उत्तराखंड

टस्कर हाथी का आतंक गांवों में घुसकर धान-गन्ने की फसल रौंदी

Kavita2
21 Oct 2026 12:29 PM IST
टस्कर हाथी का आतंक गांवों में घुसकर धान-गन्ने की फसल रौंदी
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नैनीताल। उत्तराखंड के बैलपड़ाव क्षेत्र में टस्कर हाथी की लगातार आवाजाही से ग्रामीणों और किसानों की परेशानी बढ़ गई है। बन्नाखेड़ा वन रेंज से सटे पत्तापानी, सेमलचौड़, रतनपुर और बिशनपुर गांवों में हाथी के उत्पात से लोग दहशत में हैं। बुधवार सुबह भी हाथी खेतों में पहुंच गया और किसानों की धान तथा गन्ने की फसलों को नुकसान पहुंचाता रहा। सूचना मिलने पर वन विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और हाथी को आबादी वाले क्षेत्र से दूर भगाने का प्रयास किया। वनकर्मियों को इस दौरान काफी मशक्कत करनी पड़ी। इससे पहले मंगलवार को ग्रामसभा रतनपुर में प्राथमिक पाठशाला के पास हाथी दिखाई देने से ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई थी। वन क्षेत्राधिकारी नवल किशोर के नेतृत्व में पहुंची टीम ने काफी प्रयासों के बाद सुबह करीब 11 बजे हाथी को गांव से बाहर खदेड़ा था।

चार गांवों में टस्कर हाथी की दहशत

बन्नाखेड़ा रेंज से सटे बैलपड़ाव क्षेत्र के कई गांवों में टस्कर हाथी की गतिविधियां ग्रामीणों के लिए चिंता का विषय बन गई हैं।

पत्तापानी, सेमलचौड़, रतनपुर और बिशनपुर में हाथी के लगातार दिखाई देने से लोग सतर्क हैं।

विशेष रूप से खेतों और आबादी वाले क्षेत्रों के आसपास हाथी की मौजूदगी से किसानों की परेशानी बढ़ गई है।

ग्रामीणों को अपनी फसलों के नुकसान के साथ जानमाल की सुरक्षा की चिंता भी सता रही है।

वन विभाग की टीम हाथी को आबादी से दूर करने का प्रयास कर रही है।

बुधवार सुबह फिर खेतों में पहुंचा हाथी

जानकारी के अनुसार, बुधवार सुबह से ही टस्कर हाथी किसानों के खेतों में घूमता रहा।

इस दौरान हाथी ने धान और गन्ने की फसलों को नुकसान पहुंचाया।

हाथी की मौजूदगी की सूचना वन विभाग को दी गई, जिसके बाद कर्मचारी मौके पर पहुंचे।

वनकर्मियों ने हाथी को खेतों और आबादी वाले क्षेत्रों से दूर भगाने का प्रयास किया।

हालांकि, बुधवार को हाथी द्वारा कितने क्षेत्र की फसल को नुकसान पहुंचाया गया, इसका आधिकारिक आकलन अभी उपलब्ध नहीं है।

धान और गन्ने की फसल को नुकसान

बैलपड़ाव क्षेत्र में हाथी के खेतों में घुसने से किसानों को आर्थिक नुकसान की आशंका बढ़ गई है।

धान और गन्ना दोनों ही महत्वपूर्ण कृषि फसलें हैं।

किसान इनकी खेती में समय, श्रम और धन लगाते हैं।

ऐसे में तैयार या बढ़ती हुई फसल को वन्यजीवों द्वारा नुकसान पहुंचाए जाने से उनकी परेशानी बढ़ जाती है।

हाथी के खेतों में आने से फसल रौंदे जाने और पौधों के टूटने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

हालांकि, इस घटना में कुल आर्थिक नुकसान का कोई आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है।

मंगलवार को स्कूल के पास पहुंच गया था हाथी

इससे पहले मंगलवार को ग्रामसभा रतनपुर में प्राथमिक पाठशाला के पास टस्कर हाथी की मौजूदगी से ग्रामीणों में दहशत फैल गई थी।

आबादी वाले क्षेत्र में हाथी के पहुंचने से लोगों की चिंता बढ़ गई।

विशेष रूप से विद्यालय के आसपास हाथी का दिखाई देना सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर स्थिति मानी जाती है।

हाथी की सूचना मिलने पर ग्रामीणों ने वन विभाग को जानकारी दी।

इसके बाद बन्नाखेड़ा वन रेंज की टीम तत्काल मौके पर पहुंची।

हालांकि, घटना के समय विद्यालय में बच्चों की उपस्थिति या पढ़ाई प्रभावित होने के संबंध में विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।

वन क्षेत्राधिकारी नवल किशोर ने संभाली कमान

मंगलवार को रतनपुर में हाथी की मौजूदगी की सूचना मिलने पर बन्नाखेड़ा के वन क्षेत्राधिकारी नवल किशोर के नेतृत्व में वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची।

टीम ने स्थिति का जायजा लिया और हाथी को गांव से बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया।

हाथी को सुरक्षित तरीके से आबादी से दूर करना वनकर्मियों के लिए चुनौतीपूर्ण कार्य होता है।

वन विभाग को इस दौरान ग्रामीणों की सुरक्षा के साथ वन्यजीव की सुरक्षा का भी ध्यान रखना पड़ता है।

काफी मशक्कत के बाद टीम को हाथी को गांव से बाहर खदेड़ने में सफलता मिली।

सुबह करीब 11 बजे गांव से बाहर खदेड़ा

मंगलवार को रतनपुर में वन विभाग की टीम ने कई प्रयासों के बाद सुबह करीब 11 बजे हाथी को गांव से बाहर खदेड़ा।

इसके बाद तत्काल खतरा कुछ हद तक कम हुआ।

हालांकि, बुधवार को फिर हाथी के खेतों में पहुंचने से स्पष्ट हुआ कि क्षेत्र में उसकी गतिविधियां जारी हैं।

लगातार दो दिनों तक हाथी की मौजूदगी से ग्रामीणों की चिंता बनी हुई है।

ऐसे में प्रभावित क्षेत्रों में सतर्कता बरतना आवश्यक है।

वन विभाग को करनी पड़ रही कड़ी मशक्कत

टस्कर हाथी को आबादी वाले क्षेत्रों से दूर भगाने के लिए वन विभाग की टीम लगातार प्रयास कर रही है।

बुधवार को भी सूचना मिलने पर वनकर्मी मौके पर पहुंचे।

हाथी को भगाने के दौरान टीम को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।

हाथी जैसे विशाल वन्यजीव को नियंत्रित करने के प्रयासों में विशेष सावधानी की आवश्यकता होती है।

किसी भी प्रकार की जल्दबाजी या गलत तरीके से उसे भगाने का प्रयास लोगों और हाथी दोनों के लिए खतरनाक हो सकता है।

इसलिए ऐसी परिस्थितियों में प्रशिक्षित वनकर्मियों के निर्देशों का पालन करना जरूरी है।

ग्रामीणों में सुरक्षा को लेकर चिंता

पत्तापानी, सेमलचौड़, रतनपुर और बिशनपुर में हाथी की गतिविधियों से ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है।

खेतों में काम करने वाले किसानों के लिए हाथी की अचानक मौजूदगी जोखिम पैदा कर सकती है।

आबादी के आसपास हाथी आने से लोगों की सामान्य दिनचर्या भी प्रभावित होने की आशंका रहती है।

विशेष रूप से सुबह और शाम के समय खेतों की ओर जाने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है।

हालांकि, उपलब्ध जानकारी में किसी ग्रामीण के घायल होने की पुष्टि नहीं हुई है।

मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती चुनौती

वन क्षेत्रों से सटे गांवों में जंगली हाथियों का पहुंचना मानव-वन्यजीव संघर्ष की एक महत्वपूर्ण चुनौती है।

हाथी भोजन और आवागमन के लिए बड़े क्षेत्रों में विचरण करते हैं।

जब उनका रास्ता कृषि भूमि या आबादी वाले क्षेत्रों से होकर गुजरता है, तो फसलों को नुकसान पहुंचने और लोगों से सामना होने की आशंका बढ़ सकती है।

धान और गन्ने जैसी फसलें भी हाथियों को आकर्षित कर सकती हैं।

हालांकि, बैलपड़ाव में हाथी के बार-बार आने के पीछे सटीक कारणों की जानकारी उपलब्ध नहीं है।

हाथी दिखने पर दूरी बनाए रखना जरूरी

वन्यजीव विशेषज्ञों की सामान्य सलाह के अनुसार, हाथी दिखाई देने पर उससे सुरक्षित दूरी बनाए रखनी चाहिए।

लोगों को हाथी के पास जाकर तस्वीरें लेने या उसे उकसाने का प्रयास नहीं करना चाहिए।

विशेष रूप से अकेले घूम रहे टस्कर हाथी के आसपास सावधानी आवश्यक होती है।

ग्रामीणों को हाथी की मौजूदगी की सूचना तत्काल वन विभाग को देनी चाहिए।

बिना प्रशिक्षण के हाथी को स्वयं भगाने की कोशिश जोखिमपूर्ण हो सकती है।

इसके अलावा बच्चों और बुजुर्गों को हाथी की मौजूदगी वाले स्थानों से दूर रखना भी महत्वपूर्ण है।

किसानों के नुकसान का आकलन महत्वपूर्ण

हाथी के उत्पात से धान और गन्ने की फसलों को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है।

ऐसी परिस्थितियों में प्रभावित खेतों का आकलन किसानों के लिए महत्वपूर्ण होता है।

वन्यजीवों से फसल क्षति के मामलों में संबंधित राज्य के नियमों और पात्रता शर्तों के अनुसार राहत या मुआवजे का प्रावधान हो सकता है।

हालांकि, बैलपड़ाव की इस घटना में वन विभाग द्वारा किसी मुआवजे की घोषणा किए जाने की जानकारी उपलब्ध नहीं है।

फिलहाल नुकसान की वास्तविक मात्रा का पता लगना बाकी है।

लगातार निगरानी की आवश्यकता

बन्नाखेड़ा रेंज से सटे गांवों में हाथी की लगातार मौजूदगी को देखते हुए सतर्कता महत्वपूर्ण है।

मंगलवार को रतनपुर से हाथी को बाहर खदेड़े जाने के बावजूद बुधवार को खेतों में उसकी गतिविधियां सामने आईं।

इससे प्रभावित गांवों में निगरानी और समय पर सूचना देने की आवश्यकता स्पष्ट होती है।

वन विभाग और स्थानीय लोगों के बीच समन्वय से संभावित जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है।

हाथी के उत्पात से किसान परेशान

बैलपड़ाव क्षेत्र के पत्तापानी, सेमलचौड़, रतनपुर और बिशनपुर में टस्कर हाथी की आवाजाही से ग्रामीणों में दहशत बनी हुई है।

बुधवार को हाथी ने धान और गन्ने की फसलों को नुकसान पहुंचाया, जबकि मंगलवार को वह रतनपुर में प्राथमिक पाठशाला के पास पहुंच गया था।

वन क्षेत्राधिकारी नवल किशोर के नेतृत्व में टीम ने मंगलवार सुबह करीब 11 बजे हाथी को गांव से बाहर खदेड़ा था। इसके बावजूद क्षेत्र में हाथी की गतिविधियां जारी रहने से किसानों और ग्रामीणों की चिंता कम नहीं हुई है।

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