
देहरादून: उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद अब दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया तेज हो गई है। निर्वाचन विभाग ने इस प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए एक व्यक्ति अधिकतम पांच मतदाताओं के संबंध में ही फॉर्म-7 के माध्यम से आवेदन कर सकेगा। यदि किसी व्यक्ति की ओर से पांच से अधिक नाम हटाने के लिए आवेदन किया जाता है तो ऐसे मामलों की विशेष जांच कराई जाएगी।
निर्वाचन विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई व्यक्ति व्यक्तिगत विवाद या अन्य कारणों से किसी पूरे परिवार या बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आवेदन न कर सके।
नाम हटाने की प्रक्रिया में रखी जाएगी निगरानी
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान नाम जोड़ने, हटाने या संशोधन से जुड़े दावों और आपत्तियों की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार की जा रही है। मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखना निर्वाचन विभाग की प्राथमिकता है।
फॉर्म-7 का उपयोग मतदाता सूची से किसी नाम को हटाने के लिए किया जाता है। हालांकि, कई बार इस प्रक्रिया के दुरुपयोग की आशंका रहती है। इसी को ध्यान में रखते हुए आवेदन की संख्या पर सीमा तय की गई है।
अधिकारियों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आवेदन करता है तो यह जांच का विषय होगा कि इसके पीछे वास्तविक कारण क्या है।
पांच से अधिक नामों पर होगी व्यक्तिगत जांच
निर्वाचन विभाग के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति पांच से अधिक मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आवेदन करता है तो संबंधित निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) मामले की व्यक्तिगत जांच कराएंगे।
जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि जिन मतदाताओं के नाम हटाने का अनुरोध किया गया है, वे वास्तव में सूची में बने रहने के पात्र हैं या नहीं। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी योग्य मतदाता का नाम गलत तरीके से सूची से हटाया न जाए।
अधिकारियों का कहना है कि मतदाता सूची लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसलिए इसमें किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
पूरे परिवार का नाम हटाने के प्रयास पर रोक
निर्वाचन विभाग ने यह कदम इसलिए उठाया है ताकि कोई व्यक्ति एक ही आवेदन के माध्यम से किसी परिवार या समूह के नाम हटाने का प्रयास न कर सके।
कई बार मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए सामूहिक आवेदन किए जाते हैं। ऐसे मामलों में यह जरूरी है कि प्रत्येक मतदाता की पात्रता और स्थिति की अलग-अलग जांच हो।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि प्रक्रिया का उद्देश्य किसी भी वास्तविक मतदाता को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि मतदाता सूची को अधिक सटीक और त्रुटिरहित बनाना है।
एसआईआर के तहत हो रहा मतदाता सूची का पुनरीक्षण
उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत मतदाता सूची की समीक्षा की जा रही है। इस प्रक्रिया में पुराने रिकॉर्ड की जांच, नए मतदाताओं का पंजीकरण और अपात्र नामों को हटाने की कार्रवाई शामिल है।
ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद अब आम नागरिकों को अपने नाम की जांच करने और जरूरत पड़ने पर दावा या आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया जा रहा है।
निर्वाचन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे समय सीमा के भीतर अपने दावे और आपत्तियां दर्ज कराएं, ताकि अंतिम मतदाता सूची तैयार करते समय सभी जरूरी सुधार किए जा सकें।
पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया पर जोर
मतदाता सूची में सही और योग्य मतदाताओं के नाम शामिल होना स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए बेहद जरूरी है। गलत नामों को हटाना और नए पात्र मतदाताओं को शामिल करना निर्वाचन प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
निर्वाचन विभाग का कहना है कि एसआईआर प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता के साथ पूरा किया जा रहा है। किसी भी शिकायत या आपत्ति पर नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
अंतिम सूची से पहले होगी पूरी समीक्षा
ड्राफ्ट सूची पर प्राप्त दावे और आपत्तियों के निपटारे के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी। इस दौरान निर्वाचन अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलती से न हटे और अपात्र नामों को सूची से बाहर किया जा सके।
उत्तराखंड में एसआईआर के तहत शुरू हुई यह प्रक्रिया अब महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है। पांच नामों की सीमा और अधिक आवेदनों की जांच जैसी व्यवस्था से मतदाता सूची में पारदर्शिता बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।





