उत्तराखंड

उत्तराखंड में SIR तेज, 19 लाख वोटरों को नोटिस

Kavita2
31 July 2026 9:50 AM IST
उत्तराखंड में SIR तेज, 19 लाख वोटरों को नोटिस
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देहरादून। उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर निर्वाचन विभाग ने तैयारी तेज कर दी है। एसआईआर के तहत अनंतिम मतदाता सूची में दर्ज नामों, आयु और अन्य विवरणों में सामने आई आपत्तियों का निपटारा अब बूथ स्तर पर ही किया जाएगा। निर्वाचन विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई मतदाता बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) के निर्णय से संतुष्ट नहीं होता है तो वह आगे अपील कर सकता है।

अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय जोगदंडे ने एसआईआर की अब तक की प्रगति रिपोर्ट जारी करते हुए बताया कि राज्य में मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में विवरण संबंधी विसंगतियां सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान करीब 19 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम, आयु और अन्य जानकारियों में अंतर पाया गया है। इन सभी मामलों में संबंधित मतदाताओं को नोटिस जारी किए जा रहे हैं।

निर्वाचन विभाग के अनुसार, एसआईआर का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और त्रुटिरहित बनाना है। इस प्रक्रिया के तहत मतदाताओं के नाम, पते, उम्र और अन्य आवश्यक विवरणों का सत्यापन किया जा रहा है। जिन मतदाताओं के विवरण में किसी प्रकार की असमानता या कमी पाई गई है, उनसे आवश्यक दस्तावेज और स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है।

डॉ. विजय जोगदंडे ने बताया कि जिन मतदाताओं को नोटिस जारी किया जा रहा है, उन्हें अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर दिउत्तराखंड में एसआईआर प्रक्रिया तेज, 19 लाख से ज्यादा वोटरों के विवरण में मिली विसंगतियां; बूथ स्तर पर होगी सुनवाई

या जाएगा। मतदाता संबंधित बूथ स्तर के अधिकारी के समक्ष अपने दस्तावेज प्रस्तुत कर सकते हैं। जांच के बाद बीएलओ स्तर पर ही प्राथमिक निर्णय लिया जाएगा और पात्र मतदाताओं के विवरण को सही किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति बीएलओ के फैसले से संतुष्ट नहीं होता है तो उसके पास अपील का विकल्प उपलब्ध रहेगा। ऐसे मामलों में मतदाता सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (एईआरओ), जिला निर्वाचन अधिकारी (डीएम) और मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय तक अपनी आपत्ति या अपील दर्ज करा सकता है। निर्वाचन विभाग ने यह व्यवस्था इसलिए बनाई है ताकि किसी भी पात्र मतदाता का नाम बिना उचित प्रक्रिया के प्रभावित न हो।

अधिकारियों के अनुसार, एसआईआर प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सभी स्तरों पर अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे मतदाताओं की आपत्तियों को गंभीरता से सुनें और नियमों के अनुसार उनका समाधान करें। किसी भी मतदाता को अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा।

मतदाता सूची में विसंगतियों का यह आंकड़ा सामने आने के बाद निर्वाचन विभाग ने निगरानी भी बढ़ा दी है। अधिकारियों का कहना है कि बड़ी संख्या में विवरण में अंतर मिलने का मतलब यह नहीं है कि सभी नाम गलत हैं। कई मामलों में केवल दस्तावेजों, नाम की वर्तनी, आयु या अन्य विवरणों में मामूली अंतर हो सकता है, जिन्हें सत्यापन के बाद ठीक किया जाएगा।

निर्वाचन विभाग ने मतदाताओं से अपील की है कि वे नोटिस मिलने पर समय पर जवाब दें और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराएं। विभाग का कहना है कि समय पर प्रक्रिया पूरी करने से मतदाता सूची को अंतिम रूप देने में आसानी होगी और किसी भी तरह की परेशानी से बचा जा सकेगा।

एसआईआर प्रक्रिया के तहत बूथ लेवल अधिकारियों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बीएलओ सीधे मतदाताओं से संपर्क कर रहे हैं और दस्तावेजों का सत्यापन कर रहे हैं। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में इस प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए निर्वाचन विभाग की ओर से लगातार दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं।

राज्य निर्वाचन विभाग का कहना है कि मतदाता सूची लोकतांत्रिक प्रक्रिया का आधार है। इसलिए इसमें सही और पात्र मतदाताओं का नाम शामिल होना जरूरी है। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसी योग्य नागरिक का नाम केवल तकनीकी त्रुटियों या जानकारी के अभाव में सूची से बाहर न हो।

अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया पूरी होने के बाद तैयार होने वाली मतदाता सूची अधिक विश्वसनीय और अद्यतन होगी। उन्होंने सभी मतदाताओं से अपील की कि वे इस प्रक्रिया में सहयोग करें और यदि उनके विवरण में कोई त्रुटि है तो उसे समय रहते सुधार कराएं।

फिलहाल उत्तराखंड में एसआईआर प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। 19 लाख से अधिक मतदाताओं को जारी किए जा रहे नोटिस के बाद अब बूथ स्तर पर सुनवाई और समाधान की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके बाद अपील की व्यवस्था के जरिए मतदाताओं को उच्च स्तर पर अपनी बात रखने का अवसर भी मिलेगा।

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