उत्तराखंड

उत्तराखंड पंचायत चुनाव: 6384 उपप्रधान निर्विरोध निर्वाचित

Kavita2
17 July 2026 11:29 AM IST
उत्तराखंड पंचायत चुनाव: 6384 उपप्रधान निर्विरोध निर्वाचित
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देहरादून: उत्तराखंड राज्य निर्वाचन आयोग ने राज्य के सभी जनपदों में ग्राम पंचायतों के उपप्रधान पद के चुनाव शांतिपूर्ण और सफलतापूर्वक संपन्न होने की जानकारी दी है। आयोग के अनुसार, हरिद्वार जिले को छोड़कर प्रदेश की 7466 ग्राम पंचायतों में 15 जुलाई को उपप्रधान पद के लिए निर्वाचन प्रक्रिया पूरी की गई।

राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, अधिकांश ग्राम पंचायतों में उपप्रधान पद पर निर्विरोध निर्वाचन हुआ। कुल 6384 ग्राम पंचायतों में उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया, जबकि 1044 ग्राम पंचायतों में उपप्रधान पद के लिए मतदान कराया गया।

आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश की करीब 85 प्रतिशत ग्राम पंचायतों में उपप्रधान बिना मतदान के ही चुन लिए गए। वहीं, लगभग 15 प्रतिशत ग्राम पंचायतों में चुनावी प्रक्रिया अपनाते हुए मतदान के माध्यम से प्रतिनिधियों का चयन किया गया।

आयोग ने बताया कि सभी जिलों में चुनाव प्रक्रिया शांतिपूर्ण माहौल में पूरी हुई। निर्वाचन के दौरान किसी भी स्थान से बड़ी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली। सभी जिलों के अधिकारियों से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर आयोग ने चुनाव को सफल और व्यवस्थित बताया है।

राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव राहुल कुमार गोयल ने बताया कि उपप्रधान पद के चुनाव के लिए निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सभी तैयारियां पूरी की गई थीं। मतदान केंद्रों पर आवश्यक व्यवस्थाएं की गईं और सुरक्षा व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई थी। उन्होंने कहा कि सभी जनपदों से निर्वाचन प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न होने की रिपोर्ट प्राप्त हुई है।

ग्राम पंचायत स्तर पर उपप्रधान का पद स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उपप्रधान गांव के विकास कार्यों और पंचायत की कार्यप्रणाली में सहयोग करते हैं। ऐसे में पंचायत प्रतिनिधियों के चयन को ग्रामीण शासन व्यवस्था के लिए अहम माना जाता है।

निर्वाचन आयोग ने बताया कि चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए गए थे। संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं, ताकि किसी भी तरह की परेशानी के बिना चुनाव संपन्न कराया जा सके।

जिन ग्राम पंचायतों में उपप्रधान पद के लिए एक से अधिक उम्मीदवार मैदान में थे, वहां मतदान कराया गया। मतदान के बाद मतगणना की प्रक्रिया पूरी कर विजयी उम्मीदवारों की घोषणा की गई। वहीं, जहां केवल एक उम्मीदवार ने नामांकन किया या अन्य उम्मीदवारों ने नाम वापस ले लिया, वहां निर्विरोध निर्वाचन की प्रक्रिया अपनाई गई।

प्रदेश में पंचायत चुनावों को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में खासा उत्साह देखा गया। कई स्थानों पर स्थानीय लोगों ने अपने प्रतिनिधियों के चयन में सक्रिय भागीदारी निभाई। निर्विरोध निर्वाचन वाले क्षेत्रों में ग्रामीणों और पंचायत सदस्यों की सहमति से उपप्रधान चुने गए।

राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव से जुड़े सभी अधिकारियों, कर्मचारियों और सुरक्षा कर्मियों के प्रयासों की सराहना की। आयोग का कहना है कि बेहतर समन्वय और तैयारियों के कारण निर्वाचन प्रक्रिया बिना किसी बाधा के पूरी हो सकी।

हरिद्वार जिले को इस प्रक्रिया से अलग रखा गया है। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जारी जानकारी में बताया गया कि उपप्रधान पद के चुनाव राज्य के अन्य सभी जनपदों में कराए गए।

पंचायती राज व्यवस्था में ग्राम पंचायतें स्थानीय विकास और प्रशासन की सबसे महत्वपूर्ण इकाई होती हैं। उपप्रधान का चुनाव पूरा होने के बाद अब ग्रामीण स्तर पर पंचायतों के कामकाज को और गति मिलने की उम्मीद है।

निर्वाचन आयोग ने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए समय पर और शांतिपूर्ण चुनाव कराना उसकी प्राथमिकता है। इस बार हुए उपप्रधान चुनाव में बड़ी संख्या में निर्विरोध निर्वाचन होना स्थानीय स्तर पर सहमति और सामंजस्य को भी दर्शाता है।

कुल मिलाकर उत्तराखंड में ग्राम पंचायत उपप्रधान पद के चुनाव बिना किसी विवाद और बाधा के संपन्न हो गए। 7466 पंचायतों में हुए इस निर्वाचन के बाद अब चुने गए उपप्रधान अपने-अपने क्षेत्रों में पंचायत व्यवस्था को मजबूत करने और ग्रामीण विकास कार्यों में भागीदारी निभाएंगे।

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