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Haridwar हरिद्वार। राम मंदिर दान से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले पर Swami Jitendranand Saraswati ने संयम बरतने और जांच पूरी होने तक इंतजार करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इस मामले को फिलहाल "घोटाला" कहना उचित नहीं होगा, क्योंकि जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष सामने आना बाकी है। अखिल भारतीय संत समिति के महासचिव स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि यह मामला मंदिर निर्माण के लिए श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान और चढ़ावे के लेखा-जोखा से जुड़ा है। उनके अनुसार, प्रारंभिक तौर पर कुछ वित्तीय अनियमितताएं या लेखांकन संबंधी चूक सामने आई हैं, जो संभवतः खातों के रखरखाव में लापरवाही के कारण हुई हों। उन्होंने कहा कि मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) पूरे प्रकरण की पड़ताल कर रहा है। इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच एजेंसी की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार किया जाना चाहिए।
स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने स्पष्ट कहा कि यदि जांच में कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कानून के सामने सभी समान हैं और किसी भी प्रभावशाली या शक्तिशाली व्यक्ति को जवाबदेही से छूट नहीं मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा, "हम सभी संतों की यही राय है कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हो। जो भी दोषी हो, उसे किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाना चाहिए। संत समाज का मानना है कि धार्मिक संस्थाओं और श्रद्धालुओं के विश्वास से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए जांच पूरी होने तक धैर्य बनाए रखना और तथ्यों के आधार पर ही निष्कर्ष निकालना आवश्यक है।
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