उत्तराखंड

उत्तराखंड में मानसून पूर्व मॉक ड्रिल, CM ने आपदा प्रबंधन को बताया सर्वोच्च प्राथमिकता

Kavita2
2 July 2026 5:41 PM IST
उत्तराखंड में मानसून पूर्व मॉक ड्रिल, CM ने आपदा प्रबंधन को बताया सर्वोच्च प्राथमिकता
x

Dehradun देहरादून : आईटी पार्क में गुरुवार को आयोजित ‘राज्य स्तरीय मानसून पूर्व मॉक ड्रिल’ में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को आपदा प्रबंधन को लेकर कड़े और स्पष्ट निर्देश दिए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड जैसे भौगोलिक रूप से संवेदनशील राज्य में आपदा प्रबंधन केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री धामी ने बैठक और मॉक ड्रिल के दौरान अधिकारियों को निर्देशित किया कि मानसून के समय संभावित आपदाओं से निपटने के लिए सभी विभागों को पहले से पूरी तैयारी रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि समय पर निर्णय, विभागों के बीच बेहतर समन्वय और आधुनिक तकनीकों का उपयोग ही आपदा प्रबंधन को प्रभावी बना सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में भूस्खलन, भारी बारिश, बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं की संभावना को देखते हुए हर स्तर पर सतर्कता जरूरी है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी आपदा की स्थिति में राहत और बचाव कार्य में देरी नहीं होनी चाहिए और तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राज्य की नई आपदा प्रबंधन योजनाओं का भी शुभारंभ किया। उन्होंने उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन योजना और राज्य के सभी 13 जिलों की जिला आपदा प्रबंधन योजनाओं का औपचारिक विमोचन किया। यह योजनाएं आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत तैयार की गई हैं।

इन योजनाओं का उद्देश्य राज्य और जिला स्तर पर आपदा के समय राहत, बचाव, पुनर्वास और त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था को मजबूत करना है। इन दस्तावेजों के माध्यम से विभिन्न विभागों की भूमिका और जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में कार्यों में कोई भ्रम न रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा के समय सबसे महत्वपूर्ण बात त्वरित प्रतिक्रिया होती है। इसलिए सभी संबंधित विभागों को अपनी तैयारियों को मजबूत करना होगा और नियमित रूप से मॉक ड्रिल के माध्यम से अपनी क्षमता का परीक्षण करते रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल कागजी तैयारी पर्याप्त नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर भी पूरी व्यवस्था मजबूत होनी चाहिए।

बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि आपदा प्रबंधन प्रणाली में तकनीक का अधिक से अधिक उपयोग किया जाए। इसमें रियल टाइम मॉनिटरिंग, मौसम पूर्वानुमान प्रणाली, आपातकालीन संचार व्यवस्था और डिजिटल ट्रैकिंग जैसे साधनों को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य में हर वर्ष मानसून के दौरान कई क्षेत्रों में कठिन परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं, इसलिए सभी जिलों को अपनी-अपनी विशेष भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार योजना बनानी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि जिला स्तर पर तैयार की गई योजनाओं को नियमित रूप से अपडेट किया जाना चाहिए।

इस अवसर पर आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों ने मॉक ड्रिल के माध्यम से विभिन्न आपात स्थितियों में राहत और बचाव कार्यों की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया। इसमें यह दिखाया गया कि किस तरह विभिन्न एजेंसियां मिलकर काम करती हैं और आपदा के समय त्वरित सहायता पहुंचाई जाती है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में संचार व्यवस्था को कभी बाधित नहीं होने दिया जाए। इसके लिए वैकल्पिक संचार साधनों और आपातकालीन नेटवर्क को हमेशा सक्रिय रखने पर जोर दिया गया।

उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें स्थानीय प्रशासन, स्वयंसेवी संगठन और आम जनता की भागीदारी भी बेहद जरूरी है। लोगों को भी आपदा के समय सही जानकारी और जागरूकता दी जानी चाहिए ताकि नुकसान को कम किया जा सके।

कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों को यह भी बताया गया कि नई योजनाओं के लागू होने से राज्य में आपदा प्रबंधन व्यवस्था अधिक मजबूत और संगठित होगी। इससे न केवल राहत कार्य तेज होंगे, बल्कि पुनर्वास की प्रक्रिया भी बेहतर तरीके से पूरी की जा सकेगी।

मुख्यमंत्री धामी ने अंत में कहा कि राज्य सरकार आपदा प्रबंधन को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है और आने वाले समय में इसे और अधिक प्रभावी बनाने के लिए लगातार सुधार किए जाएंगे। उन्होंने सभी विभागों से समन्वय के साथ काम करने की अपील की ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में राज्य को कम से कम नुकसान हो।

Next Story