
ऊखीमठ (रुद्रप्रयाग): रुद्रप्रयाग जिले में स्थित भगवान शिव के प्रसिद्ध पंचकेदारों में से एक, तृतीय केदार तुंगनाथ धाम ने इस यात्रा सीजन में श्रद्धालुओं की संख्या के मामले में एक नया इतिहास रच दिया है। इस वर्ष अब तक रिकॉर्ड 1,24,676 तीर्थयात्री बाबा तुंगनाथ के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त कर चुके हैं। यह संख्या पिछले सभी वर्षों की तुलना में सर्वाधिक है, जो इस पावन धाम की बढ़ती लोकप्रियता और श्रद्धालुओं की अटूट आस्था को दर्शाती है।
तुंगनाथ धाम के प्रबंधक प्रकाश पुरोहित द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस सीजन में दर्शन करने वालों में 64,393 पुरुष, 53,290 महिलाएं, 6,765 बच्चे (नौनिहाल), 159 साधु-संत और 69 विदेशी पर्यटक शामिल हैं। इस वर्ष देश के कोने-कोने से आए श्रद्धालुओं के अलावा विदेशी पर्यटकों ने भी बड़ी संख्या में धाम में उपस्थिति दर्ज कराई।
चोपता घाटी का नैसर्गिक प्राकृतिक सौंदर्य, चारों ओर फैली हिमालय की मनोरम बर्फ़ीली चोटियाँ, शांत वातावरण और अलौकिक आध्यात्मिक अनुभूति यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित कर रही है। मंदिर समिति के प्रतिनिधि चन्द्रमोहन बजवाल ने बताया कि जो पर्यटक चोपता से सीधे चन्द्रशिला की चढ़ाई करते हैं और मंदिर परिसर में औपचारिक पंजीकरण नहीं कराते, उनका विवरण इस रिकॉर्ड में शामिल नहीं है। यदि चन्द्रशिला जाने वाले पर्यटकों की संख्या भी जोड़ ली जाए, तो क्षेत्र में पहुँचने वाले कुल लोगों का वास्तविक आंकड़ा इससे कहीं अधिक होगा।
श्रद्धालुओं और पर्यटकों की इस रिकॉर्ड आवक से क्षेत्र की स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी भारी संबल मिला है। चोपता, बणियाकुंड, दुगलबिट्टा और आसपास के क्षेत्रों में संचालित होटल, होमस्टे, ढाबे, भोजनालय, टैक्सी संचालक, घोड़ा-खच्चर व्यवसायी तथा स्थानीय दुकानदारों का व्यापार इस वर्ष बेहद शानदार रहा है।
जिला पंचायत सदस्य प्रीति पुष्वाण ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि श्रद्धालुओं का यह नया रिकॉर्ड इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि तुंगनाथ धाम देश और दुनिया के प्रमुख आस्था केंद्रों में तेज़ी से अपनी विशिष्ट पहचान मजबूत कर रहा है। उन्होंने कहा कि यात्रा अभी भी सुचारू रूप से जारी है और यदि आने वाले दिनों में मौसम अनुकूल रहता है, तो दर्शनार्थियों का यह आंकड़ा और अधिक ऊँचाइयों को छुएगा। इससे न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय युवाओं और व्यापारियों की आजीविका को भी दीर्घकालिक मजबूती मिलेगी।





