनी नोटिस के अनुसार, फेसबुक लाइव के दौरान मदन मित्रा ने कथित तौर पर अभिषेक बनर्जी के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए थे। नोटिस में दावा किया गया है कि विधायक ने अभिषेक बनर्जी को ‘हत्यारा’ कहा और आरोप लगाया कि वह ‘सुपारी किलर’ यानी कॉन्ट्रैक्ट किलर की मदद लेते हैं।
अभिषेक बनर्जी के वकील की ओर से भेजे गए नोटिस में इन आरोपों को पूरी तरह झूठा, मनगढ़ंत और बिना किसी प्रमाण के बताया गया है। नोटिस में कहा गया है कि इस तरह के बयान अभिषेक बनर्जी की छवि खराब करने की कोशिश हैं और इनके कारण उनकी राजनीतिक विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा है।
नोटिस में मदन मित्रा से मांग की गई है कि वह 72 घंटे के भीतर अपने बयान वापस लें और सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। इसके लिए लिखित बयान के साथ वीडियो के माध्यम से भी माफी मांगने की बात कही गई है। साथ ही उनसे भविष्य में इस तरह के बयान दोबारा नहीं देने की चेतावनी दी गई है।
कानूनी नोटिस में कहा गया है कि मदन मित्रा को अभिषेक बनर्जी के खिलाफ किसी भी तरह के मानहानिकारक, झूठे या आधारहीन बयान देने, प्रकाशित करने और प्रसारित करने से तुरंत रोकना होगा। इसके अलावा नोटिस में 10 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग भी की गई है।
मदन मित्रा और अभिषेक बनर्जी के बीच कभी करीबी राजनीतिक संबंध रहे हैं। मदन मित्रा लंबे समय तक तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में शामिल रहे हैं और ममता बनर्जी सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। हालांकि, हाल के दिनों में उन्होंने पार्टी नेतृत्व से नाराजगी जाहिर की और बाद में बागी गुट का साथ पकड़ लिया।
मदन मित्रा ने पहले कहा था कि उन्होंने तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा इसलिए दिया क्योंकि वह पार्टी में प्रभावी तरीके से काम नहीं कर पा रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनकी चिंताओं को पार्टी नेतृत्व की ओर से गंभीरता से नहीं लिया गया। इसके बाद उन्होंने अलग राजनीतिक रास्ता चुनने का फैसला किया।
इस पूरे विवाद ने बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ अभिषेक बनर्जी ने कानूनी रास्ता अपनाकर अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों का जवाब दिया है, वहीं मदन मित्रा के बयान को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है।
अब देखने वाली बात होगी कि मदन मित्रा इस कानूनी नोटिस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या वह माफी मांगते हैं या फिर अपने बयानों पर कायम रहते हैं। यह विवाद आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति में और तूल पकड़ सकता है।





