उत्तराखंड

पहाड़ का सीना चीर निकली रेल सुरंग तिरंगा लेकर मनाया जश्न

nidhi
12 Sept 2026 8:36 AM IST
पहाड़ का सीना चीर निकली रेल सुरंग तिरंगा लेकर मनाया जश्न
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रेल परियोजना ने रचा इतिहास निकास सुरंग के दोनों छोर मिले

ऋषिकेश: उत्तराखंड की महत्वाकांक्षी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना ने एक और महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर लिया है। परियोजना की एक निकास सुरंग में ब्रेकथ्रू हासिल होने के बाद निर्माण कार्य में जुटे इंजीनियरों और श्रमिकों ने तिरंगा लेकर खुशी मनाई। पहाड़ के दोनों सिरों से की जा रही खुदाई के आपस में मिलने के बाद सुरंग आर-पार हो गई। इस उपलब्धि को हिमालयी क्षेत्र में चल रहे चुनौतीपूर्ण रेलवे निर्माण कार्य की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना भारतीय रेलवे की सबसे चुनौतीपूर्ण परियोजनाओं में शामिल है। करीब 125 किलोमीटर लंबे इस रेल मार्ग का बड़ा हिस्सा पहाड़ों के भीतर सुरंगों से होकर गुजरेगा। परियोजना पूरी होने के बाद ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक रेल संपर्क स्थापित होगा और उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों की कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है।

सुरंग आर-पार होते ही गूंजे खुशी के नारे
निकास सुरंग की खुदाई पूरी होने के साथ ही निर्माण स्थल पर उत्साह का माहौल बन गया। सुरंग के दोनों छोर जुड़ते ही परियोजना से जुड़े अधिकारियों, इंजीनियरों और श्रमिकों ने तिरंगा लेकर सफलता का जश्न मनाया। लंबे समय से कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच काम कर रही टीम के लिए यह उपलब्धि बेहद खास रही। हिमालयी क्षेत्र की जटिल भूगर्भीय परिस्थितियों में सुरंग निर्माण आसान नहीं है। खुदाई के दौरान कमजोर चट्टानों, पानी के रिसाव और भूगर्भीय दबाव जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में प्रत्येक सुरंग का सफल ब्रेकथ्रू परियोजना को लक्ष्य की ओर एक कदम और आगे ले जाता है।
पहाड़ों के भीतर से गुजरेगा अधिकांश रेल मार्ग
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन में बड़ी संख्या में सुरंगों और पुलों का निर्माण किया जा रहा है। रेल विकास निगम लिमिटेड यानी RVNL इस परियोजना को क्रियान्वित कर रहा है। रेलवे के अनुसार परियोजना में मुख्य सुरंगों के साथ निकास और बचाव सुरंगों का नेटवर्क भी तैयार किया जा रहा है। निकास सुरंगों का निर्माण सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। मुख्य रेल सुरंग में किसी आपात स्थिति के दौरान ये वैकल्पिक सुरक्षित रास्ता उपलब्ध करा सकती हैं। निर्माण कार्य के दौरान भी इनका उपयोग पहुंच और लॉजिस्टिक जरूरतों के लिए किया जाता है।
चारधाम यात्रा को मिलेगा फायदा
परियोजना पूरी होने के बाद उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है। यह रेल लाइन देवप्रयाग, श्रीनगर, रुद्रप्रयाग और कर्णप्रयाग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को रेल नेटवर्क के करीब लाएगी। इससे स्थानीय लोगों के साथ चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। सड़क मार्ग पर निर्भरता कम होने से यात्रा के समय में भी बड़ी कमी आ सकती है। इसके अलावा रेल संपर्क बेहतर होने से पर्यटन, व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की संभावना है।
सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण परियोजना
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन केवल यात्री सुविधा और पर्यटन के लिहाज से ही नहीं बल्कि सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। उत्तराखंड की सीमावर्ती क्षेत्रों से निकटता के कारण बेहतर रेल कनेक्टिविटी भविष्य में रणनीतिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत कर सकती है। निकास सुरंग का सफल ब्रेकथ्रू परियोजना में काम कर रहे हजारों कर्मचारियों और इंजीनियरों के लिए बड़ी उपलब्धि है। चुनौतीपूर्ण हिमालयी भूभाग में एक के बाद एक सुरंगों के आर-पार होने के साथ ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक ट्रेन पहुंचाने का सपना धीरे-धीरे वास्तविकता के और करीब पहुंच रहा है।
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