उत्तराखंड

उत्तराखंड में साइबर अपराध पर कसेगा शिकंजा

Kavita2
14 July 2026 5:55 PM IST
उत्तराखंड में साइबर अपराध पर कसेगा शिकंजा
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उत्तराखंड : बढ़ते साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण लगाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। साइबर ठगी और ऑनलाइन अपराधों से निपटने के लिए स्टेट साइबर क्राइम कोआर्डिनेशन सेंटर (S4C) की स्थापना की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने S4C को जल्द अधिसूचित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इस सेंटर के संचालन से केंद्र, राज्य और जनपद स्तर की एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होगा। इससे साइबर अपराधों की जांच तेज होगी और ठगी के शिकार लोगों को समय पर राहत मिल सकेगी।

मुख्य सचिव ने सोमवार को सचिवालय में गृह विभाग और पुलिस अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में प्रदेश में बढ़ते साइबर अपराधों, पुलिस की तैयारियों और साइबर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।

साइबर अपराधों से निपटने के लिए बेहतर समन्वय पर जोर

बैठक में मुख्य सचिव ने कहा कि साइबर अपराध अब तेजी से बदल रहे हैं और अपराधी नई तकनीकों का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में पुलिस और संबंधित एजेंसियों को भी आधुनिक तकनीक और बेहतर संसाधनों से लैस करना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि S4C की स्थापना से साइबर अपराधों से जुड़ी सूचनाओं के आदान-प्रदान में तेजी आएगी। केंद्र सरकार, राज्य सरकार और जिला स्तर की एजेंसियां एक साथ मिलकर प्रभावी कार्रवाई कर सकेंगी।

साइबर पुलिस स्टेशनों को मजबूत करने के निर्देश

मुख्य सचिव ने प्रदेश के सभी साइबर पुलिस स्टेशनों की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि साइबर थानों को आवश्यक संसाधनों, आधुनिक उपकरणों और तकनीकी विशेषज्ञों से मजबूत बनाया जाए।

उन्होंने कहा कि साइबर अपराधों की जांच के लिए पुलिसकर्मियों को लगातार प्रशिक्षण देने की जरूरत है, ताकि वे नई तकनीकों और अपराध के बदलते तरीकों से निपट सकें।

पीड़ितों को जल्द मिलेगी मदद

साइबर ठगी के मामलों में समय पर कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण होती है। कई मामलों में शुरुआती कुछ घंटे काफी अहम होते हैं, क्योंकि इसी दौरान ठगी गई रकम को रोकने की संभावना ज्यादा होती है।

S4C के सक्रिय होने से साइबर अपराध की शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई हो सकेगी। इससे पीड़ितों को राहत मिलने की उम्मीद है।

ऑनलाइन ठगी के मामलों में बढ़ोतरी

देशभर की तरह उत्तराखंड में भी साइबर अपराधों के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ऑनलाइन बैंकिंग धोखाधड़ी, फर्जी कॉल, डिजिटल अरेस्ट, सोशल मीडिया के जरिए ठगी और निवेश के नाम पर धोखाधड़ी जैसे मामलों में वृद्धि हुई है।

अपराधी लोगों को झांसा देने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। ऐसे में पुलिस के सामने साइबर अपराधों की रोकथाम और जांच बड़ी चुनौती बनती जा रही है।

तकनीकी विशेषज्ञों की भूमिका होगी अहम

S4C के जरिए साइबर अपराधों की जांच में तकनीकी विशेषज्ञों की भूमिका भी बढ़ेगी। डिजिटल सबूत जुटाने, ऑनलाइन गतिविधियों की निगरानी और अपराधियों तक पहुंचने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।

अधिकारियों का मानना है कि साइबर अपराधों से लड़ने के लिए केवल पुलिस कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि तकनीकी विशेषज्ञता और विभिन्न एजेंसियों के बीच सहयोग भी जरूरी है।

जागरूकता अभियान पर भी रहेगा फोकस

सरकार साइबर अपराधों को रोकने के लिए आम लोगों में जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दे रही है। अधिकारियों का कहना है कि सतर्कता के जरिए कई साइबर ठगी के मामलों को रोका जा सकता है।

लोगों को संदिग्ध लिंक पर क्लिक नहीं करने, अपनी बैंकिंग जानकारी साझा नहीं करने और ऑनलाइन लेनदेन में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

जल्द अधिसूचना जारी होने की संभावना

मुख्य सचिव के निर्देश के बाद S4C की स्थापना की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है। संबंधित विभाग जल्द ही इसकी अधिसूचना जारी करने की दिशा में काम कर रहे हैं।

राज्य सरकार का मानना है कि S4C के गठन से साइबर अपराधों के खिलाफ लड़ाई को नई मजबूती मिलेगी और अपराधियों पर प्रभावी कार्रवाई करना आसान होगा।

उत्तराखंड में साइबर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब नजर इस बात पर है कि S4C के गठन के बाद राज्य में साइबर अपराध नियंत्रण की व्यवस्था कितनी प्रभावी साबित होती है।

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