
देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में एक धार्मिक स्थल पर चल रहे निर्माण कार्य को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। शिमला बाईपास स्थित सेवला कलां इलाके में मंगलवार, 27 अक्टूबर को मस्जिद की तीसरी मंजिल पर चल रहे काम का बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने विरोध किया। संगठन ने निर्माण को अवैध बताते हुए सड़क और सार्वजनिक रास्ते पर अतिक्रमण करने का आरोप लगाया। कार्यकर्ताओं ने मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य रुकवा दिया और पूरे मामले की जांच कराने की मांग की। वहीं, मुस्लिम सेवा संगठन ने इन आरोपों को पूरी तरह गलत बताते हुए स्पष्ट किया कि मस्जिद में कोई नया निर्माण नहीं किया जा रहा था, बल्कि पहले से बनी छत की मरम्मत का काम चल रहा था। विवाद बढ़ने के बाद मौके पर पुलिस, मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) और नगर निगम के अधिकारियों को बुलाया गया। दोनों पक्षों ने अपने-अपने दावे पेश किए हैं।
मस्जिद की तीसरी मंजिल पर काम को लेकर शुरू हुआ विवाद
जानकारी के अनुसार, मंगलवार दोपहर शिमला बाईपास के सेवला कलां क्षेत्र में स्थित मस्जिद की तीसरी मंजिल पर निर्माण संबंधी काम चल रहा था। इसकी जानकारी मिलने पर बजरंग दल के कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए।
कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि धार्मिक स्थल के विस्तार के नाम पर अवैध निर्माण किया जा रहा है। उनका कहना था कि इस निर्माण के कारण आसपास के लोगों के आवागमन के लिए इस्तेमाल होने वाला रास्ता प्रभावित हुआ है।
बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने निर्माण कार्य का विरोध करते हुए इसे तत्काल बंद कराने की मांग की। इस दौरान मौके पर दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई और स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
इसके बाद संबंधित विभागों के अधिकारियों को सूचना दी गई, ताकि निर्माण की वैधता और जमीन से जुड़े दस्तावेजों की जांच हो सके।
बजरंग दल ने लगाया सड़क और रास्ते पर कब्जे का आरोप
बजरंग दल के प्रांत मिलन प्रमुख विकास वर्मा ने धार्मिक स्थल के निर्माण पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2017 से इस स्थान पर अवैध निर्माण कराया जा रहा है।
विकास वर्मा के अनुसार, शुरुआत में निर्माण सीमित था, लेकिन धीरे-धीरे इसका विस्तार किया गया और अब इमारत तीन मंजिल तक पहुंच गई है।
उन्होंने दावा किया कि निर्माण के कारण सार्वजनिक रास्ता बंद हो गया है और लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बजरंग दल ने मांग की कि प्रशासन धार्मिक स्थल की जमीन, निर्माण की अनुमति और स्वीकृत नक्शे की विस्तृत जांच कराए।
संगठन का कहना है कि यदि जांच में निर्माण अवैध पाया जाता है तो संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए। हालांकि, निर्माण अवैध होने या सार्वजनिक रास्ते पर कब्जा किए जाने की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
एक सप्ताह में कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
बजरंग दल ने इस मामले को लेकर प्रशासन के सामने अपनी मांगें रखी हैं। संगठन के प्रांत मिलन प्रमुख विकास वर्मा ने कहा कि धार्मिक स्थल की पूरी संपत्ति की जांच होनी चाहिए।
उन्होंने मांग की कि जमीन के स्वामित्व, भवन के निर्माण और संबंधित विभागों से ली गई अनुमतियों का सत्यापन किया जाए।
बजरंग दल ने चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर मामले में कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन बड़ा आंदोलन करेगा।
विरोध के दौरान आशीष बलूनी, रोहित मौर्य, राघव उपाध्याय और यशवंत मौर्य सहित संगठन के कई कार्यकर्ता मौजूद थे।
कार्यकर्ताओं ने अधिकारियों से मामले में निष्पक्ष जांच और नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की।
मुस्लिम सेवा संगठन ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
दूसरी ओर, मुस्लिम सेवा संगठन ने बजरंग दल के आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
संगठन के अध्यक्ष नईम कुरैशी और उपाध्यक्ष आकिब कुरैशी ने कहा कि मस्जिद में किसी तरह का नया निर्माण नहीं किया जा रहा था।
उनका कहना है कि धार्मिक स्थल पहले से बना हुआ है और उसका निर्माण संबंधित नियमों के अनुसार किया गया है।
मुस्लिम सेवा संगठन के पदाधिकारियों ने बताया कि मस्जिद के लिंटर से पानी का रिसाव हो रहा था। इसी समस्या को दूर करने के लिए छत पर ग्राउटिंग का काम कराया जा रहा था।
ग्राउटिंग एक तकनीकी प्रक्रिया है, जिसमें दरारों और खाली स्थानों को विशेष सामग्री या सीमेंट से भरकर पानी का रिसाव रोकने का प्रयास किया जाता है।
संगठन का दावा है कि इसी मरम्मत कार्य को गलत तरीके से नया निर्माण बताकर विवाद पैदा किया गया।
मस्जिद कमेटी ने अधिकारियों को दस्तावेज दिखाने का दावा किया
मुस्लिम सेवा संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि धार्मिक स्थल से संबंधित आवश्यक दस्तावेज संबंधित प्राधिकरण के सामने प्रस्तुत किए जा चुके हैं।
संगठन के अनुसार, निर्माण पूरी तरह वैध है और किसी सार्वजनिक रास्ते पर कब्जा नहीं किया गया है।
मौके पर पूर्व पार्षद एवं अधिवक्ता आफताब आलम, कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष सुलेमान अंसारी और मस्जिद कमेटी के अख्तर भी पहुंचे।
इन लोगों ने दोनों पक्षों को समझाने और विवाद शांत कराने का प्रयास किया।
मुस्लिम सेवा संगठन ने कहा कि किसी भी निर्माण की वैधता का फैसला सरकारी विभागों की जांच से होना चाहिए। केवल आरोपों के आधार पर किसी भवन को अवैध घोषित नहीं किया जा सकता।
पुलिस, एमडीडीए और नगर निगम के अधिकारी पहुंचे
विवाद बढ़ने पर मौके पर पुलिस, मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण और नगर निगम के अधिकारियों को बुलाया गया।
अधिकारियों की मौजूदगी में दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी बात रखी। बजरंग दल ने जमीन और निर्माण की जांच कराने की मांग दोहराई, जबकि मस्जिद कमेटी ने मरम्मत का काम होने की बात कही।
इस पूरे मामले में एमडीडीए की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि निर्माण की स्वीकृति, भवन के नक्शे और अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच संबंधित प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में आती है।
वहीं, सार्वजनिक रास्ते पर कब्जे के आरोपों की पुष्टि के लिए जमीन और राजस्व संबंधी अभिलेखों की जांच जरूरी हो सकती है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी में अधिकारियों द्वारा निर्माण को अवैध घोषित किए जाने या किसी ध्वस्तीकरण आदेश की पुष्टि नहीं हुई है।
नया निर्माण या मरम्मत? जांच से होगा स्पष्ट
इस विवाद में सबसे बड़ा सवाल यह है कि मस्जिद की तीसरी मंजिल पर वास्तव में नया निर्माण हो रहा था या पहले से बनी छत की मरम्मत कराई जा रही थी।
बजरंग दल का आरोप है कि धार्मिक स्थल का वर्षों से अवैध विस्तार किया जा रहा है। दूसरी ओर मुस्लिम सेवा संगठन का दावा है कि इमारत वैध है और केवल पानी के रिसाव को रोकने के लिए काम कराया जा रहा था।
दोनों पक्षों के दावों में अंतर होने के कारण प्रशासनिक जांच महत्वपूर्ण हो गई है।
निर्माण से जुड़े स्वीकृत मानचित्र, जमीन के दस्तावेज और मौके पर किए जा रहे कार्य की तकनीकी जांच से ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
धार्मिक स्थल के विवाद पर प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार
देहरादून में सामने आए इस मामले ने धार्मिक स्थलों के निर्माण और भूमि उपयोग से जुड़े नियमों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े किए हैं।
किसी भी धार्मिक या अन्य भवन का निर्माण निर्धारित कानूनी प्रावधानों के अनुसार होना आवश्यक है। साथ ही, यदि किसी भवन में मरम्मत का काम चल रहा है तो उसकी प्रकृति और आवश्यक अनुमतियों का निर्धारण भी संबंधित प्राधिकरण करता है।
ऐसे मामलों में प्रशासन के सामने कानून का पालन सुनिश्चित करने के साथ सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की जिम्मेदारी भी होती है।
फिलहाल सेवला कलां मस्जिद विवाद में दोनों पक्षों के आरोप और जवाब सामने आ चुके हैं। अब प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि निर्माण कार्य नियमों के अनुरूप था या उसमें कोई अनियमितता पाई जाती है।





