उत्तराखंड

बैंक खाते बेचने वालों के घर STF की छापेमारी

Kavita2
4 Sept 2026 9:17 AM IST
बैंक खाते बेचने वालों के घर STF की छापेमारी
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देहरादून। उत्तराखंड में साइबर अपराधियों के नेटवर्क पर शिकंजा कसने के लिए पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने बड़ी कार्रवाई की है। साइबर ठगों को बैंक खाते बेचने या किराये पर देने वाले लोगों के खिलाफ गुरुवार को राज्यभर में एक साथ छापेमारी की गई। देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर जिलों के 10 अलग-अलग स्थानों पर STF और पुलिस की संयुक्त टीमों ने कार्रवाई की।

छापेमारी के दौरान पुलिस को साइबर ठगी में इस्तेमाल किए जा रहे कई बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज मिले हैं। इनमें बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड, मोबाइल सिम और अन्य महत्वपूर्ण कागजात शामिल हैं। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इन खातों का इस्तेमाल ऑनलाइन ठगी, अवैध लेनदेन और साइबर अपराधों से जुड़े पैसों के ट्रांसफर के लिए किया जा रहा था।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, साइबर ठगी के मामलों में अक्सर अपराधी सीधे अपने नाम से बैंक खातों का इस्तेमाल नहीं करते हैं। वे दूसरे लोगों को लालच देकर उनके बैंक खाते खरीद लेते हैं या किराये पर ले लेते हैं। इन खातों के जरिए ठगी की रकम को इधर-उधर भेजा जाता है, जिससे अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।

इसी तरह के नेटवर्क को तोड़ने के लिए STF ने यह अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान स्थानीय पुलिस के साथ बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों को तैनात किया गया। करीब 2500 पीएसी जवानों को भी सुरक्षा व्यवस्था में लगाया गया, ताकि किसी भी तरह की स्थिति से निपटा जा सके।

साइबर अपराधियों के मददगारों पर शिकंजा

STF अधिकारियों का कहना है कि साइबर ठगी में केवल ठग ही नहीं बल्कि उनके सहयोगी भी शामिल होते हैं। बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले लोग भी इस अपराध की कड़ी का हिस्सा बन जाते हैं। कई मामलों में लोग थोड़े पैसों के लालच में अपने बैंक खाते और दस्तावेज दूसरे लोगों को दे देते हैं, जिसका इस्तेमाल बड़े साइबर अपराधों में किया जाता है।

पुलिस अब बरामद दस्तावेजों की जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि इन खातों से कितने साइबर अपराध जुड़े हुए हैं और इनके जरिए कितनी रकम का लेनदेन हुआ है।

मोबाइल सिम और दस्तावेजों की जांच

छापेमारी में मिले मोबाइल सिम और अन्य दस्तावेज भी जांच के दायरे में हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन सिम कार्ड का इस्तेमाल किन गतिविधियों में किया गया। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि बैंक खाते और मोबाइल नंबर उपलब्ध कराने वाले लोग सीधे साइबर गिरोहों के संपर्क में थे या किसी अन्य माध्यम से जुड़े हुए थे।

जांच एजेंसियां बैंक खातों की ट्रांजेक्शन हिस्ट्री भी खंगालेंगी। इससे साइबर ठगी की रकम के स्रोत और उसके आगे के ट्रांसफर की जानकारी जुटाई जाएगी।

लगातार बढ़ रहे साइबर ठगी के मामले

देशभर में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। ठग नए-नए तरीकों से लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। फर्जी निवेश योजनाएं, ऑनलाइन खरीदारी, डिजिटल अरेस्ट, केवाईसी अपडेट और बैंकिंग फ्रॉड जैसे मामलों में साइबर अपराधी पैसों की हेराफेरी के लिए अलग-अलग बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं।

पुलिस का कहना है कि ऐसे खातों की उपलब्धता साइबर अपराधियों के लिए सबसे बड़ी मदद साबित होती है। इसलिए अब उन लोगों पर भी कार्रवाई की जा रही है, जो जानबूझकर या लालच में अपने खाते अपराधियों को उपलब्ध कराते हैं।

आगे भी जारी रहेगा अभियान

उत्तराखंड पुलिस और STF ने संकेत दिए हैं कि साइबर अपराधों के खिलाफ यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। अधिकारियों का कहना है कि साइबर ठगी के नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने के लिए अपराधियों के साथ-साथ उनके सहयोगियों पर भी कार्रवाई जरूरी है।

फिलहाल छापेमारी में मिले दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद कई और लोगों की गिरफ्तारी की संभावना जताई जा रही है।

STF की इस कार्रवाई से साइबर अपराधियों और उनके नेटवर्क से जुड़े लोगों में हड़कंप मचा हुआ है। पुलिस का कहना है कि आम लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है और किसी भी व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, ओटीपी या मोबाइल सिम किसी अन्य व्यक्ति को नहीं देना चाहिए।

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