उत्तराखंड

Uttarakhand : सावन में जागेश्वर धाम में उमड़ी आस्था

Kavita2
15 July 2026 3:20 PM IST
Uttarakhand : सावन में जागेश्वर धाम में उमड़ी आस्था
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अल्मोड़ा : सावन का पवित्र महीना शुरू होते ही उत्तराखंड का प्रसिद्ध जागेश्वर धाम श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया है। देवदार के घने जंगलों के बीच स्थित यह प्राचीन मंदिर समूह इन दिनों शिवभक्तों से गुलजार है। देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए जागेश्वर पहुंच रहे हैं।

अल्मोड़ा जिले से करीब 36 किलोमीटर की दूरी पर स्थित जागेश्वर धाम को उत्तराखंड के सबसे बड़े और प्राचीन मंदिर परिसरों में शामिल किया जाता है। यहां लगभग 125 छोटे-बड़े मंदिर मौजूद हैं, जो अपनी प्राचीन वास्तुकला और धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध हैं। धार्मिक मान्यताओं के कारण इसे ‘उत्तराखंड का पांचवां धाम’ भी कहा जाता है।

सावन महीने में भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है। इसी वजह से जागेश्वर धाम में पूरे महीने भक्तों की भीड़ उमड़ने की संभावना रहती है। श्रद्धालु यहां पहुंचकर जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। मंदिर परिसर में सुबह से ही भगवान शिव के जयकारे सुनाई देने लगते हैं।

जागेश्वर धाम का धार्मिक इतिहास बेहद पुराना माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह क्षेत्र भगवान शिव और सप्तऋषियों की तपस्थली रहा है। स्कंद पुराण और शिव पुराण में जागेश्वर का उल्लेख ‘नागेशं दारुकावने’ के रूप में मिलता है। इसी वजह से श्रद्धालु इसे भगवान शिव के पवित्र धामों में एक महत्वपूर्ण स्थान मानते हैं।

कई धार्मिक मान्यताओं में जागेश्वर को बारह ज्योतिर्लिंगों में वर्णित नागेश या योगेश्वर ज्योतिर्लिंग से भी जोड़ा जाता है। यही कारण है कि देशभर से शिव भक्त यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। भक्तों का विश्वास है कि जागेश्वर धाम में पूजा करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

मंदिर परिसर में पूरे वर्ष विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होता रहता है। यहां रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप, कालसर्प दोष निवारण पूजा और पार्थिव पूजन जैसे धार्मिक कार्यक्रम कराए जाते हैं। सावन के दौरान इन धार्मिक अनुष्ठानों की संख्या और श्रद्धालुओं की भागीदारी दोनों बढ़ जाती हैं।

जागेश्वर धाम केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि ऐतिहासिक और स्थापत्य कला के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण है। यहां बने मंदिरों की शैली प्राचीन भारतीय वास्तुकला की झलक पेश करती है। पत्थरों से निर्मित इन मंदिरों पर की गई नक्काशी और शिल्पकला पर्यटकों को आकर्षित करती है।

देवदार के जंगलों से घिरा होने के कारण जागेश्वर का प्राकृतिक सौंदर्य भी लोगों को अपनी ओर खींचता है। धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ बड़ी संख्या में पर्यटक यहां की शांत वादियों और प्राकृतिक वातावरण का आनंद लेने पहुंचते हैं। मंदिर परिसर का आध्यात्मिक माहौल श्रद्धालुओं को विशेष अनुभव प्रदान करता है।

सावन को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यवस्थाएं की जा रही हैं। मंदिर परिसर में साफ-सफाई, सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा रहा है।

स्थानीय लोगों के लिए भी सावन का समय खास महत्व रखता है। इस दौरान धार्मिक पर्यटन बढ़ने से क्षेत्र के कारोबार को भी लाभ मिलता है। होटल, दुकान और स्थानीय व्यवसायों से जुड़े लोगों को श्रद्धालुओं की आमद से बेहतर व्यापार की उम्मीद रहती है।

जागेश्वर धाम की धार्मिक आस्था और प्राकृतिक सुंदरता इसे उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल करती है। सावन के महीने में यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के साथ-साथ इस पवित्र धाम की दिव्यता और शांति का अनुभव करते हैं।

हर साल की तरह इस बार भी सावन में जागेश्वर धाम में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ने की उम्मीद है। देवभूमि उत्तराखंड का यह प्राचीन शिवधाम एक बार फिर श्रद्धा, भक्ति और आस्था का केंद्र बना हुआ है।

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