उत्तराखंड

1200 करोड़ की ऑनलाइन ठगी, बॉट ब्रो गैंग के 2 आरोपी गिरफ्तार

Kavita2
6 Nov 2026 9:34 AM IST
1200 करोड़ की ऑनलाइन ठगी, बॉट ब्रो गैंग के 2 आरोपी गिरफ्तार
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देहरादून। उत्तराखंड में ऑनलाइन ट्रेडिंग और निवेश के नाम पर करीब 1200 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले में स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) को बड़ी सफलता मिली है। एसटीएफ की विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने बॉट ब्रो गैंग के नेटवर्क से जुड़े दो प्रमुख आरोपियों नवीन सिंह नेगी और कविता परमार को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि यह गिरोह लोगों को ऑनलाइन ट्रेडिंग, क्रिप्टोकरेंसी और निवेश योजनाओं में मोटे मुनाफे का झांसा देकर करोड़ों रुपये जमा कराता था। निवेशकों को आकर्षित करने के लिए विदेशी यात्राओं, आकर्षक कमीशन और हर महीने निश्चित लाभ का लालच भी दिया जाता था। इस नेटवर्क के शिकार लोगों में पूर्व सैनिक और सेवानिवृत्त कर्मचारी भी शामिल बताए जा रहे हैं।

एसटीएफ के अनुसार, बॉट ब्रो, बॉट अल्फा, क्यूएफएक्स और अन्य ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के नाम पर लंबे समय से निवेशकों से रकम जुटाई जा रही थी। कई लोगों ने अपनी जीवनभर की जमा पूंजी इन योजनाओं में लगा दी। शुरुआती दौर में मुनाफे का भरोसा दिलाने के बाद निवेशकों को भुगतान संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ा। शिकायतें सामने आने के बाद एसटीएफ ने मामले की जांच तेज की और दो आरोपियों को गिरफ्तार किया।

नवीन सिंह नेगी और कविता परमार गिरफ्तार

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान नवीन सिंह नेगी और कविता परमार के रूप में हुई है। नवीन सिंह नेगी मूल रूप से रुद्रप्रयाग जिले का निवासी है और वर्तमान में देहरादून के रायपुर थाना क्षेत्र की सिद्धि विनायक कॉलोनी में रह रहा था। उसकी उम्र 35 वर्ष बताई गई है।

दूसरी आरोपी कविता परमार देहरादून के बालावाला क्षेत्र की निवासी है। एसटीएफ के अनुसार, दोनों की कथित भूमिका लोगों को निवेश योजनाओं से जोड़ने और नेटवर्क का विस्तार करने में रही है।

जांच टीम अब आरोपियों के वित्तीय लेनदेन, बैंक खातों, निवेशकों से संपर्क और अन्य सहयोगियों के बारे में जानकारी जुटा रही है। यह पता लगाने का प्रयास भी किया जा रहा है कि निवेशकों से प्राप्त रकम कहां भेजी गई और नेटवर्क में किन लोगों की भूमिका रही।

हर महीने 5 से 8 प्रतिशत मुनाफे का लालच

जांच में सामने आया है कि आरोपियों से जुड़े निवेश प्लेटफॉर्म के माध्यम से लोगों को हर महीने पांच से आठ प्रतिशत तक मुनाफा मिलने का भरोसा दिलाया जाता था।

इतने अधिक लाभ का वादा सुनकर कई लोगों ने निवेश करना शुरू कर दिया। आरोप है कि निवेशकों को यह विश्वास दिलाया गया कि उनका पैसा ऑनलाइन ट्रेडिंग और विदेशी मुद्रा कारोबार में लगाया जा रहा है।

गिरोह से जुड़े लोग सेमिनार और ऑनलाइन बैठकों के माध्यम से योजनाओं का प्रचार करते थे। पुराने निवेशकों के जरिए नए लोगों को जोड़ने का प्रयास भी किया जाता था।

इस तरह निवेशकों का नेटवर्क लगातार बढ़ता गया और बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी बचत इन योजनाओं में लगा दी।

2022 से नेटवर्क से जुड़ा था नवीन नेगी

एसटीएफ की जांच के अनुसार, नवीन सिंह नेगी वर्ष 2022 से क्यूएफएक्स कंपनी से जुड़ा हुआ था। शुरुआती समय में वह निवेश और उससे मिलने वाले लाभ के माध्यम से कंपनी से जुड़ा रहा।

इसके बाद उस पर अन्य लोगों को बॉट ब्रो और बॉट अल्फा जैसी योजनाओं में निवेश के लिए प्रेरित करने का आरोप है।

जांच में यह जानकारी भी सामने आई है कि बॉट ब्रो प्लेटफॉर्म बंद होने और उसके खिलाफ मुकदमे दर्ज होने के बाद भी नवीन कथित रूप से एक अन्य कंपनी RISENWAYS का प्रचार कर रहा था।

एसटीएफ के अनुसार, ऑनलाइन बैठकों के जरिए लोगों को दोबारा निवेश कारोबार से जोड़ने की कोशिश की जा रही थी। इससे नए निवेशकों के साथ धोखाधड़ी होने की आशंका को देखते हुए जांच एजेंसियों ने कार्रवाई की।

कविता परमार की आईडी से हजारों लोग जुड़े होने का दावा

एसटीएफ की जांच में कविता परमार की भूमिका को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसी के अनुसार, कविता की कथित रोबो आईडी से करीब 10 से 15 हजार लोगों के जुड़े होने की जानकारी मिली है।

इस आंकड़े के आधार पर जांच एजेंसियां नेटवर्क के विस्तार और उसमें शामिल लोगों की वास्तविक भूमिका का पता लगाने का प्रयास कर रही हैं। हालांकि, किसी आईडी से जुड़े सभी व्यक्तियों को ठगी का शिकार या अपराध में शामिल मानना उचित नहीं होगा।

रिपोर्टों के अनुसार, कविता वर्ष 2023 से 2026 के बीच कंपनी से जुड़े सेमिनारों और कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए मलेशिया, थाईलैंड, दुबई और वियतनाम सहित कई देशों की लगभग 12 से 13 यात्राएं कर चुकी थी।

जांच एजेंसियां इन यात्राओं से संबंधित वित्तीय लेनदेन और कार्यक्रमों के उद्देश्य की भी पड़ताल कर रही हैं।

विदेश में बैठे कथित मास्टरमाइंड की तलाश

बॉट ब्रो और उससे जुड़े अन्य निवेश प्लेटफॉर्म के मामले में विदेश में बैठे कथित मास्टरमाइंड लविश चौधरी की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

एसटीएफ यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि निवेशकों से जुटाई गई राशि किन खातों में भेजी गई और क्या इसका कोई हिस्सा विदेशों तक पहुंचाया गया।

जांच टीम आरोपियों के डिजिटल उपकरणों, बैंकिंग रिकॉर्ड और ऑनलाइन निवेश से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है।

इसके अलावा निवेशकों को जोड़ने वाले एजेंटों और नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान करने की दिशा में भी जांच आगे बढ़ रही है।

एसआईटी का गठन कर शुरू की गई विशेष जांच

ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी की शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ के निर्देश पर एसटीएफ के अधीन विशेष जांच टीम का गठन किया गया था।

एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह की निगरानी में जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

इस मामले में साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन देहरादून में भारतीय न्याय संहिता की धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र से संबंधित धाराओं, आईटी अधिनियम तथा अनियमित जमा योजनाओं पर प्रतिबंध लगाने वाले बीयूडीएस अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

एसआईटी निवेशकों की शिकायतों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर गिरोह की गतिविधियों की जांच कर रही है।

पूर्व सैनिकों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बनाया निशाना

मामले में सामने आई शिकायतों के अनुसार, आरोपियों से जुड़े नेटवर्क ने पूर्व सैनिकों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी निवेश योजनाओं से जोड़ने का प्रयास किया।

ऐसे कई लोगों ने बेहतर भविष्य और नियमित आय की उम्मीद में अपनी बचत का पैसा निवेश किया।

देहरादून में एक सेवानिवृत्त शिक्षा विभाग कर्मचारी से करीब 26 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी का मामला भी सामने आया था। इस शिकायत में निवेश के नाम पर बड़ी रकम अलग-अलग खातों में स्थानांतरित कराए जाने का आरोप लगाया गया है।

देशभर में फैले नेटवर्क की जांच जारी

बॉट ब्रो से जुड़े मामलों की जांच केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं है। देश के अन्य राज्यों में भी इसी प्रकार की ऑनलाइन निवेश योजनाओं के खिलाफ जांच और कार्रवाई हो चुकी है।

प्रवर्तन निदेशालय भी क्यूएफएक्स, वाईएफएक्स और बॉट ब्रो से जुड़े कथित निवेश घोटाले की जांच कर चुका है। वर्ष 2025 में ईडी ने संबंधित मामलों में करोड़ों रुपये की कथित अपराध आय जब्त या कुर्क किए जाने की जानकारी दी थी।

फिलहाल नवीन सिंह नेगी और कविता परमार की गिरफ्तारी के बाद एसटीएफ की जांच में नई जानकारियां सामने आने की उम्मीद है। जांच एजेंसी गिरोह के अन्य सदस्यों, निवेशकों से जुटाई गई रकम और उससे जुड़े वित्तीय नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है।

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