उत्तराखंड

Uttarakhand : वन मंत्री के गांव में गुलदार हमले के बाद ग्रामीणों का गुस्सा फूटा

Kavita2
25 May 2026 4:33 PM IST
Uttarakhand : वन मंत्री के गांव में गुलदार हमले के बाद ग्रामीणों का गुस्सा फूटा
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Uttarakhand उत्तराखंड : उत्तराखंड के वन मंत्री सुबोध उनियाल के पैतृक गांव औणी में महिला पर गुलदार के हमले की घटना के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया है। इस घटना को लेकर स्थानीय ग्रामीणों का आक्रोश सोमवार को खुलकर सामने आ गया।

सोमवार को बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने श्रीनगर-पौड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग को खंडाह के समीप रोककर जोरदार प्रदर्शन किया और वन विभाग के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के कारण हाईवे पर यातायात पूरी तरह बाधित हो गया और दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

जानकारी के अनुसार, ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में गुलदार के हमले लगातार बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन वन विभाग की ओर से अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है। लोगों का आरोप है कि विभाग केवल आश्वासन दे रहा है, जबकि जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।

ग्रामीणों ने बताया कि गुलदार की दहशत के कारण क्षेत्र की करीब 13 ग्राम सभाएं प्रभावित हैं। लोग शाम होते ही घरों में कैद होने को मजबूर हैं और बच्चों तथा बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या के समाधान के लिए ठोस और स्थायी कदम उठाने की जरूरत है।

सोमवार सुबह करीब साढ़े 10 बजे ग्रामीणों ने अचानक हाईवे पर धरना देकर रास्ता जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने वन विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और तत्काल कार्रवाई की मांग की। स्थिति को देखते हुए मौके पर पुलिस और प्रशासन की टीम पहुंची और लोगों को समझाने का प्रयास किया गया।

हाईवे जाम के कारण श्रीनगर और पौड़ी के बीच यातायात प्रभावित रहा और यात्रियों को घंटों तक इंतजार करना पड़ा। कई लोग आवश्यक कार्यों के लिए यात्रा कर रहे थे, जिन्हें भारी असुविधा का सामना करना पड़ा।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही गुलदार की समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उनका कहना है कि वन विभाग को क्षेत्र में गश्त बढ़ानी चाहिए और मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए।

फिलहाल प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश शुरू कर दी है और प्रदर्शनकारियों से बातचीत जारी है। हालांकि ग्रामीणों का आक्रोश अभी भी बना हुआ है।

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