उत्तराखंड

उत्तराखंड में बारिश का कहर, 140 सड़कें बंद; चारधाम यात्रा रुकी

Kavita2
29 July 2026 9:57 AM IST
उत्तराखंड में बारिश का कहर, 140 सड़कें बंद; चारधाम यात्रा रुकी
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देहरादून। उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश और भूस्खलन ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। प्रदेश के कई हिस्सों में मूसलाधार बारिश के कारण सड़कें बाधित हो गई हैं। तीन नेशनल हाईवे समेत 140 से अधिक सड़कें बंद होने से लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है। बिगड़ते मौसम और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने चारधाम यात्रा को दो दिनों के लिए स्थगित कर दिया है।

प्रशासन के आदेश के अनुसार, 28 और 29 जुलाई को चारधाम यात्रा पर रोक लगाई गई है। अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और मौसम की स्थिति को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। मौसम में सुधार और मार्गों की स्थिति सामान्य होने के बाद ही यात्रा को दोबारा शुरू करने पर फैसला लिया जाएगा।

देर रात से शुरू हुई भारी बारिश

उत्तराखंड के कई जिलों में सोमवार देर रात से ही तेज बारिश का सिलसिला शुरू हो गया था। मंगलवार सुबह तक बारिश ने कई क्षेत्रों में परेशानी बढ़ा दी। पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश के कारण जगह-जगह भूस्खलन की घटनाएं सामने आईं, जिससे सड़क मार्ग बाधित हो गए।

कई स्थानों पर पहाड़ों से मलबा और पत्थर गिरने के कारण यातायात रोकना पड़ा। प्रशासन और सड़क विभाग की टीमें मौके पर पहुंचकर मलबा हटाने और मार्गों को खोलने के प्रयास में जुटी रहीं।

तीन नेशनल हाईवे सहित 140 से ज्यादा सड़कें प्रभावित

भारी बारिश का सबसे ज्यादा असर पर्वतीय क्षेत्रों की सड़कों पर पड़ा है। राज्य में तीन नेशनल हाईवे समेत 140 से अधिक सड़कें बंद हो गई हैं। सड़कें बंद होने से कई गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ है और यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है। जेसीबी और अन्य मशीनों की मदद से बंद रास्तों को खोलने का काम लगातार जारी है। हालांकि, लगातार बारिश के कारण राहत और बहाली कार्यों में भी दिक्कतें आ रही हैं।

चारधाम यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता

चारधाम यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंचते हैं। बारिश और भूस्खलन के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने यात्रा रोकने का फैसला लिया है। अधिकारियों ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे मौसम की स्थिति को देखते हुए यात्रा की योजना बनाएं और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।

यात्रा मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। पुलिस, प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमें लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रुकने और मौसम सामान्य होने तक धैर्य रखने की सलाह दी गई है।

मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट

मौसम विभाग ने उत्तराखंड में 29 और 30 जुलाई के लिए भी भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। विभाग ने कई जिलों में तेज बारिश की संभावना जताई है। इसके चलते प्रशासन ने सभी जिलों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।

विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और यात्रियों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। बारिश के दौरान भूस्खलन और अचानक सड़क बंद होने जैसी घटनाओं की आशंका बनी रहती है।

आपदा प्रबंधन विभाग सक्रिय

राज्य आपदा प्रबंधन विभाग और जिला प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं। संवेदनशील इलाकों में राहत और बचाव टीमों को अलर्ट पर रखा गया है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयारियां की गई हैं।

प्रशासन का कहना है कि बारिश के दौरान लोगों की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। सड़क खोलने, फंसे लोगों की मदद करने और प्रभावित क्षेत्रों तक आवश्यक सेवाएं पहुंचाने के प्रयास जारी हैं।

पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़ी चुनौती

उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में मानसून के दौरान भूस्खलन और सड़क बंद होने की घटनाएं आम चुनौती बन जाती हैं। पहाड़ों की कमजोर भू-स्थिति और लगातार बारिश के कारण कई बार बड़े स्तर पर नुकसान की स्थिति पैदा हो जाती है।

इस बार भी लगातार बारिश के कारण कई क्षेत्रों में हालात खराब हुए हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदी-नालों, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और बंद सड़कों के आसपास जाने से बचें।

हालात पर नजर, सुधार के बाद खुलेगी यात्रा

फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता बंद सड़कों को खोलना और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। मौसम विभाग के अलर्ट को देखते हुए आने वाले दिनों में भी सतर्कता बरती जाएगी।

चारधाम यात्रा पर लगी अस्थायी रोक श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लगाई गई है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि मौसम की स्थिति और यात्रा मार्गों की स्थिति की समीक्षा के बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा।

उत्तराखंड में बारिश और भूस्खलन से पैदा हुए हालात ने एक बार फिर मानसून के दौरान पर्वतीय क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन की चुनौतियों को सामने ला दिया है।

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