उत्तराखंड

उत्तराखंड में स्कूलों को लेकर आंदोलन की चेतावनी

Kavita2
21 Sept 2026 9:27 AM IST
उत्तराखंड में स्कूलों को लेकर आंदोलन की चेतावनी
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देहरादून। दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने अब उत्तराखंड में शिक्षा व्यवस्था को लेकर आंदोलन की चेतावनी दी है। पार्टी ने प्रदेश में बंद पड़े प्राथमिक स्कूलों को दोबारा शुरू करने और सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने की मांग उठाई है। सीजेपी ने पुष्कर सिंह धामी सरकार को 10 दिन के भीतर ठोस रोडमैप जारी करने की मांग की है।

सीजेपी की ओर से कहा गया है कि अगर सरकार तय समय सीमा के भीतर कोई स्पष्ट योजना पेश नहीं करती है तो दो अक्तूबर के बाद प्रदेश में आंदोलन शुरू किया जाएगा। पार्टी ने आरोप लगाया कि राज्य के कई इलाकों में प्राथमिक विद्यालय बंद हो चुके हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है।

पार्टी के नेता अभिजीत दीपके के नेतृत्व में सीजेपी ने उत्तराखंड सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर लंबे समय से सवाल उठाए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर अपेक्षित सुधार नहीं दिखाई दे रहा है।

सीजेपी ने अपने अभियान के तहत महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और राजस्थान में भी स्कूलों की जर्जर स्थिति का मुद्दा उठाया है। पार्टी का कहना है कि देशभर में सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारना जरूरी है, क्योंकि बड़ी संख्या में बच्चे इन्हीं संस्थानों पर निर्भर हैं।

उत्तराखंड को देवभूमि बताते हुए सीजेपी ने कहा कि राज्य में शिक्षा का अधिकार हर बच्चे तक पहुंचना चाहिए। पार्टी ने आरोप लगाया कि कई क्षेत्रों में स्कूल बंद होने से बच्चों को दूर-दराज के इलाकों में पढ़ाई के लिए जाना पड़ रहा है। इससे खासकर ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों के परिवारों को परेशानी उठानी पड़ रही है।

पार्टी की ओर से जारी बयान में कहा गया कि सरकार को बंद पड़े स्कूलों को लेकर स्पष्ट नीति बनानी चाहिए। इसमें स्कूलों को फिर से संचालित करने, शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने जैसे मुद्दों को शामिल किया जाना चाहिए।

सीजेपी नेताओं ने कहा कि केवल घोषणाओं से शिक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं होगा, बल्कि धरातल पर काम करने की जरूरत है। उन्होंने सरकार से मांग की कि वह बंद स्कूलों की सूची जारी करे और उन्हें खोलने की समयसीमा तय करे।

वहीं, सरकार की ओर से इस मामले में अभी कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। शिक्षा विभाग पहले भी स्कूलों में छात्र संख्या, संसाधनों और शिक्षकों की उपलब्धता को लेकर कई योजनाओं पर काम करता रहा है। हालांकि सीजेपी का कहना है कि इन प्रयासों का असर जमीन पर दिखाई देना चाहिए।

राजनीतिक दृष्टि से भी सीजेपी का यह अभियान महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि विपक्षी दल और सामाजिक संगठन अक्सर सरकारी शिक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। ऐसे में सीजेपी ने भी इस मुद्दे को लेकर राज्य सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति अपनाई है।

पार्टी ने स्पष्ट किया है कि अगर सरकार 10 दिन के भीतर कोई ठोस कदम नहीं उठाती है तो दो अक्तूबर के बाद आंदोलन किया जाएगा। अब नजर इस बात पर है कि सरकार इस मांग पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या बंद पड़े प्राथमिक स्कूलों को लेकर कोई नई योजना सामने आती है।

फिलहाल सीजेपी के इस ऐलान के बाद उत्तराखंड में शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। बंद स्कूलों को फिर से खोलने की मांग को लेकर आने वाले दिनों में आंदोलन की दिशा क्या होगी, यह सरकार के अगले कदम पर निर्भर करेगा।

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