उत्तराखंड

पूर्व मंत्री की पत्नी पर गंभीर आरोप, देहरादून SSP ने दिए जांच के निर्देश

Ratna Netam
31 Oct 2026 4:27 PM IST
पूर्व मंत्री की पत्नी पर गंभीर आरोप, देहरादून SSP ने दिए जांच के निर्देश
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देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत की पत्नी दीप्ति रावत से जुड़े संपत्ति विवाद को लेकर एक बार फिर सवाल उठे हैं। संपत्ति के भुगतान को लेकर लगाए गए आरोपों के संबंध में देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) द्वारा जांच के निर्देश दिए जाने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि शिकायत में संपत्ति से संबंधित भुगतान और लेनदेन को लेकर सवाल उठाए गए हैं। पुलिस अधिकारियों ने आरोपों की जांच के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की बात कही है। हालांकि, इस नए जांच आदेश की आधिकारिक प्रति और शिकायत के विस्तृत तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।मामला पूर्व मंत्री के परिवार से जुड़ा होने के कारण राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संपत्ति संबंधी शिकायत में लगाए गए आरोप कितने सही हैं, इसका निर्धारण दस्तावेजों की जांच और संबंधित पक्षों के बयान दर्ज होने के बाद ही किया जा सकेगा। फिलहाल आरोपों को किसी व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
संपत्ति के भुगतान को लेकर उठे सवाल
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, विवाद का केंद्र संपत्ति की खरीद-फरोख्त और उससे जुड़े भुगतान संबंधी आरोप हैं। शिकायत में कथित वित्तीय लेनदेन को लेकर सवाल उठाए जाने की बात सामने आई है।ऐसे मामलों में संपत्ति के स्वामित्व, खरीद-बिक्री के समझौते, रजिस्ट्री, भुगतान की रसीदों और बैंक खातों से हुए लेनदेन की जांच महत्वपूर्ण होती है। यदि किसी संपत्ति की खरीद के संबंध में भुगतान का विवाद सामने आता है, तो जांच एजेंसी संबंधित दस्तावेजों के आधार पर यह निर्धारित करती है कि मामला केवल दीवानी प्रकृति का है या इसमें किसी आपराधिक कृत्य के प्रमाण भी मौजूद हैं।इस मामले में शिकायतकर्ता की पहचान, विवादित संपत्ति का सटीक विवरण और कथित बकाया राशि के संबंध में पुष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन तथ्यों को लेकर कोई निश्चित दावा करना उचित नहीं होगा।
एसएसपी ने जांच के आधार पर कार्रवाई की बात कही
देहरादून पुलिस के स्तर पर शिकायत की जांच कराए जाने की सूचना सामने आई है। एसएसपी के हवाले से कहा गया है कि मामले में कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, जांच अधिकारी की नियुक्ति, जांच पूरी करने की समयसीमा और किसी संभावित प्राथमिकी के संबंध में आधिकारिक जानकारी की पुष्टि होना बाकी है।किसी भी संपत्ति विवाद में पुलिस की भूमिका शिकायत की प्रकृति और उपलब्ध साक्ष्यों पर निर्भर करती है। यदि जांच में धोखाधड़ी, जालसाजी या अन्य संज्ञेय अपराध के तत्व सामने आते हैं, तो कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है।वहीं, यदि विवाद केवल अनुबंध या भुगतान की शर्तों के पालन से संबंधित हो, तो उसके समाधान के लिए दीवानी न्यायिक प्रक्रिया भी प्रासंगिक हो सकती है।
पहले भी जमीन विवाद में सामने आया था परिवार का नाम
हरक सिंह रावत और उनकी पत्नी का नाम इससे पहले देहरादून के सहसपुर क्षेत्र में जमीन से जुड़े एक अलग मामले में सामने आ चुका है।जुलाई 2025 में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सहसपुर जमीन प्रकरण में हरक सिंह रावत, उनकी पत्नी दीप्ति रावत और अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ विशेष पीएमएलए अदालत में अभियोजन शिकायत दाखिल की थी।ईडी ने आरोप लगाया था कि सहसपुर क्षेत्र की जमीनों की खरीद-फरोख्त में अनियमितताएं हुई थीं और कुछ संपत्तियों का हस्तांतरण निर्धारित सर्किल रेट से काफी कम मूल्य पर किया गया था। इस मामले में दीप्ति रावत के साथ अन्य व्यक्तियों तथा एक ट्रस्ट का नाम भी सामने आया था।हालांकि, वर्तमान में सामने आए संपत्ति भुगतान संबंधी आरोपों का उस पुराने मामले से कोई प्रत्यक्ष संबंध स्थापित नहीं हुआ है। दोनों प्रकरणों को एक ही मामला मानना सही नहीं होगा।
101 बीघा जमीन को लेकर हुई थी कार्रवाई
ईडी की ओर से जनवरी 2025 में जारी जानकारी के अनुसार, सहसपुर क्षेत्र में लगभग 101 बीघा जमीन अस्थायी रूप से कुर्क की गई थी। एजेंसी ने उस समय जमीन का पंजीकृत मूल्य करीब 6.56 करोड़ रुपये और अनुमानित बाजार मूल्य 70 करोड़ रुपये से अधिक बताया था।जांच एजेंसी का आरोप था कि अदालत के पूर्व आदेशों के बावजूद विवादित जमीन के संबंध में पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार कर संपत्ति का हस्तांतरण किया गया। संबंधित जमीन के एक हिस्से पर दून इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस संचालित होने की जानकारी भी ईडी ने दी थी।इस पुराने प्रकरण में हरक सिंह रावत ने आरोपों से इनकार करते हुए खुद को निर्दोष बताया था। उन्होंने दावा किया था कि उनके पास जमीन से संबंधित वैध दस्तावेज मौजूद हैं।
राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है मामला
हरक सिंह रावत उत्तराखंड की राजनीति का जाना-पहचाना चेहरा हैं। वह राज्य सरकार में मंत्री रह चुके हैं और विभिन्न राजनीतिक घटनाक्रमों के दौरान चर्चा में रहे हैं।वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने भाजपा छोड़कर कांग्रेस का दामन थामा था। इसके बाद से वह कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय रहे हैं।पूर्व मंत्री के परिवार से जुड़े संपत्ति संबंधी आरोपों को लेकर जांच की खबर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय बन सकती है। हालांकि, इस विशेष शिकायत पर किसी राजनीतिक दल की आधिकारिक प्रतिक्रिया की पुष्टि नहीं हुई है।
जांच रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होगी स्थिति
संपत्ति के भुगतान को लेकर सामने आए नए आरोपों की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। पुलिस को शिकायत से जुड़े दस्तावेजों, भुगतान के रिकॉर्ड और संबंधित पक्षों के बयानों के आधार पर तथ्यों का परीक्षण करना होगा।इस प्रकरण में दीप्ति रावत की ओर से नए आरोपों पर कोई सत्यापित सार्वजनिक प्रतिक्रिया फिलहाल उपलब्ध नहीं है। संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने और आरोपों का जवाब देने का पूरा अवसर मिलना चाहिए।फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि शिकायत में लगाए गए भुगतान संबंधी आरोपों के समर्थन में क्या साक्ष्य प्रस्तुत किए गए हैं और पुलिस जांच में क्या निष्कर्ष सामने आते हैं। यदि जांच में किसी आपराधिक अनियमितता के प्रमाण मिलते हैं, तो आगे की कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है। वहीं, आरोपों की पुष्टि नहीं होने की स्थिति में मामला अलग दिशा ले सकता है।
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