उत्तराखंड

संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन, नैनीताल से हाईकोर्ट शिफ्ट न करने की रखी मांग

Admin Delhi 1
31 Oct 2022 2:33 PM GMT
संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन, नैनीताल से हाईकोर्ट शिफ्ट न करने की रखी मांग
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नैनीताल न्यूज़: उत्तराखंड अधिवक्ता संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर नैनीताल से हाईकोर्ट शिफ्ट न करने की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया है कि नैनीताल से हाईकोर्ट शिफ्ट होने से बड़े स्तर पर पलायन बढ़ेगा, जो राज्य की मूल अवधारणा के खिलाफ है। मोर्चा के संयोजक दुर्गा सिंह मेहता व अन्य द्वारा भेजे गए ज्ञापन में कहा गया कि उत्तराखंड अपनी विशेष सांस्कृतिक, राजनैतिक, भौगोलिक विरासत, जन आंदोलनों व जनता की शहादत से बना राज्य है। राज्य का गठन पहाड़ से पलायन रोकने व विशेष रूप से पहाड़ के विकास के लिए किया गया, किन्तु अलग राज्य बनने के बाद पहाड़ के लगभग 1000 गांव निर्जन हो चुके हैं।

वहीं, उत्तराखंड के मैदानी क्षेत्र में औद्योगिकीकरण व शहरीकरण से 20 फीसदी खेती की जमीन समाप्त हो चुकी है। औद्योगिक विकास भी केवल उत्तराखंड के मैदानी क्षेत्रो में ही हुआ। उत्तराखंड बनने के बाद पहाड़ी जिलों से लगभग 32 लाख लोग पलायन कर चुके हैं। पहाड़ में न उद्योग लग सके और न ही वहां राज्यस्तरीय व केंद्रीय संस्थान खोले गये। उसके उलट कई राजकीय संस्थान पहाड़ से मैदान में शिफ्ट कर दिये गये और पहाड़ में भी जंगली जानवरों के कारण खेती की जमीनें बंजर हो चुकी हैं। यहां का इतिहास पर्यटन से अधिक न्यायिक व प्रशासनिक ज्ञापन के अनुसार, नैनीताल उत्तराखंड की न्यायिक राजधानी है। वर्ष 1815 में अंग्रेजों ने कुमाऊं व गढ़वाल को जोड़कर कुमाऊं कमिश्नरी की स्थापना की और उत्तराखंड के सभी न्यायिक व प्रशासनिक कार्य नैनीताल से ही किये जाने लगे। वर्ष 1862 से नैनीताल को तत्कालीन संयुक्त प्रांत की राजधानी भी बना दिया गया। नैनीताल का इतिहास पर्यटन से अधिक न्यायिक व प्रशासनिक है इसलिए उत्तराखंड की स्थापना के समय ही नैनीताल में उत्तराखंड की स्थायी हाईकोर्ट की स्थापना की गई। भवाली में नेशनल लॉ कालेज की स्थापना का भी प्रस्ताव था लेकिन उसका रूख भी देहरादून की ओर मोड़ दिया गया। यह रिवर्स पलायन का बड़ा उदाहरण ज्ञापन में कहा गया कि वर्तमान में नैनीताल हाईकोर्ट में करीब 800 रेगुलर अधिवक्ता हैं। इनमें राज्य के सभी जिलों से आने वाले करीब 500 अधिवक्ता स्थायी रूप से नैनीताल रह रहे हैं। नैनीताल में उत्तराखंड हाईकोर्ट होने के चलते उत्तर प्रदेश से आये अधिवक्ता एवं मैदानी जिलों देहरादून, हरिद्वार व ऊधमसिंह नगर में रहने वाले अधिवक्ता भी नैनीताल, भवाली, भीमताल, ज्योलीकोट, खुर्पाताल व नजदीकी इलाकों में स्थायी रूप से रहने लगे हैं, जो रिवर्स पलायन का सबसे बड़ा उदाहरण है।

करीब 10000 लोगों को रोजगार मोर्चा के संयोजक दुर्गा सिंह मेहता के अनुसार, नैनीताल में हाईकोर्ट होने की वजह से नैनीताल व उसके आसपास के गांवों के करीब 10 हजार लोगों को रोजगार मिला हुआ है लेकिन उत्तराखंड हाईकोर्ट की स्थापना के 22 साल बाद कुछ लोग नैनीताल से हाईकोर्ट शिफ्टिंग की बात कर रहे हैं। नैनीताल में करीब 250 अधिवक्ताओं को वर्ष 2008 में चैंबर मिल चुके हैं और करीब 250 अधिवक्ताओं के लिए चैंबर निर्माण का कार्य पूर्ण होने को है। पिछले 22 वर्षों में नैनीताल हाईकोर्ट पर जनता का हजारों करोड़ रुपये खर्च हो चुका है। ज्ञापन में कहा गया कि भविष्य के लिए हाईकोर्ट को अधिक जमीन की आवश्यकता है तो हाईकोर्ट के नजदीक मैट्रोपोल होटल की लगभग 7 एकड जमीन खाली है जिसको सरकार हाईकोर्ट को मुहैया कर सकती है। इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए नैनीताल से हाईकोर्ट को शिफ्ट न किया जाए।

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