उत्तराखंड

RIMC कैडेट ने 750 किमी की हिमालयी साइकिल यात्रा पूरी

Kavita2
6 Jun 2026 4:53 PM IST
RIMC कैडेट ने 750 किमी की हिमालयी साइकिल यात्रा पूरी
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Dehradun देहरादून : विश्व साइकिल दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज (आरआइएमसी) के कैडेट ने भारतीय सेना की प्रतिष्ठित जोरावर साइकिल रैली में हिस्सा लेकर साहस, अनुशासन और टीमवर्क का संदेश दिया। इस रैली में कैडेट ने कठिन और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच लगभग 750 किलोमीटर की हिमालयी साइकिल यात्रा सफलतापूर्वक पूरी की।

यह साहसिक साइकिल रैली पिथौरागढ़ जिले के दुर्गम क्षेत्र गुंजी से शुरू हुई थी। शुरुआत से ही कैडेट को बर्फ से ढके रास्तों, खड़ी और संकरी पहाड़ी सड़कों तथा ऊंचाई वाले दुर्गम दर्रों का सामना करना पड़ा। बदलते मौसम और कम तापमान ने इस यात्रा को और भी चुनौतीपूर्ण बना दिया, लेकिन कैडेट ने अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं हटाया।

यात्रा के दौरान कैडेट ने भारतीय सेना के अनुशासन और दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय दिया। कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने लगातार आगे बढ़ते हुए अपनी शारीरिक और मानसिक क्षमता का प्रदर्शन किया। यह रैली केवल एक खेल या साहसिक अभियान नहीं थी, बल्कि इसमें देशभक्ति, टीम भावना और आत्मविश्वास का संदेश भी निहित था।

लंबी यात्रा के दौरान कैडेट ने लिपुलेख दर्रे के रास्ते ओम पर्वत तक पहुंचकर रैली के महत्वपूर्ण चरण को पूरा किया। इस दौरान उन्हें ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी, फिसलन भरे रास्ते और तेज हवाओं जैसी कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हर चुनौती को पार किया।

सेना अधिकारियों के अनुसार, जोरावर साइकिल रैली का उद्देश्य युवाओं में साहसिक खेलों के प्रति रुचि बढ़ाना और उन्हें शारीरिक व मानसिक रूप से मजबूत बनाना है। इस प्रकार की गतिविधियां न केवल फिटनेस को बढ़ावा देती हैं, बल्कि अनुशासन और नेतृत्व क्षमता को भी विकसित करती हैं।

आरआइएमसी कैडेट की इस उपलब्धि को संस्थान और सेना दोनों के लिए गर्व का विषय माना जा रहा है। उनकी इस यात्रा ने यह साबित किया कि दृढ़ संकल्प और मेहनत के बल पर किसी भी कठिन लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

स्थानीय लोगों और सेना कर्मियों ने भी कैडेट का उत्साहवर्धन किया और उनकी इस उपलब्धि की सराहना की। पूरे अभियान के दौरान सुरक्षा और मार्गदर्शन के लिए सेना की टीम भी साथ मौजूद रही।

इस साहसिक यात्रा ने न केवल कैडेट की व्यक्तिगत क्षमता को उजागर किया, बल्कि भारतीय सेना की प्रशिक्षण प्रणाली और युवाओं को तैयार करने के प्रयासों को भी सामने लाया।

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