उत्तराखंड

सांस्कृतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना के लिए स्थापित किए गए सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालय: CM Dhami

Rani Sahu
21 May 2025 9:45 AM IST
सांस्कृतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना के लिए स्थापित किए गए सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालय: CM Dhami
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Uttarakhand देहरादून : उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि भारत की आजादी के बाद सांस्कृतिक मूल्यों और राष्ट्रवाद की भावना की पुनर्स्थापना के लिए सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालयों की स्थापना की गई थी। मुख्यमंत्री मंगलवार को देहरादून के मांडूवाला स्थित सरस्वती विद्या मंदिर में छात्रावास के शिलान्यास कार्यक्रम में भाग ले रहे थे।
इस अवसर पर सभी विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह छात्रावास विद्यार्थियों को आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने के साथ ही उनके सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री ने हाल ही में संपन्न 10वीं और 12वीं की परीक्षा में शत-प्रतिशत परिणाम प्राप्त करने पर सरस्वती विद्या मंदिर मांडूवाला के विद्यार्थियों को बधाई दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार किए गए हैं। राज्य सरकार ने देश में पहली बार नई शिक्षा नीति लागू की। राज्य में पीएम श्री विद्यालय और नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालयों का निर्माण किया जा रहा है। राज्य के 13 जिलों के 500 विद्यालयों में वर्चुअल क्लासरूम की भी व्यवस्था की गई है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी सरकारी विद्यालयों में एनसीईआरटी की पुस्तकें अनिवार्य कर दी गई हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री मेधावी छात्र प्रोत्साहन छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत उत्तराखंड के सरकारी एवं गैर सरकारी विद्यालयों के कक्षा 6वीं से 12वीं तक के मेधावी छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति दी जा रही है। राज्य में बच्चों के व्यक्तित्व विकास के लिए प्रत्येक विकासखंड के कक्षा 10वीं एवं 12वीं के मेधावी छात्र-छात्राओं को भारत भ्रमण पर भेजने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। राज्य में मुख्यमंत्री बालश्रय योजना भी शुरू की गई है। विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता एवं परिणामों में सुधार लाने के उद्देश्य से राज्य में विद्या समीक्षा केंद्र की भी स्थापना की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री विद्या समीक्षा केंद्र के गुजरात मॉडल को लागू करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन गया है। राज्य के लगभग 16 हजार विद्यालयों को इस नवाचार से जोड़ा गया है। जल्द ही प्रदेश के सभी निजी स्कूलों को भी विद्या समीक्षा केंद्र से जोड़ा जाएगा। जिससे इन स्कूलों से जुड़े शिक्षकों, विद्यार्थियों और सभी शैक्षणिक गतिविधियों की जानकारी केंद्रीकृत व्यवस्था के माध्यम से सरकार को उपलब्ध हो सकेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में शिक्षा के साथ-साथ खेलों पर भी विशेष ध्यान दे रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने करोड़ों रुपये की लागत से प्रदेश में स्टेडियम और खेल सुविधाओं का निर्माण कराया है। प्रतिभावान खिलाड़ियों को 8 वर्ष की आयु से ही छात्रवृत्ति दी जा रही है। प्रदेश के आवासीय खेल महाविद्यालयों के खिलाड़ियों को निशुल्क प्रशिक्षण, शिक्षा, आवास, भोजन और किट आदि भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर की किसी भी प्रतियोगिता में पदक लाने वाले खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी देने की ऐतिहासिक शुरुआत भी की गई है। उन्होंने कहा कि हाल ही में संपन्न 38वें राष्ट्रीय खेलों के भव्य और सफल आयोजन में प्रदेश के खिलाड़ियों ने 100 से अधिक पदक लाकर इतिहास रच दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्या भारती द्वारा पूरे भारत में 12 हजार से अधिक विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें 35 लाख से अधिक विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इन विद्यालयों में आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की जा रही है। इसके साथ ही विद्यार्थियों में देशभक्ति, नैतिक मूल्यों, भारतीय संस्कृति, संस्कारों एवं समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। विद्या भारती द्वारा संचालित विद्यालयों में चरित्र निर्माण एवं सेवा भावना को महत्व दिया जा रहा है। (एएनआई)
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