- Home
- /
- राज्य
- /
- पश्चिम बंगाल
- /
- पश्चिम बंगाल में...
पश्चिम बंगाल में ‘सारथी’ योजना के तहत 12.59 लाख छात्रों को मिलेंगी साइकिलें, CM ने किया शुभारंभ

कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने मंगलवार को राज्य की नई नाम वाली ‘सारथी’ साइकिल योजना का शुभारंभ करते हुए घोषणा की कि मौजूदा शैक्षणिक वर्ष में 12.59 लाख विद्यार्थियों को साइकिलें वितरित की जाएंगी। हावड़ा के मधुसूदन पाल चौधरी हाई स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने योजना के नए नाम और स्वरूप के साथ साइकिल वितरण की शुरुआत की।
यह योजना पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार की ‘सबुज साथी’ योजना का नया नाम है। ‘सबुज साथी’ के तहत सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों तथा मदरसों के विद्यार्थियों को साइकिल उपलब्ध कराई जाती थी। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को स्कूल आने-जाने में सुविधा देना, उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना और स्कूल छोड़ने की दर कम करना था।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कार्यक्रम में कहा कि उनकी सरकार इस शैक्षणिक वर्ष में कुल 12.59 लाख छात्रों को ‘सारथी’ योजना के तहत साइकिल देगी। इसके साथ ही योजना का नाम और पहचान भी बदल दी गई है। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद पूर्ववर्ती योजना को नए नाम ‘सारथी’ के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार की साइकिल खरीद व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले ‘सबुज साथी’ योजना के तहत विद्यार्थियों को दी जाने वाली साइकिलों की गुणवत्ता खराब थी। यह आरोप मुख्यमंत्री की ओर से लगाया गया है; उपलब्ध आधिकारिक पुराने रिकॉर्ड में ‘सबुज साथी’ योजना के लिए साइकिल खरीद ई-टेंडर प्रक्रिया के जरिए किए जाने और तकनीकी विनिर्देश तय किए जाने का उल्लेख है।
पुरानी योजना के आधिकारिक विवरण के मुताबिक साइकिल खरीद के लिए ई-टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाती थी। तकनीकी मानकों को तय करने के लिए संबंधित अनुसंधान एवं विकास संस्थान से परामर्श किया गया था और अलग-अलग चरणों में प्रमुख साइकिल निर्माताओं का चयन किया गया था। इसलिए गुणवत्ता को लेकर मुख्यमंत्री का ताजा बयान राजनीतिक आरोप के रूप में सामने आया है।
हावड़ा में हुए कार्यक्रम में विद्यार्थियों को नई योजना के तहत साइकिलें दी गईं। राज्य सरकार का कहना है कि साइकिल उपलब्ध कराने से विद्यार्थियों को स्कूल तक पहुंचने में सुविधा होगी, खासकर उन क्षेत्रों में जहां छात्रों को घर से स्कूल तक लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।
‘सबुज साथी’ योजना की शुरुआत वर्ष 2015 में हुई थी। उस समय राज्य सरकार ने सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और प्रायोजित स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को साइकिल देने का लक्ष्य रखा था। शुरुआत में लगभग 40 लाख विद्यार्थियों को योजना के दायरे में लाने की बात कही गई थी।
पुरानी योजना के उद्देश्यों में विद्यार्थियों को माध्यमिक शिक्षा तक पहुंच आसान बनाना, स्कूल छोड़ने की दर कम करना, उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना और विशेष रूप से छात्राओं की आवाजाही को सुविधाजनक बनाना शामिल था। अब नई सरकार ने उसी वितरण व्यवस्था को ‘सारथी’ नाम देकर जारी रखने का फैसला किया है।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य विद्यार्थियों को बेहतर गुणवत्ता वाली साइकिल उपलब्ध कराना है। उन्होंने पिछली सरकार की खरीद प्रक्रिया की आलोचना करते हुए दावा किया कि विद्यार्थियों को मिलने वाली साइकिलों की गुणवत्ता को लेकर पहले शिकायतें थीं।
हालांकि इस आरोप पर पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार की ओर से तत्काल विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। योजना के पुराने सरकारी दस्तावेज बताते हैं कि खरीद प्रक्रिया में अलग-अलग विभाग और पश्चिम बंगाल एससी, एसटी डेवलपमेंट एंड फाइनेंस कॉरपोरेशन शामिल थे।
साइकिल वितरण योजना पश्चिम बंगाल में लंबे समय से स्कूली विद्यार्थियों के लिए बड़ी सरकारी योजनाओं में शामिल रही है। खासकर ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में साइकिल छात्रों को स्कूल तक पहुंचने के लिए स्वतंत्र साधन उपलब्ध कराती है।
‘सारथी’ योजना के तहत भी मूल उद्देश्य विद्यार्थियों की स्कूल तक पहुंच को आसान बनाए रखना है। राज्य सरकार ने इस बार 12.59 लाख विद्यार्थियों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है।
हावड़ा में आयोजित कार्यक्रम को नई सरकार की शिक्षा नीति से जुड़े शुरुआती बड़े कार्यक्रमों में भी देखा जा रहा है। कार्यक्रम के लिए स्कूल परिसर में विशेष तैयारियां की गई थीं और मुख्यमंत्री के हाथों विद्यार्थियों को साइकिल वितरण की शुरुआत की गई।
सरकार की ओर से योजना का नाम बदलने के साथ नया लोगो और नई पहचान भी सामने लाई गई है। इससे साफ है कि प्रशासन पुरानी साइकिल वितरण व्यवस्था को जारी रखते हुए उसे वर्तमान सरकार की योजना के रूप में नए स्वरूप में पेश करना चाहता है।
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान शिक्षा क्षेत्र में विद्यार्थियों को सुविधाएं देने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि आर्थिक या परिवहन संबंधी कारणों से किसी विद्यार्थी की पढ़ाई प्रभावित न हो।
स्कूली विद्यार्थियों के लिए साइकिल योजना का महत्व इसलिए भी है क्योंकि राज्य के कई हिस्सों में घर से स्कूल की दूरी अधिक होती है। सार्वजनिक परिवहन की सीमित उपलब्धता वाले क्षेत्रों में साइकिल विद्यार्थियों के लिए उपयोगी साधन बनती है।
पुरानी ‘सबुज साथी’ योजना में भी यही लक्ष्य प्रमुख रूप से दर्ज था। सरकारी दस्तावेजों में कहा गया था कि साइकिल वितरण से विद्यार्थियों की स्कूल तक पहुंच, उच्च शिक्षा में रुचि और छात्राओं के आत्मविश्वास को बढ़ाने की कोशिश की गई।
अब ‘सारथी’ योजना के तहत भी विद्यार्थियों तक इसी प्रकार की सुविधा पहुंचाई जाएगी। सरकार के सामने बड़ी चुनौती 12.59 लाख साइकिलों की खरीद, स्कूलों तक आपूर्ति और विद्यार्थियों में समयबद्ध वितरण सुनिश्चित करने की होगी।
साइकिलों की गुणवत्ता को लेकर मुख्यमंत्री द्वारा उठाए गए सवालों के बाद नई योजना में खरीद प्रक्रिया और गुणवत्ता मानकों पर भी नजर रहेगी। सरकार ने संकेत दिया है कि विद्यार्थियों को बेहतर गुणवत्ता की साइकिल उपलब्ध कराना उसकी प्राथमिकता होगी।
फिलहाल हावड़ा से ‘सारथी’ योजना की औपचारिक शुरुआत हो चुकी है। राज्य सरकार का लक्ष्य मौजूदा शैक्षणिक वर्ष में 12.59 लाख विद्यार्थियों तक साइकिल पहुंचाने का है। इसके साथ ही ‘सबुज साथी’ से ‘सारथी’ तक योजना के नाम और राजनीतिक पहचान में बदलाव भी पश्चिम बंगाल की शिक्षा और कल्याण योजनाओं को लेकर नई सरकार की दिशा को दर्शाता है।





