
उत्तराखंड : यूपीआई (UPI) लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क लगाने के फैसले को लेकर देशभर के व्यापारियों में नाराजगी बढ़ गई है। व्यापारी संगठनों का कहना है कि यदि डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लागू किया जाता है तो इसका सीधा असर छोटे और मध्यम कारोबारियों के साथ-साथ ग्राहकों पर भी पड़ेगा। व्यापारियों ने सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग की है।
देहरादून उद्योग व्यापार मंडल समेत कई प्रमुख व्यापारी संगठनों ने इस मुद्दे पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि यूपीआई ने देश में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने में बड़ी भूमिका निभाई है। ऐसे समय में शुल्क लगाने से डिजिटल लेन-देन को नुकसान पहुंच सकता है। व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यदि यह फैसला लागू किया गया तो वे आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेंगे।
व्यापारियों ने जताई नाराजगी
व्यापारी संगठनों का कहना है कि वर्तमान समय में बड़ी संख्या में ग्राहक यूपीआई के माध्यम से भुगतान करते हैं। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों तक डिजिटल भुगतान एक सामान्य प्रक्रिया बन चुका है।
व्यापारियों का तर्क है कि यदि हर डिजिटल भुगतान पर शुल्क देना पड़ेगा तो इससे उनके खर्च बढ़ेंगे। खासकर छोटे व्यापारियों के लिए अतिरिक्त शुल्क आर्थिक दबाव बढ़ा सकता है। उनका कहना है कि अंत में इसका असर ग्राहकों पर भी पड़ सकता है।
डिजिटल इंडिया अभियान पर उठाए सवाल
व्यापारी नेताओं ने कहा कि सरकार लगातार डिजिटल इंडिया अभियान को बढ़ावा दे रही है और लोगों को कैशलेस भुगतान के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। ऐसे में यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगाने का फैसला डिजिटल भुगतान व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
उनका कहना है कि यूपीआई की सबसे बड़ी ताकत इसकी सरलता और बिना अतिरिक्त खर्च के इस्तेमाल की सुविधा रही है। यदि इसमें शुल्क जुड़ता है तो कई छोटे व्यापारी और ग्राहक दोबारा नकद लेन-देन की ओर जा सकते हैं।
देहरादून व्यापार मंडल ने दी आंदोलन की चेतावनी
देहरादून उद्योग व्यापार मंडल ने इस मामले में सरकार से फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है। व्यापारियों का कहना है कि यूपीआई के माध्यम से होने वाले लेन-देन ने बाजार व्यवस्था को आसान बनाया है।
व्यापारी संगठनों ने कहा कि शुल्क लागू होने की स्थिति में वे अपने स्तर पर विरोध दर्ज कराएंगे। उन्होंने सरकार से व्यापारियों और आम लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेने की अपील की है।
कांग्रेस ने साधा निशाना
वहीं, इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस ने तंज कसते हुए कहा कि यूपीआई पर शुल्क लगाने का फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर जनता के लिए "तोहफा" जैसा है।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि इस तरह के फैसलों से आम लोगों और व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा। पार्टी ने सरकार से इस निर्णय को वापस लेने की मांग की है।
यूपीआई भुगतान का बढ़ता इस्तेमाल
भारत में पिछले कुछ वर्षों में यूपीआई के जरिए डिजिटल भुगतान में तेजी से वृद्धि हुई है। छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों से लेकर बड़े कारोबारी संस्थानों तक यूपीआई भुगतान का इस्तेमाल किया जा रहा है।
व्यापारियों का कहना है कि यूपीआई ने लेन-देन को आसान और तेज बनाया है। ग्राहक भी बिना नकदी रखे आसानी से भुगतान कर पा रहे हैं। ऐसे में शुल्क व्यवस्था लागू होने से इसकी लोकप्रियता प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
सरकार के फैसले पर नजर
यूपीआई लेन-देन पर MDR शुल्क को लेकर व्यापारियों और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया के बाद अब सरकार के अगले कदम पर नजर है। व्यापारी संगठनों ने साफ कहा है कि वे इस मामले में अपनी मांगों को लेकर आगे भी आवाज उठाएंगे।
फिलहाल यह मुद्दा डिजिटल भुगतान व्यवस्था, व्यापारिक लागत और ग्राहकों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर चर्चा में बना हुआ है। आने वाले दिनों में इस पर सरकार और व्यापारी संगठनों के बीच बातचीत की संभावना भी जताई जा रही है।





