उत्तराखंड

Rishikesh: विकसित भारत के निर्माण में कौशल के साथ संस्कार की अहम भूमिका : स्वामी चिदानंद

Admindelhi1
16 July 2026 7:28 PM IST
Rishikesh: विकसित भारत के निर्माण में कौशल के साथ संस्कार की अहम भूमिका : स्वामी चिदानंद
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ऋषिकेश: परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष एवं परमार्थ पीठाधीश्वर स्वामी चिदानंद सरस्वती को भारतीय संस्कृति, योग, पर्यावरण संरक्षण तथा नदियों एवं जलस्रोतों के संरक्षण के क्षेत्र में पांच दशक से अधिक समय से किए जा रहे योगदान के लिए बुधवार काे 'आदि सनातन धर्म रत्न' सम्मान से सम्मानित किया गया।

विश्व युवा कौशल दिवस के अवसर पर परमार्थ निकेतन में आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न संतों की उपस्थिति में उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया। इस दौरान संतों ने गंगा और अन्य नदियों के संरक्षण के लिए उनके प्रयासों की सराहना की।

सम्मान प्राप्त करने के बाद स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि आज का समय केवल डिग्रियों का नहीं, बल्कि कौशल, संस्कार, संवेदनशीलता और निरंतर सीखने की क्षमता का है। उन्होंने कहा कि भारत विश्व का सबसे युवा राष्ट्र है और यदि युवाओं के हाथों में कौशल, हृदय में करुणा तथा जीवन में संस्कार होंगे, तभी विकसित भारत का सपना साकार होगा।

उन्होंने कहा कि कौशल का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्ति को आत्मनिर्भर, समाज के प्रति उत्तरदायी और मानवता की सेवा के लिए प्रेरित करना भी होना चाहिए।

स्वामी चिदानंद ने कहा कि परमार्थ निकेतन के गुरुकुलों में संस्कृत और भारतीय संस्कृति के साथ आधुनिक शिक्षा, कंप्यूटर, अंग्रेजी, संगीत और अन्य व्यावहारिक कौशल का प्रशिक्षण भी दिया जाता है, ताकि विद्यार्थियों का समग्र विकास हो सके।

उन्होंने युवाओं से पर्यावरण संरक्षण को जीवनशैली का हिस्सा बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि पौधरोपण, जल संरक्षण, प्लास्टिक के कम उपयोग और नदियों को स्वच्छ रखना भी आज के समय का महत्वपूर्ण जीवन कौशल है। उन्होंने कहा कि तकनीक का उपयोग मानवता, पर्यावरण और समाज के कल्याण के लिए होना चाहिए।

कार्यक्रम में ब्रह्मऋषि कुमार स्वामी, महंत भूपेंद्र गिरि, निरंजन स्वामी, नेपाल से आए स्वामी आनंद अरुण सहित अन्य संतों ने भी युवाओं को कौशल के साथ संस्कार अपनाने और प्रकृति संरक्षण के लिए प्रेरित किया।

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