उत्तराखंड

एमपीजी कॉलेज, मसूरी में शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था सुदृढ़ करने की दिशा में सरकार ने उठाया कदम

Shantanu Roy
13 Aug 2026 7:21 PM IST
एमपीजी कॉलेज, मसूरी में शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था सुदृढ़ करने की दिशा में सरकार ने उठाया कदम
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Uttarakhand. उत्तराखण्ड। उत्तराखण्ड सरकार ने एमपीजी कॉलेज, मसूरी में लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक एवं प्रबंधन संबंधी समस्याओं के समाधान तथा छात्रों के हितों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण पहल की है। उच्च शिक्षा विभाग ने इस संबंध में सार्वजनिक नोटिस जारी करते हुए उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 1973 के प्रावधानों के तहत महाविद्यालय में प्राधिकृत नियंत्रक (Authorized Controller) की नियुक्ति की प्रक्रिया प्रारम्भ कर दी है।
एमपीजी कॉलेज, मसूरी की स्थापना वर्ष 1963 में हुई थी तथा इसका संचालन प्रबंधन समिति के माध्यम से किया जाता रहा है। महाविद्यालय हेमवती नन्दन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर से संबद्ध है। विश्वविद्यालय द्वारा पूर्व में प्रबंधन समिति को सीमित अवधि के लिए अनुमोदन प्रदान किया गया था, किंतु नगर निकाय चुनावों के उपरांत वर्तमान में नई प्रबंधन समिति के अनुमोदन की प्रक्रिया लंबित है। उच्च शिक्षा विभाग के अनुसार, विश्वविद्यालय ने अपने पत्रों के माध्यम से अवगत कराया है कि नई प्रबंधन समिति के अनुमोदन का विषय विचाराधीन है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि अनुमोदन के अभाव में महाविद्यालय के संचालन के लिए अधिनियम के अंतर्गत कोई वैधानिक व्यवस्था उपलब्ध नहीं है।
सरकार के संज्ञान में यह भी आया है कि प्रबंधन संबंधी अनिश्चितता के कारण महाविद्यालय में शिक्षकों एवं कर्मचारियों के वेतन भुगतान, नई नियुक्तियों, पदोन्नतियों तथा अन्य सेवा संबंधी मामलों का निस्तारण प्रभावित हो रहा है। इससे शैक्षणिक गतिविधियां भी प्रभावित हुई हैं तथा छात्र संख्या में गिरावट और वित्तीय अनियमितताओं की आशंका जैसी परिस्थितियां उत्पन्न हो रही हैं। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 1973 की धारा 57 व 58 के अंतर्गत महाविद्यालय में प्राधिकृत नियंत्रक की नियुक्ति किए जाने का निर्णय लिया है, जिससे महाविद्यालय का शैक्षणिक, प्रशासनिक एवं वित्तीय कार्य सुचारु रूप से संचालित हो सके तथा छात्रों और कर्मचारियों के हित सुरक्षित रह सकें।
उच्च शिक्षा विभाग ने इस संबंध में सार्वजनिक सूचना जारी करते हुए कहा है कि यदि किसी व्यक्ति अथवा संस्था को प्रस्तावित कार्रवाई पर कोई आपत्ति हो तो वह निर्धारित तिथि से एक सप्ताह के भीतर अपना पक्ष लिखित रूप में सचिव, उच्च शिक्षा विभाग, उत्तराखण्ड शासन को डाक/ई-मेल [email protected] अथवा व्यक्तिगत रूप से प्रस्तुत कर सकता है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस पहल का उद्देश्य महाविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता, प्रशासनिक पारदर्शिता तथा वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करते हुए विद्यार्थियों के हितों की रक्षा करना और संस्थान में सामान्य शैक्षणिक वातावरण को पुनः स्थापित करना है।
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