उत्तराखंड
उत्तराखंड के राज्यपाल डॉ. बिसेन देहरादून पहुंचे, सोमवार को शपथ ग्रहण
Rajeshwari Nishad
18 Oct 2026 9:48 PM IST

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देहरादून। उत्तराखंड में सोमवार को राज्यपाल के रूप में डॉ. ढाल सिंह बिसेन विधिवत पदभार संभालेंगे। लोकभवन परिसर में सुबह 11 बजे शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा। इस दौरान उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। राज्यपाल के रूप में उनकी नियुक्ति के बाद यह समारोह राज्य की संवैधानिक व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
शपथ ग्रहण के साथ ही डॉ. ढाल सिंह बिसेन उत्तराखंड के राज्यपाल के रूप में अपनी जिम्मेदारी संभालेंगे। राज्यपाल का पद संवैधानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है। राज्य में शासन व्यवस्था के सुचारु संचालन, संवैधानिक प्रावधानों के पालन और विभिन्न प्रशासनिक प्रक्रियाओं में राज्यपाल की अहम भूमिका रहती है।
लोकभवन में सुबह 11 बजे होगा समारोह
राज्यपाल के शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन सोमवार सुबह 11 बजे लोकभवन परिसर में किया जाएगा। कार्यक्रम में उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डॉ. ढाल सिंह बिसेन को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। संवैधानिक प्रक्रिया के तहत शपथ ग्रहण के बाद वह राज्यपाल के रूप में अपना कार्यभार संभालेंगे।
शपथ ग्रहण समारोह किसी भी राज्य में संवैधानिक पद पर नियुक्त व्यक्ति के कार्यकाल की औपचारिक शुरुआत का महत्वपूर्ण अवसर होता है। इस दौरान पद की गरिमा और संवैधानिक जिम्मेदारियों के निर्वहन की शपथ ली जाती है।
राज्यपाल के रूप में डॉ. बिसेन के कार्यभार संभालने के बाद राज्य की संवैधानिक व्यवस्था के तहत उनकी जिम्मेदारियां शुरू हो जाएंगी। हालांकि, समारोह में शामिल होने वाले अन्य अतिथियों और कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा के संबंध में फिलहाल अतिरिक्त जानकारी उपलब्ध नहीं है।
राज्यपाल का पद क्यों है महत्वपूर्ण?
राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है। भारतीय संविधान के तहत राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। राज्य की कार्यपालिका से जुड़ी कई संवैधानिक प्रक्रियाएं राज्यपाल के नाम पर संचालित होती हैं। मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद की नियुक्ति, विधानसभा से पारित विधेयकों पर संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार निर्णय और राज्य में संवैधानिक व्यवस्था से जुड़े मामलों में राज्यपाल की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
राज्यपाल सामान्य परिस्थितियों में मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार कार्य करते हैं। वहीं, संविधान में निर्धारित कुछ परिस्थितियों में उन्हें विशेष संवैधानिक भूमिका निभानी पड़ सकती है। इस कारण राज्यपाल का पद राज्य की शासन व्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में प्रशासनिक समन्वय, शिक्षा, विकास और संवैधानिक संस्थाओं से जुड़े विषय सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण बने रहते हैं। ऐसे में नए राज्यपाल के कार्यभार संभालने के साथ राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारियों के निर्वहन पर भी ध्यान रहेगा।
डॉ. ढाल सिंह बिसेन के सामने होंगी संवैधानिक जिम्मेदारियां
राज्यपाल के रूप में पदभार संभालने के बाद डॉ. ढाल सिंह बिसेन को संविधान के दायरे में रहते हुए अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना होगा। राज्यपाल का कार्यालय राज्य सरकार और संवैधानिक संस्थाओं के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करता है।
राज्यपाल विधानसभा की संवैधानिक प्रक्रियाओं, विधेयकों और राज्य सरकार से जुड़े निर्धारित मामलों में अपनी भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा विश्वविद्यालयों और अन्य संस्थानों से संबंधित जिम्मेदारियां भी राज्य के कानूनों तथा लागू नियमों के अनुसार राज्यपाल के दायरे में आ सकती हैं।
हालांकि, नए राज्यपाल की ओर से पदभार संभालने के बाद प्राथमिकताओं को लेकर कोई विशेष घोषणा किए जाने की जानकारी फिलहाल उपलब्ध नहीं है। इसलिए उनकी आगामी कार्ययोजना और प्रमुख प्राथमिकताओं के बारे में आधिकारिक बयान आने के बाद ही स्पष्ट रूप से कुछ कहा जा सकेगा।
शपथ ग्रहण के साथ शुरू होगा नया कार्यकाल
सोमवार को होने वाला शपथ ग्रहण समारोह डॉ. ढाल सिंह बिसेन के उत्तराखंड के राज्यपाल के रूप में कार्यकाल की औपचारिक शुरुआत करेगा। लोकभवन परिसर में सुबह 11 बजे आयोजित होने वाले कार्यक्रम में हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे।
संवैधानिक पदों पर नियुक्तियों और पदभार ग्रहण की प्रक्रिया लोकतांत्रिक व्यवस्था का अहम हिस्सा है। इस प्रक्रिया के तहत संबंधित पदाधिकारी संविधान और कानून के अनुसार अपने दायित्व निभाने की शपथ लेते हैं।
उत्तराखंड में नए राज्यपाल के कार्यभार संभालने के साथ ही राजभवन की संवैधानिक जिम्मेदारियों का निर्वहन उनके नेतृत्व में आगे बढ़ेगा। राज्यपाल के रूप में उनकी भूमिका राज्य सरकार, विधानसभा और अन्य संवैधानिक संस्थाओं के साथ निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत जुड़ी रहेगी।
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