
देहरादून। राजधानी देहरादून के बसंत विहार थाना क्षेत्र में भाजपा पार्षद अमिता सिंह के घर लूट की सनसनीखेज वारदात सामने आई है। आरोप है कि घर में काम करने वाले नौकर ने पहले खाने में नशीला पदार्थ मिलाकर पार्षद, उनके पति और बेटे को बेहोश कर दिया। इसके बाद उसने अपने चार अन्य साथियों को घर बुलाया और लूटपाट की वारदात को अंजाम दिया। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है।
पुलिस के अनुसार, आरोपी नौकर को करीब 25 दिन पहले ही एक ऑनलाइन एजेंसी के माध्यम से काम पर रखा गया था। परिवार को उस पर किसी तरह का संदेह नहीं था। कम समय में उसने घर के सदस्यों का भरोसा हासिल कर लिया और फिर योजनाबद्ध तरीके से वारदात को अंजाम दिया। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी का आपराधिक इतिहास रहा है और वह दिल्ली के एक डकैतीकांड में जेल भी जा चुका है।
घटना बसंत विहार थाना क्षेत्र की बताई जा रही है। भाजपा पार्षद अमिता सिंह अपने परिवार के साथ घर में मौजूद थीं। आरोप है कि नौकर ने खाने में नशीला पदार्थ मिला दिया। खाना खाने के बाद अमिता सिंह, उनके पति और बेटा बेहोश हो गए। परिवार के सदस्यों के अचेत होने के बाद आरोपी ने अपने साथियों को इसकी जानकारी दी।
इसके बाद उसके चार साथी घर पहुंचे और कथित तौर पर घर में रखे सामान को खंगालना शुरू कर दिया। आरोपियों ने घर में मौजूद कीमती सामान और अन्य वस्तुओं पर हाथ साफ किया। वारदात को अंजाम देने के बाद सभी आरोपी मौके से फरार हो गए।
घटना की जानकारी मिलने के बाद बसंत विहार थाना पुलिस सक्रिय हुई और मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि घर से क्या-क्या सामान लूटा गया और उसकी कुल कीमत कितनी है। साथ ही आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए भी जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
सबसे गंभीर बात यह सामने आई है कि आरोपी नौकर का पहले से आपराधिक रिकॉर्ड था। पुलिस के मुताबिक वह दिल्ली में हुई एक डकैती के मामले में जेल जा चुका है। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि जिस ऑनलाइन एजेंसी के जरिए उसे नौकरी पर रखा गया, वहां उसके पिछले रिकॉर्ड की जांच किस स्तर पर की गई थी।
पुलिस अब उस ऑनलाइन एजेंसी से भी जानकारी जुटा सकती है, जिसके माध्यम से आरोपी नौकर को घर में काम मिला था। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि एजेंसी ने आरोपी के दस्तावेजों, पहचान और आपराधिक पृष्ठभूमि का सत्यापन किया था या नहीं। यदि सत्यापन में लापरवाही सामने आती है तो यह मामला और गंभीर हो सकता है।
प्रारंभिक जांच से पुलिस को आशंका है कि पूरी वारदात पहले से बनाई गई योजना के तहत की गई। घर में 25 दिन तक काम करने के दौरान आरोपी ने परिवार की दिनचर्या, घर की स्थिति और कीमती सामान की जानकारी जुटाई होगी। इसके बाद उसने सही समय देखकर खाने में नशीला पदार्थ मिलाया और परिवार के बेहोश होने के बाद अपने साथियों को बुला लिया।
वारदात के तरीके को देखते हुए पुलिस यह भी जांच रही है कि आरोपी के साथियों की इस तरह की अन्य घटनाओं में कोई भूमिका रही है या नहीं। आरोपी के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड से जुड़े मामलों की जानकारी भी खंगाली जा रही है। इसके साथ ही आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों और संभावित आवाजाही के रास्तों की जांच की जा सकती है, ताकि आरोपियों तक पहुंचने में मदद मिल सके।
भाजपा पार्षद के घर हुई इस वारदात के बाद घरेलू सहायकों के सत्यापन को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। शहरों में बड़ी संख्या में लोग ऑनलाइन एजेंसियों के माध्यम से घरेलू नौकर, ड्राइवर, केयरटेकर और अन्य कर्मचारी रखते हैं। ऐसे में नियुक्ति से पहले पहचान और पुलिस सत्यापन की प्रक्रिया महत्वपूर्ण मानी जाती है।
इस मामले में आरोपी का आपराधिक इतिहास सामने आने के बाद जांच का एक अहम हिस्सा यह भी होगा कि आखिर वह दोबारा आसानी से घरेलू काम में कैसे नियुक्त हो गया। यदि किसी एजेंसी के रिकॉर्ड में उसकी आपराधिक पृष्ठभूमि दर्ज नहीं थी तो इस लापरवाही की वजह भी तलाशी जाएगी।
घटना के बाद स्थानीय स्तर पर सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है। जिस तरह परिवार के तीन सदस्यों को पहले नशीला पदार्थ देकर अचेत किया गया और फिर साथियों को बुलाकर लूट को अंजाम दिया गया, उससे यह स्पष्ट है कि आरोपी ने मौका देखकर सुनियोजित तरीके से कार्रवाई की।
पुलिस फिलहाल पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। आरोपी नौकर और उसके चार साथियों की तलाश की जा रही है। साथ ही लूटे गए सामान का विवरण जुटाया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वारदात में कुल कितने लोग शामिल थे और लूट की कुल कीमत कितनी है।
देहरादून में भाजपा पार्षद अमिता सिंह के घर हुई यह वारदात अब पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। परिवार को नशीला पदार्थ देकर बेहोश करने और फिर सामूहिक रूप से लूट को अंजाम देने के इस मामले ने घरेलू कर्मचारियों की नियुक्ति और सत्यापन व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।





