उत्तराखंड

एक सितंबर से तीन शहरों और 131 गांवों की जनगणना की तैयारी

Kavita2
9 Aug 2026 5:38 PM IST
एक सितंबर से तीन शहरों और 131 गांवों की जनगणना की तैयारी
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देहरादून। जनगणना निदेशालय ने आगामी जनगणना को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। एक सितंबर से हिमाच्छादित तीन शहरों और 131 गांवों में जनगणना संबंधी प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी है। इसके साथ ही सामान्य जनगणना के लिए भी विभागीय स्तर पर काम शुरू किया जा रहा है। दिसंबर में संभावित जनगणना कार्यक्रम को देखते हुए अधिकारियों ने प्रारंभिक तैयारियों को गति दे दी है।

जनगणना से पहले की जाने वाली तैयारियों में भवन गणना के आंकड़ों का परीक्षण, प्रशासनिक सीमाओं का निर्धारण, ब्लाकों का पुनर्गठन और नजरी नक्शे तैयार करना प्रमुख है। हाल में पूरी की गई भवन गणना से सामने आए आंकड़ों के आधार पर इस बार जनगणना ब्लाकों की संख्या बढ़ना लगभग तय माना जा रहा है। ऐसे में विभाग अब नए ब्लाकों के गठन और उनके भौगोलिक क्षेत्र को चिह्नित करने की प्रक्रिया में जुट गया है।

तीन शहरों और 131 गांवों से होगी शुरुआत

जनगणना निदेशालय की योजना के अनुसार एक सितंबर से हिमाच्छादित क्षेत्रों में स्थित तीन शहरों और 131 गांवों में जनगणना से जुड़ी प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इन क्षेत्रों में भौगोलिक और मौसम संबंधी परिस्थितियां सामान्य क्षेत्रों से अलग होती हैं। ऐसे में यहां जनगणना की तैयारियां पहले से करना जरूरी माना जाता है।

हिमाच्छादित इलाकों में कई स्थानों पर सर्दियों के दौरान आवागमन प्रभावित रहता है। भारी बर्फबारी के कारण कई गांवों और बस्तियों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसलिए संबंधित क्षेत्रों की जानकारी पहले से जुटाने और जनगणना कर्मियों के लिए कार्यक्षेत्र निर्धारित करने पर जोर दिया जा रहा है।

दिसंबर में संभावित सामान्य जनगणना

विभागीय स्तर पर दिसंबर में सामान्य जनगणना कार्यक्रम शुरू होने की संभावना को देखते हुए तैयारियां की जा रही हैं। हालांकि अंतिम कार्यक्रम और तिथियों की आधिकारिक घोषणा संबंधित स्तर से होने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।

जनगणना देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रक्रियाओं में से एक है। इससे जनसंख्या, परिवारों, आवास और विभिन्न सामाजिक-आर्थिक पहलुओं से संबंधित आंकड़े जुटाए जाते हैं। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर सरकार की कई योजनाओं और नीतियों के लिए आधार तैयार होता है।

भवन गणना के आंकड़ों से बढ़ेंगे ब्लाक

जनगणना से पहले भवनों और घरों से संबंधित जानकारी जुटाने का काम महत्वपूर्ण चरण होता है। विभाग की ओर से की गई भवन गणना के बाद जो आंकड़े सामने आए हैं, उनके आधार पर जनगणना ब्लाकों की संख्या बढ़ने की संभावना है।

जनगणना के दौरान प्रत्येक क्षेत्र को छोटे-छोटे ब्लाकों में बांटा जाता है, ताकि गणनाकर्मी निर्धारित क्षेत्र में रहने वाले प्रत्येक परिवार और व्यक्ति तक पहुंच सकें। आबादी और भवनों की संख्या बढ़ने के कारण पुराने ब्लाकों को नए सिरे से व्यवस्थित करने की आवश्यकता पड़ सकती है।

इसी वजह से विभाग अब ब्लाकों की संख्या और उनकी सीमाओं का प्रारंभिक निर्धारण करने में जुट गया है। नए ब्लाक बनने से जनगणना कार्य को व्यवस्थित ढंग से पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

नजरी नक्शे तैयार करने की प्रक्रिया शुरू

ब्लाकों के पुनर्गठन के साथ ही नजरी नक्शे तैयार करने की कवायद भी शुरू की जा रही है। नजरी नक्शों के माध्यम से संबंधित क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, सड़क, बस्ती, गांव और अन्य प्रमुख स्थानों की जानकारी को चिन्हित किया जाता है।

जनगणना कर्मियों के लिए ये नक्शे बेहद उपयोगी होते हैं। इससे उन्हें अपने निर्धारित क्षेत्र की सीमा समझने और प्रत्येक घर तक पहुंचने में सुविधा मिलती है। खासकर पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में नजरी नक्शों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।

विभाग की कोशिश है कि जनगणना शुरू होने से पहले सभी ब्लाकों और उनके नक्शों का काम पूरा कर लिया जाए, ताकि मौके पर किसी तरह की भ्रम की स्थिति न बने।

बढ़ती आबादी के साथ बढ़ी जिम्मेदारी

समय के साथ शहरों और गांवों में आबादी तथा आवासीय क्षेत्रों का विस्तार हुआ है। नई बस्तियां विकसित हुई हैं और कई पुराने क्षेत्रों में भवनों की संख्या भी बढ़ी है। ऐसे में पिछली जनगणना के आधार पर बनाए गए ब्लाक मौजूदा परिस्थितियों के लिए पर्याप्त नहीं हो सकते हैं।

भवन गणना से सामने आए आंकड़े इसी बदलाव की तस्वीर पेश करते हैं। नए आंकड़ों के आधार पर ब्लाकों का पुनर्गठन करने से जनगणना के दौरान किसी घर या क्षेत्र के छूटने की संभावना कम की जा सकेगी।

कर्मचारियों और संसाधनों की भी होगी तैयारी

ब्लाकों की संख्या बढ़ने के साथ जनगणना कार्य के लिए कर्मचारियों और अन्य संसाधनों की आवश्यकता भी बढ़ सकती है। विभाग को इसके लिए गणनाकर्मियों की तैनाती, प्रशिक्षण, दस्तावेज और अन्य व्यवस्थाओं पर भी काम करना होगा।

पहाड़ी और हिमाच्छादित क्षेत्रों के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार करने की आवश्यकता होगी। दुर्गम क्षेत्रों में पहुंच, मौसम की स्थिति और संचार सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए जनगणना कर्मियों के लिए व्यवस्था की जाएगी।

जनगणना के आंकड़ों का व्यापक महत्व

जनगणना से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग केवल जनसंख्या की गणना तक सीमित नहीं रहता। सरकार इन आंकड़ों का इस्तेमाल शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, सड़क, पेयजल, रोजगार और अन्य बुनियादी सुविधाओं से संबंधित योजनाएं तैयार करने में करती है।

इसी कारण जनगणना की प्रक्रिया में आंकड़ों की शुद्धता और पारदर्शिता बेहद महत्वपूर्ण होती है। एक सितंबर से हिमाच्छादित क्षेत्रों में शुरू होने वाली तैयारियां इसी व्यापक प्रक्रिया का शुरुआती चरण मानी जा रही हैं।

फिलहाल जनगणना निदेशालय ने दिसंबर में संभावित सामान्य जनगणना को ध्यान में रखते हुए अपनी तैयारियों को तेज कर दिया है। भवन गणना के आंकड़ों के आधार पर नए जनगणना ब्लाक तैयार किए जाएंगे और उनके नजरी नक्शे बनाए जाएंगे। आने वाले समय में कर्मचारियों की तैनाती और प्रशिक्षण समेत अन्य तैयारियों को भी अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है।

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