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उत्तरकाशी में 32 घंटे बाद यातायात शुरू
Uttarkashi: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण बंद पड़ा यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग (हाईवे) करीब 32 घंटे बाद यातायात के लिए खोल दिया गया। सड़क खुलने से स्थानीय लोगों, तीर्थयात्रियों और यात्रियों को बड़ी राहत मिली है। हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मार्ग पर भूस्खलन का खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है और यात्रियों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
यमुनोत्री धाम जाने वाला यह मार्ग उत्तराखंड के चारधाम यात्रा रूट का महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारी बारिश के चलते कई स्थानों पर पहाड़ियों से मलबा और चट्टानें गिरने के कारण सड़क अवरुद्ध हो गई थी। इससे सैकड़ों यात्री और स्थानीय लोग दोनों ओर फंस गए थे। सूचना मिलते ही प्रशासन, पुलिस, सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) और अन्य एजेंसियों ने सड़क खोलने का अभियान शुरू किया।
करीब 32 घंटे तक चले राहत और सफाई अभियान के दौरान जेसीबी और अन्य भारी मशीनों की मदद से मलबा हटाया गया। कई जगहों पर लगातार पत्थर गिरने के कारण कार्य में बाधा भी आई, लेकिन टीमों ने लगातार प्रयास जारी रखे। आखिरकार सड़क को एक लेन से यातायात के लिए खोल दिया गया।
प्रशासन ने बताया कि मार्ग खुलने के बावजूद संवेदनशील स्थानों पर भूस्खलन की आशंका बनी हुई है। मौसम विभाग की ओर से पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश का पूर्वानुमान जारी रहने के कारण स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। यात्रियों से अपील की गई है कि वे मौसम और सड़क की ताजा जानकारी लेकर ही यात्रा पर निकलें।
स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और प्रशासनिक निर्देशों का पालन करने को कहा है। संवेदनशील इलाकों में पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीमें तैनात हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
चारधाम यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं को भी सलाह दी गई है कि वे निर्धारित गति से वाहन चलाएं और पहाड़ी मार्गों पर विशेष सावधानी बरतें। यदि किसी स्थान पर पत्थर गिरने या सड़क बंद होने की सूचना मिले तो सुरक्षित स्थान पर रुककर प्रशासन के निर्देशों का इंतजार करें।
उत्तरकाशी सहित उत्तराखंड के कई पहाड़ी इलाकों में मानसून के दौरान भूस्खलन की घटनाएं आम हो जाती हैं। ऐसे में प्रशासन लगातार संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी कर रहा है और जरूरत पड़ने पर यातायात को अस्थायी रूप से रोका भी जा सकता है।
फिलहाल यमुनोत्री हाईवे पर यातायात बहाल होने से राहत जरूर मिली है, लेकिन लगातार बारिश और भूस्खलन के खतरे को देखते हुए आने वाले दिनों में भी सतर्कता बनाए रखना आवश्यक होगा।
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