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Kolkata कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद अभिषेक बनर्जी ने चुनाव आयोग (Election Commission) पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि आयोग बिना किसी चर्चा, परामर्श या संवाद के SIR (Special Investigation Report) की घोषणा कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह निर्णय एकतरफा है और आयोग की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। अभिषेक बनर्जी ने कहा, “जैसा कि मैंने पहले भी कहा है, बिना किसी परामर्श, बातचीत या विचार-विमर्श के चुनाव आयोग ने SIR की घोषणा कर दी है। यह स्पष्ट संकेत है कि आयोग की कार्यप्रणाली सही दिशा में नहीं चल रही है। 2002 में आखिरी बार ऐसा सर्वे हुआ था, जिसे पूरा करने में दो साल का समय लगा था, लेकिन अब वही आयोग दो महीने में पूरा करने की बात कर रहा है — यह अव्यवहारिक है।”
उन्होंने कहा कि इतनी जटिल प्रक्रिया को इतनी कम अवधि में पूरा करने की योजना यह दर्शाती है कि आयोग पर राजनीतिक दबाव है या फिर उसे जल्दबाजी में एक विशेष उद्देश्य साधना है। बनर्जी ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग जैसे संस्थान से पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता की उम्मीद की जाती है, लेकिन वर्तमान में इन मूल्यों से समझौता होता दिख रहा है। टीएमसी सांसद ने सवाल उठाया कि चुनाव आयोग ने SIR को लेकर राजनीतिक दलों या जनता से कोई चर्चा क्यों नहीं की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी भी प्रक्रिया को लागू करने से पहले जनता की भागीदारी और विपक्ष से संवाद बेहद जरूरी होता है, लेकिन आयोग ने इस सिद्धांत की अनदेखी की है।
बनर्जी ने यह भी कहा कि 2002 की प्रक्रिया में विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और राजनीतिक विश्लेषकों को शामिल किया गया था, जिसके चलते रिपोर्ट तैयार करने में दो वर्ष का समय लगा था। “अब जबकि आयोग वही सर्वे दो महीने में पूरा करना चाहता है, तो यह साफ संकेत है कि गुणवत्ता और निष्पक्षता पर समझौता किया जा रहा है,” उन्होंने जोड़ा। टीएमसी ने इस पूरे मामले में चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण मांगा है और कहा है कि अगर आयोग इस दिशा में पारदर्शी नहीं हुआ तो वह इस मुद्दे को संसद और जनता के बीच मजबूती से उठाएगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अभिषेक बनर्जी का यह बयान पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर से चुनाव आयोग बनाम राज्य सरकार की बहस को तेज कर सकता है। इस बीच, भाजपा ने टीएमसी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संस्था है और उस पर किसी तरह का दबाव नहीं है। हालांकि, अभिषेक बनर्जी ने दोहराया कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति या संस्था से नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा से जुड़ी है। उन्होंने कहा, “हम केवल यह चाहते हैं कि चुनाव आयोग निष्पक्षता के साथ काम करे। लोकतंत्र में पारदर्शिता ही सबसे बड़ी ताकत है, और हम उसी की मांग कर रहे हैं।”
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