उत्तराखंड

उत्तराखंड में मिशन-2027 की तैयारी तेज, बड़े फैसलों के साथ डैमेज कंट्रोल पर भाजपा का फोकस

Kavita2
25 Sept 2026 9:59 AM IST
उत्तराखंड में मिशन-2027 की तैयारी तेज, बड़े फैसलों के साथ डैमेज कंट्रोल पर भाजपा का फोकस
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देहरादून। उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी अब राजनीतिक भाषणों और संगठनात्मक बैठकों से आगे बढ़कर सरकार के फैसलों, जनसंपर्क और असंतोष वाले मुद्दों के समाधान तक पहुंचती दिखाई दे रही है। पिछले कुछ हफ्तों के घटनाक्रम को देखें तो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार ने कई संवेदनशील मामलों में तत्काल कार्रवाई की है, जबकि भाजपा संगठन ने राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के हल्द्वानी दौरे के बाद बूथ स्तर तक चुनावी तैयारियों को तेज करने की रणनीति बनाई है।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के 9 और 10 सितंबर के हल्द्वानी दौरे को मिशन-2027 के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हल्द्वानी में हुई विस्तारित प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में विकास, सुशासन और सामाजिक समरसता को आगामी विधानसभा चुनाव के प्रमुख मुद्दों के रूप में सामने रखा गया। बैठक में ‘विकसित उत्तराखंड से विकसित भारत’ के संकल्प से जुड़ा प्रस्ताव भी पारित किया गया।

नितिन नवीन ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने का संदेश दिया। भाजपा के सामने 2022 के विधानसभा चुनाव में जीती सीटों को बरकरार रखने के साथ उन क्षेत्रों में स्थिति मजबूत करने की चुनौती है, जहां पार्टी को हार मिली थी। पार्टी स्तर पर 47 जीती हुई सीटों को सुरक्षित रखने और 23 हारी सीटों पर संगठनात्मक स्थिति मजबूत करने को लेकर चर्चा हुई है।

कुमाऊं क्षेत्र पर पार्टी का विशेष ध्यान दिखाई दे रहा है। हल्द्वानी में हुई बैठकों के दौरान उन विधानसभा सीटों की स्थिति पर मंथन किया गया, जहां 2022 में भाजपा को हार मिली थी या जीत का अंतर अपेक्षाकृत कम रहा था। संगठन से जुड़े पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से स्थानीय स्तर की जानकारी लेने और उसके आधार पर आगे की रणनीति तैयार करने की बात सामने आई है।

भाजपा की चुनावी तैयारी में केवल संगठनात्मक मजबूती ही नहीं बल्कि अलग-अलग सामाजिक समूहों तक पहुंच बढ़ाना भी शामिल है। युवा, महिला, दलित, पूर्व सैनिक और अन्य वर्गों के साथ संवाद बढ़ाने पर जोर दिया गया है। नितिन नवीन और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हल्द्वानी में युवाओं से संवाद के दौरान रोजगार, स्वरोजगार, कौशल विकास, तकनीक, खेल और उत्तराखंड के भविष्य जैसे मुद्दों पर चर्चा की।

इसी के समानांतर धामी सरकार के हालिया फैसलों को भी चुनाव से पहले प्रशासनिक सक्रियता के तौर पर देखा जा रहा है। मेडिकल कॉलेजों में फर्जी आरक्षण और अन्य प्रमाणपत्रों के जरिए दाखिले के आरोप सामने आने के बाद मुख्यमंत्री धामी ने जांच के निर्देश दिए। जांच में आठ अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र निरस्त किए जाने और उनके दाखिले रद्द किए जाने की जानकारी सामने आई। सरकार ने जांच का दायरा अन्य आरक्षित श्रेणियों तक बढ़ाने के निर्देश भी दिए हैं।

भाजपा संगठन के लिए चुनौती यह भी है कि सरकार से जुड़े फैसलों और योजनाओं की जानकारी जमीन तक पहुंचे। हल्द्वानी की बैठक में सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय तथा कार्यकर्ताओं के माध्यम से योजनाओं और उपलब्धियों को लोगों तक पहुंचाने पर जोर दिया गया। पार्टी विकास और सुशासन को चुनावी अभियान के प्रमुख आधार के रूप में प्रस्तुत करने की तैयारी में है।

उत्तराखंड की राजनीति में स्थानीय और क्षेत्रीय मुद्दों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। पहाड़ से पलायन, रोजगार, सरकारी भर्ती, सड़क और स्वास्थ्य सुविधाएं, आपदा प्रबंधन, पर्यटन और भू-कानून जैसे विषय समय-समय पर राजनीतिक बहस के केंद्र में रहे हैं। ऐसे में भाजपा की रणनीति केवल राज्यस्तरीय संदेश तक सीमित रखने के बजाय विधानसभा और बूथ स्तर की परिस्थितियों के अनुसार चुनावी तैयारी करने की दिखाई दे रही है।

पार्टी की प्रदेश कार्यसमिति में सांस्कृतिक और सामाजिक मुद्दों को भी चुनावी विमर्श का हिस्सा बनाने के संकेत मिले हैं। समान नागरिक संहिता, धर्मांतरण विरोधी कानून और अतिक्रमण के खिलाफ सरकारी कार्रवाई जैसे विषय बैठक में चर्चा के केंद्र में रहे। भाजपा इन कदमों को अपने शासन के रिकॉर्ड के हिस्से के रूप में सामने रख रही है, जबकि इनसे जुड़े कुछ मुद्दों पर विपक्ष की अलग राजनीतिक स्थिति और आलोचनाएं रही हैं।

नितिन नवीन के हल्द्वानी दौरे के बाद भाजपा ने हारी हुई सीटों, कमजोर बूथों और अलग-अलग सामाजिक समूहों पर केंद्रित माइक्रो प्लानिंग के संकेत दिए हैं। पार्टी के सामने उत्तराखंड में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने का लक्ष्य है। भाजपा नेताओं ने इसे सार्वजनिक रूप से अपना राजनीतिक लक्ष्य बताया है और कार्यकर्ताओं से बूथ स्तर पर सक्रियता बढ़ाने को कहा है।

दूसरी ओर कांग्रेस भी सरकार को रोजगार, भर्ती, कानून-व्यवस्था, विकास और विभिन्न स्थानीय मुद्दों पर घेरने की कोशिश कर रही है। ऐसे में आने वाले महीनों में सरकार के फैसलों और विपक्ष की ओर से उठाए जाने वाले मुद्दों के बीच राजनीतिक मुकाबला और तेज होने की संभावना है। दोनों दलों के दावे और आरोप चुनावी राजनीति का हिस्सा हैं और इनके प्रभाव का अंतिम आकलन मतदाताओं के फैसले से होगा।

फिलहाल उत्तराखंड में भाजपा की रणनीति के दो पहलू साफ दिखाई देते हैं। पहला, सरकार के स्तर पर विवाद या असंतोष पैदा करने वाले मामलों में तेजी से निर्णय और प्रशासनिक कार्रवाई; दूसरा, संगठन के स्तर पर बूथों को मजबूत करने, कमजोर विधानसभा क्षेत्रों की पहचान करने और विभिन्न सामाजिक समूहों से सीधा संपर्क बढ़ाने की कवायद। हल्द्वानी की बैठक के बाद मिशन-2027 के लिए विकास, सुशासन, सामाजिक संपर्क और बूथ प्रबंधन को पार्टी ने अपने अभियान के प्रमुख हिस्सों के रूप में सामने रखा है।

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