उत्तराखंड

उत्तराखंड में रोडवेज बसों का चक्का जाम, 3500 कर्मचारी हड़ताल पर

Kavita2
30 Oct 2026 10:02 AM IST
उत्तराखंड में रोडवेज बसों का चक्का जाम, 3500 कर्मचारी हड़ताल पर
x

देहरादून। उत्तराखंड में शुक्रवार, 30 अक्टूबर से रोडवेज बस सेवाओं पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। उत्तरांचल रोडवेज कर्मचारी यूनियन ने लंबित वेतन भुगतान और अन्य मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार का ऐलान किया है। इस आंदोलन में करीब 3500 चालक और परिचालकों के शामिल होने की संभावना है। कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से उत्तराखंड परिवहन निगम की लगभग एक हजार बसों का संचालन प्रभावित हो सकता है। त्योहारों से ठीक पहले शुरू हुए इस आंदोलन ने यात्रियों की चिंता बढ़ा दी है। सबसे अधिक परेशानी लंबी दूरी की यात्रा करने वाले लोगों को उठानी पड़ सकती है। कर्मचारियों और परिवहन निगम प्रबंधन के बीच गुरुवार को करीब साढ़े तीन घंटे तक चली वार्ता बेनतीजा रहने के बाद यूनियन ने शुक्रवार सुबह छह बजे से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार का निर्णय लिया।

उत्तराखंड रोडवेज कर्मचारी यूनियन पिछले कई दिनों से लंबित वेतन और विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रही है। यूनियन का कहना है कि कर्मचारियों को अगस्त और सितंबर महीने का वेतन नहीं मिला है, जबकि अक्टूबर का महीना भी समाप्त होने वाला है। ऐसे में कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। नियमित वेतन नहीं मिलने के कारण परिवार का खर्च चलाने, बच्चों की पढ़ाई और अन्य जरूरी आवश्यकताओं को पूरा करने में परेशानी हो रही है।

कर्मचारी संगठन ने आरोप लगाया है कि परिवहन निगम प्रबंधन को कई बार अपनी समस्याओं से अवगत कराया गया, लेकिन मांगों का संतोषजनक समाधान नहीं हुआ। इसी वजह से कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन आंदोलन का रास्ता अपनाया है।

उत्तरांचल रोडवेज कर्मचारी यूनियन ने 30 अक्टूबर से कार्य बहिष्कार की घोषणा पहले ही कर दी थी। इस संबंध में परिवहन निगम प्रबंधन को नोटिस भी दिया गया था। आंदोलन को टालने के लिए गुरुवार को निगम मुख्यालय में महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई। इस बैठक में परिवहन निगम की प्रबंध निदेशक रीना जोशी और तीनों महाप्रबंधकों के साथ कर्मचारी यूनियन के प्रतिनिधि शामिल हुए।

बैठक सुबह करीब साढ़े 11 बजे शुरू हुई और दोपहर तीन बजे तक चली। लगभग साढ़े तीन घंटे तक दोनों पक्षों के बीच विभिन्न मांगों पर चर्चा हुई, लेकिन किसी प्रमुख मुद्दे पर सहमति नहीं बन पाई। इसके बाद कर्मचारी संगठन ने आंदोलन जारी रखने का फैसला किया।

यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष कमल पपनै और महामंत्री अशोक चौधरी ने कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर प्रबंधन के सामने अपनी बात रखी। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि वेतन भुगतान में लगातार देरी होने से कर्मचारियों को गंभीर आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में उनकी मांगों पर जल्द निर्णय लिया जाना जरूरी है।

कर्मचारी यूनियन की प्रमुख मांगों में लंबित वेतन का तत्काल भुगतान, हर महीने की सात तारीख तक नियमित वेतन जारी करना, संविदा और एजेंसी कर्मचारियों को समान कार्य के लिए समान वेतन देना तथा महंगाई भत्ते से संबंधित मांगें शामिल हैं। यूनियन संविदा चालकों, परिचालकों और विशेष श्रेणी के तकनीकी कर्मचारियों के लिए 30,447 रुपये प्रतिमाह वेतन की मांग भी कर रही है।

इसके अलावा कर्मचारियों ने राज्य सरकार से परिवहन निगम के कर्मचारियों का वेतन राजकीय कोष से देने की व्यवस्था करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर उत्तराखंड में भी ऐसी व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।

कर्मचारी संगठन ने रोडवेज के पुराने और खराब हालत वाले बस बेड़े को लेकर भी चिंता जताई है। यूनियन का कहना है कि कई बसों की स्थिति ठीक नहीं है और इससे यात्रियों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। कर्मचारियों ने बसों की मरम्मत, नए वाहनों की उपलब्धता और अवैध निजी बसों के संचालन पर रोक लगाने की मांग की है।

रोडवेज कर्मचारियों के आंदोलन का सबसे अधिक असर देहरादून, नैनीताल और टनकपुर मंडल में देखने को मिल सकता है। इन मंडलों के विभिन्न डिपो में कर्मचारी कार्य बहिष्कार करेंगे। यूनियन के मुताबिक करीब एक हजार बसों की सेवाएं प्रभावित होने की आशंका है।

कर्मचारी संगठन से जुड़े प्रतिनिधियों का अनुमान है कि प्रदेश में लगभग 75 से 80 प्रतिशत रोडवेज बसों का संचालन प्रभावित हो सकता है। हालांकि यह अनुमान आंदोलन में कर्मचारियों की वास्तविक भागीदारी पर निर्भर करेगा। अभी सभी बस सेवाओं के पूरी तरह बंद होने की पुष्टि नहीं हुई है।

उत्तराखंड से दिल्ली, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों के लिए बड़ी संख्या में रोडवेज बसों का संचालन होता है। इन सेवाओं का उपयोग नौकरीपेशा लोग, विद्यार्थी, व्यापारी और अन्य यात्री नियमित रूप से करते हैं। ऐसे में अनिश्चितकालीन हड़ताल लंबी चलने पर यात्रियों को वैकल्पिक परिवहन का सहारा लेना पड़ सकता है।

त्योहारी सीजन होने के कारण रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल का समय भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दीपावली के आसपास बड़ी संख्या में लोग अपने घर लौटते हैं। बस सेवाएं प्रभावित होने से यात्रियों को बस अड्डों पर अधिक इंतजार करना पड़ सकता है। विशेष रूप से पहाड़ी और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की परेशानी बढ़ सकती है, क्योंकि कई स्थानों पर सरकारी बसें सार्वजनिक परिवहन का महत्वपूर्ण साधन हैं।

इससे पहले 23 अक्टूबर को भी रोडवेज कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर एक दिवसीय कार्य बहिष्कार किया था। उस दिन कुछ स्थानों पर बस सेवाएं प्रभावित हुई थीं। ऋषिकेश में दिल्ली जाने वाली बसों के लिए यात्रियों को इंतजार करना पड़ा था। इसके बाद भी मांगों का समाधान नहीं होने पर कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया।

कर्मचारी नेताओं का कहना है कि उनका आंदोलन केवल वेतन भुगतान तक सीमित नहीं है, बल्कि रोडवेज व्यवस्था की समस्याओं को दूर कराने के लिए भी है। नियमित वेतन, कर्मचारियों की सुविधाएं और बसों की बेहतर स्थिति सुनिश्चित होने से परिवहन व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

फिलहाल परिवहन निगम प्रबंधन और कर्मचारी यूनियन के बीच मांगों पर सहमति नहीं बन सकी है। कर्मचारियों ने मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी है। अब सबकी नजर निगम प्रबंधन और राज्य सरकार के अगले कदम पर है।

यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आने वाले दिनों में उत्तराखंड की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है। यात्रियों को सलाह दी जा रही है कि यात्रा शुरू करने से पहले संबंधित रोडवेज डिपो से बसों के संचालन की जानकारी जरूर प्राप्त कर लें।

Next Story