
ऋषिकेश। उत्तराखंड के ऋषिकेश में भारी बारिश के बीच एक दर्दनाक हादसा सामने आया है, जहां एक मां ने अपने बच्चों की जान बचाने के लिए खुद की जिंदगी कुर्बान कर दी। खादरी ग्राम सभा क्षेत्र में पानी से भरे इलाके में बिजली का तार टूटने से फैले करंट की चपेट में आने से 32 वर्षीय महिला सुमन जेठुडी की मौत हो गई। हादसे के समय महिला अपनी दो साल की बेटी को गोद में लेकर जा रही थी।
घटना रविवार शाम की बताई जा रही है। भारी बारिश के कारण इलाके में जलभराव हो गया था। इसी दौरान बिजली का तार टूटकर पानी में गिर गया, जिससे पूरे क्षेत्र में करंट फैल गया। अनजाने में महिला उस पानी के संपर्क में आ गई और हादसे का शिकार हो गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुमन जेठुडी अपने बच्चों के साथ वहां मौजूद थीं। जैसे ही उन्हें खतरे का अहसास हुआ, उन्होंने सबसे पहले अपने 12 साल के बेटे को दूर रहने का इशारा किया। मां की सतर्कता के कारण बेटा करंट की चपेट में आने से बच गया। हालांकि, अपनी दो साल की बेटी को बचाने की कोशिश में सुमन खुद करंट की चपेट में आ गईं और उनकी जान चली गई।
घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत इसकी सूचना संबंधित विभाग और पुलिस को दी। मौके पर पहुंचे लोगों ने महिला को बचाने की कोशिश की, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। इस हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है।
सुमन के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पति हरपाल सिंह जेठुडी ने घटना को लेकर उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPCL) के अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में उन्होंने UPCL के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (EE) शक्ति प्रसाद, सब-डिविजनल इंजीनियर (SDE) शशिकांत सिंह और जूनियर इंजीनियर (JE) शंभू प्रसाद बहुगुणा के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
अधिकारियों ने बताया कि घटना को गंभीरता से लेते हुए UPCL ने कार्रवाई शुरू कर दी है। सोमवार को जूनियर इंजीनियर शंभू प्रसाद बहुगुणा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। विभाग की ओर से मामले की जांच की जा रही है और हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है।
पुलिस ने भी इस मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, घटना को लेकर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106 के तहत मामला दर्ज किया गया है। यह धारा लापरवाही से किसी व्यक्ति की मौत से जुड़े मामलों में लगाई जाती है। पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है और हादसे के लिए जिम्मेदार परिस्थितियों की पड़ताल की जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के मौसम में बिजली के खुले तार और जलभराव बड़ा खतरा बन जाते हैं। उनका आरोप है कि समय रहते सुरक्षा उपाय किए जाते तो इस तरह की घटना को टाला जा सकता था। लोगों ने बिजली विभाग से बारिश के दौरान विशेष सतर्कता बरतने और जर्जर तारों की जांच कराने की मांग की है।
इस घटना ने एक बार फिर बारिश के मौसम में बिजली सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। जलभराव वाले क्षेत्रों में बिजली के तार टूटने या खंभों में खराबी आने से हादसों का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे इलाकों में बिजली आपूर्ति की नियमित जांच और आपातकालीन व्यवस्था जरूरी है।
सुमन जेठुडी की मौत ने पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल पैदा कर दिया है। लोगों का कहना है कि उन्होंने मां होने का फर्ज निभाते हुए अपने बेटे की जान बचाई और अपनी जिंदगी गंवा दी। परिवार और स्थानीय लोग अब दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
फिलहाल पुलिस जांच जारी है और विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई की जा रही है। आने वाले दिनों में जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। इस हादसे ने बारिश के मौसम में बिजली सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।





