
देहरादून। जल विद्युत और थर्मल पावर उत्पादन प्रभावित होने का सीधा असर उत्तराखंड की बिजली आपूर्ति पर पड़ रहा है। प्रदेश में बिजली की उपलब्धता और मांग के बीच अंतर बढ़ने से कई शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में कटौती की जा रही है। मौजूदा परिस्थितियों में देहरादून, हरिद्वार और नैनीताल को छोड़कर प्रदेश के अन्य शहरों और गांवों को करीब एक सप्ताह और बिजली कटौती का सामना करना पड़ सकता है।
बिजली संकट के पीछे जल विद्युत परियोजनाओं के उत्पादन में आई कमी के साथ थर्मल पावर की उपलब्धता प्रभावित होना प्रमुख कारण बताया जा रहा है। उत्तराखंड अपनी बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए जल विद्युत उत्पादन के साथ दूसरे स्रोतों से मिलने वाली बिजली पर निर्भर रहता है। दोनों स्तर पर उत्पादन प्रभावित होने के कारण ऊर्जा की उपलब्धता कम हुई है।
प्रदेश में बिजली की मांग पूरी करने के लिए ऊर्जा निगम को उपलब्ध बिजली का संतुलित वितरण करना पड़ रहा है। ऐसे में कई क्षेत्रों में निर्धारित या आवश्यकता के अनुसार बिजली कटौती की जा रही है। सबसे अधिक असर उन इलाकों में देखने को मिल रहा है, जिन्हें निर्बाध आपूर्ति की प्राथमिक श्रेणी में नहीं रखा गया है।
तीन शहरों को फिलहाल राहत
बिजली संकट के बीच देहरादून, हरिद्वार और नैनीताल को कटौती से राहत दिए जाने की बात सामने आई है। इन तीनों शहरों को छोड़कर अन्य शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में आपूर्ति प्रभावित रहने की संभावना है।
राजधानी देहरादून प्रशासनिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है। हरिद्वार में धार्मिक और पर्यटन गतिविधियों के कारण बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही बनी रहती है, जबकि नैनीताल राज्य का प्रमुख पर्यटन शहर है। इन क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति सामान्य बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है।
दूसरी ओर प्रदेश के बाकी शहरों, कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की उपलब्धता के आधार पर कटौती जारी रह सकती है। आने वाले करीब सात दिनों तक स्थिति में तत्काल बड़ी राहत मिलने की संभावना कम बताई जा रही है।
जल विद्युत उत्पादन पर पड़ा असर
उत्तराखंड में बिजली उत्पादन का बड़ा हिस्सा जल विद्युत परियोजनाओं से जुड़ा है। नदियों में पानी की उपलब्धता और परियोजनाओं की परिचालन स्थिति सीधे बिजली उत्पादन को प्रभावित करती है। जल विद्युत परियोजनाओं से अपेक्षित बिजली नहीं मिलने पर राज्य को दूसरे स्रोतों से अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था करनी पड़ती है।
इस समय जल विद्युत उत्पादन में बाधा आने से प्रदेश के पास उपलब्ध बिजली कम हुई है। इसके साथ ही थर्मल पावर उत्पादन से मिलने वाली बिजली भी प्रभावित हुई है। दोनों स्रोतों से पर्याप्त बिजली नहीं मिलने का असर वितरण व्यवस्था पर दिखाई दे रहा है।
गांवों और छोटे शहरों पर ज्यादा असर
बिजली कटौती का सबसे अधिक प्रभाव ग्रामीण इलाकों और छोटे शहरों में महसूस किया जा सकता है। लंबे समय तक बिजली बंद रहने से घरेलू उपभोक्ताओं के साथ छोटे व्यापारियों और दुकानदारों को भी परेशानी होती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति प्रभावित होने से पेयजल व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है। कई इलाकों में पानी की आपूर्ति बिजली से चलने वाले पंपों पर निर्भर होती है। इसी तरह छोटे उद्योगों, वर्कशॉप, दुकानों और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए भी नियमित बिजली आपूर्ति जरूरी होती है।
छात्रों और घर से काम करने वाले लोगों के लिए भी कटौती परेशानी का कारण बन सकती है। मोबाइल, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण चार्ज करने से लेकर इंटरनेट सेवाओं तक पर लंबे पावर कट का प्रभाव पड़ता है।
मांग और उपलब्धता में अंतर चुनौती
बिजली आपूर्ति व्यवस्था में मांग और उपलब्धता का संतुलन बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण होता है। जब राज्य में बिजली की मांग उपलब्ध आपूर्ति से अधिक हो जाती है तो ग्रिड पर अतिरिक्त दबाव से बचने के लिए नियंत्रित कटौती करनी पड़ सकती है।
उत्तराखंड में मौजूदा संकट के दौरान भी बिजली की उपलब्धता के आधार पर अलग-अलग क्षेत्रों में आपूर्ति प्रबंधन किया जा रहा है। ऊर्जा निगम के लिए चुनौती यह है कि आवश्यक सेवाओं को बिजली उपलब्ध कराते हुए घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं की जरूरत भी यथासंभव पूरी की जाए।
अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था पर नजर
बिजली की कमी होने पर खुले बाजार या अन्य स्रोतों से अतिरिक्त बिजली खरीदना एक विकल्प होता है। हालांकि बाजार में बिजली की उपलब्धता और कीमत के आधार पर ही यह व्यवस्था संभव हो पाती है। यदि दूसरे राज्यों में भी मांग अधिक हो तो बाजार से पर्याप्त बिजली जुटाना मुश्किल हो सकता है।
ऐसे में ऊर्जा निगम को उपलब्ध बिजली के अनुसार सप्लाई का प्रबंधन करना पड़ता है। जल विद्युत और थर्मल उत्पादन सामान्य होने के बाद ही प्रदेश में बिजली आपूर्ति की स्थिति में स्थायी सुधार की उम्मीद की जा सकती है।
एक सप्ताह तक बनी रह सकती है परेशानी
फिलहाल संकेत यही हैं कि देहरादून, हरिद्वार और नैनीताल को छोड़कर उत्तराखंड के दूसरे हिस्सों में करीब एक सप्ताह तक बिजली कटौती जारी रह सकती है। हालांकि वास्तविक अवधि बिजली उत्पादन और उपलब्धता की स्थिति पर निर्भर करेगी। यदि उत्पादन जल्दी सामान्य होता है तो कटौती में पहले भी राहत मिल सकती है।
इस दौरान उपभोक्ताओं को बिजली का जरूरत के अनुसार इस्तेमाल करने और अनावश्यक खपत कम रखने की सलाह दी जा सकती है। खासतौर पर बिजली की अधिक मांग वाले समय में खपत कम करने से आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव घटाने में मदद मिलती है।
उत्तराखंड में जल विद्युत और थर्मल पावर उत्पादन सामान्य होने तक बिजली संकट से पूरी तरह राहत मिलने की संभावना कम है। फिलहाल प्रदेश के बड़े हिस्से में उपभोक्ताओं को बिजली कटौती का सामना करना पड़ेगा और आने वाला एक सप्ताह आपूर्ति व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेगा।





