
Uttarakhand उत्तराखंड : आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों को निश्शुल्क और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने के दावों के बीच मंगलवार को किए गए औचक निरीक्षण में निजी अस्पतालों की व्यवस्थाओं में कई गंभीर खामियां सामने आई हैं। इस निरीक्षण के बाद संबंधित अस्पतालों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है।
यह कार्रवाई निदेशक क्लेम Dr. Saroj Nathani के नेतृत्व में गठित टीम द्वारा की गई। टीम ने विभिन्न निजी अस्पतालों में जाकर व्यवस्थाओं, मरीजों को दी जा रही सुविधाओं और योजना के मानकों के पालन की विस्तृत जांच की। निरीक्षण के दौरान कई जगहों पर नियमों के उल्लंघन और आवश्यक सुविधाओं की कमी पाई गई, जिससे योजना के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े हो गए हैं।
निरीक्षण टीम में Dr. Apoorva, पंकज, पुनीत और नवीन चमोली शामिल रहे। टीम ने अस्पतालों में भर्ती मरीजों की स्थिति, उपचार प्रक्रिया, दस्तावेजों के रखरखाव और आयुष्मान कार्ड धारकों को दी जा रही सेवाओं की जांच की।
जांच के दौरान पाया गया कि कुछ अस्पतालों में रिकॉर्ड प्रबंधन ठीक नहीं था, जबकि कुछ जगहों पर मरीजों को योजना के तहत मिलने वाली सुविधाओं में अनियमितता देखी गई। इसके अलावा, कुछ अस्पतालों में स्टाफ की कमी और बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर भी खामियां सामने आईं।
अधिकारियों के अनुसार, यह निरीक्षण नियमित निगरानी का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आयुष्मान भारत योजना का लाभ वास्तविक रूप से जरूरतमंद मरीजों तक पहुंचे। सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी पात्र मरीज बेहतर और निश्शुल्क उपचार से वंचित न रहे, लेकिन इस तरह की अनियमितताओं से योजना की विश्वसनीयता पर असर पड़ सकता है।
निदेशक क्लेम ने निरीक्षण के बाद स्पष्ट किया कि जिन अस्पतालों में खामियां पाई गई हैं, उन्हें नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है। उन्होंने कहा कि यदि जवाब संतोषजनक नहीं मिला, तो संबंधित अस्पतालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें पैनल से हटाने जैसी कार्रवाई भी शामिल हो सकती है।
इस कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग में भी हलचल तेज हो गई है। विभागीय अधिकारियों ने कहा कि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा, ताकि भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं को रोका जा सके।
निरीक्षण टीम ने यह भी सुझाव दिया है कि अस्पतालों में पारदर्शिता बढ़ाने और मरीजों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम को और सख्त किया जाए। इसके साथ ही नियमित ऑडिट और अचानक जांच को बढ़ाने की भी सिफारिश की गई है।
कुल मिलाकर, इस औचक निरीक्षण ने आयुष्मान भारत योजना के क्रियान्वयन में मौजूद खामियों को उजागर किया है और यह संकेत दिया है कि योजना के प्रभावी संचालन के लिए अभी और सुधार की आवश्यकता है।





