उत्तराखंड

पहली ही बारिश में टूटा कोसी नदी का डायवर्जन बंधा, चुकुम गांव पर मंडराया कटाव का खतरा

Kavita2
11 July 2026 1:51 PM IST
पहली ही बारिश में टूटा कोसी नदी का डायवर्जन बंधा, चुकुम गांव पर मंडराया कटाव का खतरा
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रामनगर : उत्तराखंड के रामनगर क्षेत्र स्थित चुकुम गांव में मानसून की पहली ही तेज बारिश ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। कोसी नदी के बढ़ते जलस्तर और तेज बहाव के कारण गांव की सुरक्षा के लिए बनाया गया अस्थायी डायवर्जन बंधा टूट गया है। बंधा टूटने के बाद नदी का रुख एक बार फिर गांव की ओर हो गया है, जिससे ग्रामीणों में भय और असुरक्षा का माहौल है। लोगों को आशंका है कि यदि जल्द स्थायी सुरक्षा उपाय नहीं किए गए तो इस बार भी कई घर, खेती की जमीन और ग्रामीणों की आजीविका नदी की भेंट चढ़ सकती है।

रामनगर से लगभग 22 किलोमीटर दूर स्थित चुकुम गांव वर्षों से कोसी नदी के कटाव की मार झेलता आ रहा है। हर मानसून में नदी का तेज बहाव गांव के लिए नई मुसीबत लेकर आता है। कभी नदी ग्रामीणों के मकानों को नुकसान पहुंचाती है तो कभी उपजाऊ कृषि भूमि को अपने साथ बहा ले जाती है। इस बार भी पहली बारिश के साथ हालात चिंताजनक हो गए हैं।

गांव की सुरक्षा के लिए बनाया गया था अस्थायी बंधा

ग्रामीणों की लगातार मांग और पिछले वर्षों में हुए नुकसान को देखते हुए सिंचाई विभाग ने बीते वर्ष गांव के शेष हिस्से को बचाने के लिए लगभग 450 मीटर लंबा अस्थायी अवरोधक डायवर्जन बंधा तैयार कराया था। इसका उद्देश्य कोसी नदी की धारा को गांव से दूर मोड़ना और कटाव को रोकना था।

हालांकि, मानसून की पहली ही बारिश में यह अस्थायी संरचना नदी के तेज बहाव का दबाव नहीं झेल सकी और कई स्थानों से क्षतिग्रस्त होकर टूट गई। बंधा टूटते ही नदी का पानी फिर गांव की दिशा में बहने लगा, जिससे खतरा और बढ़ गया है।

ग्रामीणों में दहशत का माहौल

डायवर्जन बंधा टूटने की सूचना मिलते ही ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। लोगों ने देखा कि नदी तेजी से गांव की ओर बढ़ रही है। इसके बाद पूरे गांव में दहशत फैल गई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि लगातार बारिश होती रही तो नदी का कटाव और तेज हो जाएगा, जिससे कई मकानों पर संकट आ सकता है।

ग्रामीणों ने बताया कि हर वर्ष बारिश के मौसम में उन्हें रात-रात भर जागकर नदी के बढ़ते जलस्तर पर नजर रखनी पड़ती है। कई परिवार पहले भी अपने घर और खेत खो चुके हैं, इसलिए इस बार भी उन्हें बड़े नुकसान की आशंका सता रही है।

खेती पर भी मंडरा रहा संकट

चुकुम गांव के अधिकांश परिवार कृषि पर निर्भर हैं। कोसी नदी के किनारे स्थित उपजाऊ भूमि में धान, मक्का और अन्य फसलें उगाई जाती हैं। लेकिन नदी के लगातार कटाव के कारण हर साल बड़ी मात्रा में कृषि भूमि बह जाती है।

बंधा टूटने के बाद किसानों को डर है कि यदि नदी का बहाव इसी दिशा में बना रहा तो इस बार भी उनकी तैयार फसलें और खेत प्रभावित हो सकते हैं। इससे आर्थिक नुकसान के साथ-साथ आजीविका पर भी गंभीर असर पड़ेगा।

प्रशासन और सिंचाई विभाग से कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन और सिंचाई विभाग से तत्काल मौके का निरीक्षण कर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है। उनका कहना है कि अस्थायी बंधों से हर साल समस्या का केवल अस्थायी समाधान होता है, जबकि जरूरत स्थायी तटबंध और मजबूत सुरक्षा संरचना की है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते मरम्मत और बचाव कार्य शुरू नहीं किए गए तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

विशेषज्ञों की राय

जल संसाधन विशेषज्ञों का मानना है कि पर्वतीय नदियों का बहाव मानसून के दौरान अचानक बढ़ जाता है। ऐसे में अस्थायी संरचनाएं लंबे समय तक दबाव नहीं झेल पातीं। इसलिए नदी के संवेदनशील क्षेत्रों में वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर स्थायी तटबंध और कटाव रोधी उपाय किए जाने चाहिए।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि नदी की धारा को नियंत्रित नहीं किया गया तो हर वर्ष होने वाला कटाव गांव के अस्तित्व के लिए चुनौती बन सकता है।

राहत और निगरानी की तैयारी

सूचना मिलने के बाद स्थानीय प्रशासन ने क्षेत्र की स्थिति पर नजर रखना शुरू कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि सिंचाई विभाग की टीम को मौके पर भेजा जाएगा और नुकसान का आकलन किया जाएगा। साथ ही, यदि आवश्यकता पड़ी तो आपदा प्रबंधन की टीम भी तैनात की जाएगी।

प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे नदी के किनारे जाने से बचें और किसी भी आपात स्थिति की जानकारी तुरंत संबंधित अधिकारियों को दें।

स्थायी समाधान की मांग तेज

चुकुम गांव के लोगों का कहना है कि हर साल मानसून के दौरान उन्हें इसी तरह की परेशानी का सामना करना पड़ता है। अस्थायी बंधे बनते हैं, लेकिन पहली या दूसरी बारिश में टूट जाते हैं। ऐसे में सरकारी धन भी व्यर्थ होता है और ग्रामीणों की परेशानी भी खत्म नहीं होती।

ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि कोसी नदी के किनारे स्थायी तटबंध, मजबूत कटाव रोधी दीवार और दीर्घकालिक सुरक्षा योजना तैयार की जाए, ताकि हर साल आने वाले मानसून में उन्हें भय और अनिश्चितता के बीच जीवन न बिताना पड़े। फिलहाल, चुकुम गांव के लोग आसमान में मंडराते बादलों और कोसी नदी के बढ़ते जलस्तर पर चिंतित निगाहें लगाए हुए हैं।

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