उत्तराखंड

उत्तराखंड में सड़क निर्माण होगा आसान, धामी कैबिनेट का बड़ा फैसला

Kavita2
23 Oct 2026 9:38 AM IST
उत्तराखंड में सड़क निर्माण होगा आसान, धामी कैबिनेट का बड़ा फैसला
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देहरादून। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क निर्माण को आसान और तेज बनाने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। गुरुवार को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में लोक निर्माण विभाग से जुड़े सड़क निर्माण के महत्वपूर्ण मानकों में बदलाव के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। नई व्यवस्था के तहत अब पहाड़ काटकर सड़क बनाने और उसके बाद सुरक्षा संबंधी निर्माण कार्य कराने के लिए अलग-अलग चरणों में स्वीकृति लेने की आवश्यकता नहीं होगी। दोनों प्रकार के कार्यों को एक ही चरण में मंजूरी मिल सकेगी। सरकार के इस फैसले से पर्वतीय क्षेत्रों में नई सड़कों और पुलों के निर्माण की प्रक्रिया तेज होने तथा लंबे समय से लंबित परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है।

सड़क निर्माण की मंजूरी प्रक्रिया में बड़ा बदलाव

उत्तराखंड सरकार ने लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत पर्वतीय सड़कों के निर्माण में लागू पुरानी व्यवस्था को सरल बनाने का निर्णय लिया है। अभी तक पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क निर्माण के दौरान पहाड़ कटान और सुरक्षात्मक कार्यों के लिए अलग-अलग चरणों में मंजूरी की व्यवस्था थी।

इस कारण सड़क निर्माण का एक हिस्सा पूरा होने के बाद दूसरे हिस्से के लिए स्वीकृति मिलने में समय लग सकता था। विशेष रूप से पहाड़ काटने के बाद सुरक्षा दीवारों, नालियों और अन्य जरूरी निर्माण कार्यों को शुरू करने के लिए अलग प्रक्रिया अपनानी पड़ती थी।

अब कैबिनेट की मंजूरी से दूसरे चरण के अंतर्गत आने वाले इन कार्यों को एक साथ स्वीकृति दी जा सकेगी। इससे विभागीय प्रक्रियाओं में लगने वाला समय कम होने और निर्माण एजेंसियों को काम करने में सुविधा मिलने की उम्मीद है।

पहाड़ कटान और सुरक्षा कार्य एक साथ होंगे मंजूर

पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क निर्माण मैदानी इलाकों की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण होता है। सड़क बनाने के लिए पहाड़ों को काटना पड़ता है। इसके बाद सड़क को सुरक्षित बनाने के लिए रिटेनिंग वॉल, सुरक्षा दीवार, जल निकासी नालियां, पुलिया और अन्य संरचनाओं का निर्माण जरूरी होता है।

पुरानी व्यवस्था में इन कार्यों को अलग-अलग चरणों में स्वीकृति मिलने से निर्माण के बीच अंतराल आ सकता था। इससे समय बढ़ने के साथ पहाड़ कटान वाले क्षेत्रों में मिट्टी और पत्थर गिरने का खतरा भी बना रहता था।

नई व्यवस्था में पहाड़ कटान के साथ संबंधित सुरक्षा कार्यों की भी स्वीकृति एक ही चरण में दी जाएगी। इससे निर्माण कार्यों की बेहतर योजना तैयार करने में मदद मिलेगी।

बारिश और भूस्खलन से होने वाले नुकसान में आएगी कमी

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश के दौरान भूस्खलन और सड़क धंसने की घटनाएं अक्सर सामने आती हैं। कई बार सड़क निर्माण के लिए पहाड़ काट दिए जाते हैं, लेकिन सुरक्षात्मक कार्य पूरे नहीं होने के कारण बारिश में सड़क और आसपास के क्षेत्र को नुकसान पहुंचने की आशंका बढ़ जाती है।

नई व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य पहाड़ कटान के तुरंत बाद जरूरी सुरक्षा कार्यों को समय पर पूरा कराना भी है।

सुरक्षा दीवारों, नालियों और ढलान संरक्षण से जुड़े निर्माण समय पर होने से बारिश के दौरान होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, निर्माण की गुणवत्ता और भूगर्भीय परिस्थितियों के अनुसार सुरक्षा मानकों का पालन करना पहले की तरह आवश्यक रहेगा।

दूरस्थ गांवों को सड़क सुविधा मिलने की उम्मीद

उत्तराखंड में आज भी कई पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों में सड़क संपर्क को बेहतर बनाने की आवश्यकता है। ग्रामीण इलाकों में सड़क सुविधा का सीधा संबंध शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था से होता है।

सड़क निर्माण में देरी होने से ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई क्षेत्रों में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने, बच्चों को स्कूल भेजने और कृषि उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में दिक्कत होती है।

सरकार के इस फैसले से ऐसी परियोजनाओं को लाभ मिलने की उम्मीद है, जिनकी निर्माण प्रक्रिया अलग-अलग विभागीय स्वीकृतियों के कारण प्रभावित होती रही है।

नई व्यवस्था से स्वीकृति मिलने के बाद सड़क निर्माण की गतिविधियों को अधिक व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया जा सकेगा।

पर्यटन और स्थानीय कारोबार को भी मिलेगा लाभ

उत्तराखंड पर्यटन के लिहाज से देश के महत्वपूर्ण राज्यों में शामिल है। यहां चारधाम यात्रा के साथ अनेक धार्मिक, प्राकृतिक और साहसिक पर्यटन स्थल मौजूद हैं।

पर्वतीय क्षेत्रों में बेहतर सड़क संपर्क से पर्यटकों की आवाजाही आसान होती है। इसके साथ होटल, होमस्टे, परिवहन, छोटे व्यापार और स्थानीय उत्पादों की बिक्री को भी बढ़ावा मिलता है।

नई सड़कों का निर्माण समय पर पूरा होने से पर्यटन क्षेत्रों तक पहुंच बेहतर हो सकती है। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना है।

सरकार पहले से ही राज्य में सड़क नेटवर्क मजबूत करने और दूरस्थ क्षेत्रों को मुख्य मार्गों से जोड़ने पर जोर दे रही है।

ग्रामीण सड़क नेटवर्क विस्तार पर सरकार का जोर

उत्तराखंड सरकार प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से भी दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क संपर्क बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।

राज्य सरकार की ओर से अक्टूबर 2026 में केंद्र के समक्ष प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चौथे चरण के अंतर्गत 315 मोटर मार्गों के प्रस्ताव रखे गए थे। इन सड़कों की कुल लंबाई करीब 1,777 किलोमीटर है और इनके निर्माण की प्रस्तावित लागत 2,526 करोड़ रुपये है।

इसके अतिरिक्त 32 पुलों के निर्माण पर 182 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव है। इस तरह सड़क और पुल निर्माण की कुल प्रस्तावित लागत 2,708 करोड़ रुपये है।

सरकार के अनुसार, इन परियोजनाओं का उद्देश्य 610 बसावटों को सड़क संपर्क से जोड़ना है।

लोक निर्माण विभाग को मिलेगी राहत

कैबिनेट के निर्णय से लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों को प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करने में सुविधा मिलने की उम्मीद है।

एक ही चरण में संबंधित कार्यों की स्वीकृति मिलने से परियोजना की योजना बनाना, निर्माण की प्राथमिकताएं निर्धारित करना और संसाधनों का उपयोग करना आसान हो सकता है।

इसके अलावा निर्माण कार्यों के बीच अनावश्यक अंतराल कम होने से परियोजनाओं की निगरानी भी बेहतर ढंग से की जा सकेगी।

हालांकि, इस निर्णय का अर्थ सभी प्रकार की कानूनी और पर्यावरणीय अनुमतियों से छूट मिलना नहीं है। जहां वन भूमि, पर्यावरण या अन्य वैधानिक स्वीकृतियां आवश्यक होंगी, वहां संबंधित नियमों का पालन करना होगा।

पहाड़ी क्षेत्रों के विकास को मिलेगी नई गति

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क, पुल और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को प्राथमिकता दे रही है।

सरकार का मानना है कि मजबूत सड़क नेटवर्क से ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पर्यटन, आपदा प्रबंधन और आवश्यक सेवाओं की पहुंच बेहतर बनाई जा सकती है।

गुरुवार को कैबिनेट से मिली मंजूरी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक सुधार माना जा रहा है।

अब देखना होगा कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद लोक निर्माण विभाग सड़क परियोजनाओं को कितनी तेजी से पूरा कर पाता है। यदि स्वीकृति प्रक्रिया सरल होने के साथ सुरक्षा मानकों और निर्माण गुणवत्ता का भी पूरा ध्यान रखा गया, तो यह फैसला उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क संपर्क मजबूत करने की दिशा में उपयोगी साबित हो सकता है।

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