
बागेश्वर। उत्तराखंड के कपकोट तहसील क्षेत्र के लखमारा गांव में पिछले दो दिनों से हो रहे लगातार भूस्खलन ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। गांव से करीब 500 मीटर की दूरी पर पहाड़ी से लगातार मलबा, बड़े बोल्डर और पेड़ टूटकर गिर रहे हैं, जिससे स्थानीय लोगों में भय का माहौल है।
ग्रामीणों को आशंका है कि यदि पहाड़ी से गिरने वाले बड़े बोल्डर लखमारा गधेरे में जमा होकर पानी का रास्ता रोक देते हैं तो वहां प्राकृतिक तालाब बन सकता है। ऐसी स्थिति में भविष्य में अचानक पानी का बहाव बढ़ने से गांव और आसपास के इलाकों में गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।
पहाड़ी से लगातार गिर रहा मलबा
जानकारी के अनुसार, लखमारा गांव के पास पहाड़ी क्षेत्र में पिछले दो दिनों से लगातार भूस्खलन हो रहा है।
पहाड़ी का बड़ा हिस्सा कमजोर होने के कारण मलबा, पत्थर और पेड़ नीचे की ओर गिर रहे हैं और लखमारा गधेरे में समा रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि अभी तक किसी बड़े हादसे की सूचना नहीं है, लेकिन जिस तरह से लगातार मलबा गिर रहा है, उससे खतरा बढ़ता जा रहा है।
गधेरे में तालाब बनने की आशंका
स्थानीय लोगों ने बताया कि यदि भारी भरकम बोल्डर गधेरे में गिरकर पानी का बहाव रोक देते हैं तो वहां पानी जमा होना शुरू हो सकता है।
इससे एक अस्थायी झील या तालाब जैसी स्थिति बन सकती है, जो बाद में अचानक टूटने पर बड़े नुकसान का कारण बन सकती है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से समय रहते मौके का निरीक्षण कर जरूरी कदम उठाने की मांग की है।
किसानों की जमीन को पहुंचा नुकसान
भूस्खलन के कारण गांव के कई किसानों की कृषि भूमि मलबे की चपेट में आ गई है।
प्रभावित किसानों में शंकर सिंह, मोहन सिंह, जैंत सिंह, अजब सिंह, उमा देवी, किशन सिंह और पान सिंह शामिल हैं।
किसानों का कहना है कि मलबा खेतों में भर जाने से उनकी फसल और जमीन को नुकसान पहुंचा है।
पहाड़ी क्षेत्रों में खेती पहले ही कठिन परिस्थितियों में होती है, ऐसे में प्राकृतिक आपदा से किसानों की परेशानी और बढ़ गई है।
गांव का रास्ता और सिंचाई नहर क्षतिग्रस्त
भूस्खलन का असर गांव की मूलभूत सुविधाओं पर भी पड़ा है।
मलबा गिरने से गांव का संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त हो गया है। इसके कारण ग्रामीणों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इसके अलावा सिंचाई नहर को भी नुकसान पहुंचा है, जिससे किसानों के सामने खेती के लिए पानी की समस्या खड़ी हो गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क और नहर के क्षतिग्रस्त होने से गांव का तहसील और जिला मुख्यालय से संपर्क प्रभावित हो गया है।
प्रशासन से मदद की उम्मीद
ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेने की मांग की है।
उनका कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा उपाय नहीं किए गए तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
ग्रामीण चाहते हैं कि विशेषज्ञों की टीम भेजकर भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र का सर्वे कराया जाए और खतरे वाले स्थानों पर सुरक्षा इंतजाम किए जाएं।
बारिश के कारण बढ़ा खतरा
पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश के दौरान भूस्खलन की घटनाएं बढ़ जाती हैं।
बारिश के पानी से जमीन की पकड़ कमजोर हो जाती है, जिसके कारण पहाड़ों से मलबा और पत्थर गिरने लगते हैं।
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में मानसून के दौरान ऐसी घटनाएं अक्सर सामने आती हैं।
ग्रामीणों में बना हुआ है डर
लखमारा गांव के लोग फिलहाल डर के माहौल में रह रहे हैं।
उन्हें चिंता है कि अगर भूस्खलन का सिलसिला जारी रहा तो गांव के लिए बड़ा खतरा पैदा हो सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को केवल नुकसान होने के बाद नहीं, बल्कि पहले से ही एहतियाती कदम उठाने चाहिए।
जल्द कार्रवाई की मांग
लखमारा गांव के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्र में तुरंत टीम भेजी जाए और भूस्खलन रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं।
साथ ही, क्षतिग्रस्त सड़क और सिंचाई नहर की मरम्मत कर ग्रामीणों को राहत पहुंचाने की मांग की गई है।
फिलहाल ग्रामीणों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है।





