उत्तराखंड

उत्तराखंड कांग्रेस में बढ़ा सियासी घमासान, हरीश रावत का छलका दर्द

Kavita2
8 Oct 2026 9:46 AM IST
उत्तराखंड कांग्रेस में बढ़ा सियासी घमासान, हरीश रावत का छलका दर्द
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देहरादून। उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस के भीतर राजनीतिक खींचतान तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत की व्यक्तिगत जनसंवाद यात्रा को लेकर पार्टी नेतृत्व और उनके बीच मतभेद सामने आए हैं। कांग्रेस आलाकमान की आपत्ति के बावजूद यात्रा निकालने वाले हरीश रावत को अपना पक्ष रखने के लिए दिल्ली जाना था, लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से उनकी प्रस्तावित मुलाकात नहीं हो सकी। इसी बीच उन्होंने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट साझा कर अपनी करीब 60 साल की राजनीतिक यात्रा का जिक्र किया। रावत ने कहा कि इतने लंबे राजनीतिक जीवन में उनसे कभी स्पष्टीकरण नहीं मांगा गया, लेकिन अब ऐसा अवसर भी आ गया है। उनके इस बयान के बाद उत्तराखंड कांग्रेस में चल रही अंदरूनी खींचतान फिर चर्चा का विषय बन गई है।

60 साल की राजनीति में पहली बार स्पष्टीकरण देने की नौबत

हरीश रावत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी राजनीतिक यात्रा और कांग्रेस के साथ पुराने संबंधों को लेकर विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि अक्टूबर महीने में कांग्रेस से उनके जुड़ाव के 60 वर्ष पूरे हो रहे हैं। वहीं 14 अक्टूबर को पार्टी की औपचारिक सदस्यता के 58 साल पूरे होंगे।

रावत ने बताया कि इतने लंबे राजनीतिक जीवन में उनसे कई गलतियां भी हुई होंगी, लेकिन पार्टी ने पहले कभी उनसे जवाब नहीं मांगा। उन्होंने कहा कि पहले किसी विषय पर सवाल उठने पर पार्टी नेतृत्व सामान्य बातचीत के माध्यम से उनकी बात सुन लेता था।

पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि इस बार उन्हें सोशल मीडिया के माध्यम से स्पष्टीकरण मांगे जाने की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने स्वयं पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मिलने का समय मांगा।

रावत ने इस स्थिति को अपने लंबे राजनीतिक जीवन का एक नया अनुभव बताया।

कांग्रेस हाईकमान से नहीं हो सकी मुलाकात

हरीश रावत को अपनी यात्रा से जुड़े विवाद पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के सामने पक्ष रखना था। इसके लिए सात अक्टूबर को पार्टी की उत्तराखंड प्रभारी कुमारी सैलजा से मुलाकात की चर्चा थी।

हालांकि, निर्धारित दिन उनकी मुलाकात नहीं हो सकी। रिपोर्ट के अनुसार, रावत सात अक्टूबर को दिल्ली नहीं पहुंच पाए थे और उन्होंने इस संबंध में कुमारी सैलजा को जानकारी दे दी थी।

इससे पहले उन्होंने कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल से मुलाकात कर अपनी यात्रा के संबंध में पक्ष रखा था।

कुमारी सैलजा से प्रस्तावित मुलाकात टलने के बाद अब पार्टी नेतृत्व और हरीश रावत के बीच बातचीत को लेकर नई तारीख की प्रतीक्षा है। इस मामले में कांग्रेस की ओर से किसी अनुशासनात्मक कार्रवाई की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

जनसंवाद यात्रा को लेकर शुरू हुआ विवाद

उत्तराखंड कांग्रेस में यह विवाद हरीश रावत की 'धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा' को लेकर शुरू हुआ। रावत ने ऊधमसिंह नगर जिले के जसपुर से हल्द्वानी तक इस यात्रा का कार्यक्रम तैयार किया था।

कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने उन्हें अलग से राजनीतिक अभियान चलाने के बजाय पार्टी के सामूहिक कार्यक्रमों में भाग लेने की सलाह दी थी।

इसके बावजूद हरीश रावत ने पांच अक्टूबर को जसपुर से अपनी यात्रा शुरू कर दी। यात्रा के दौरान उन्होंने लोगों से मुलाकात की और विभिन्न क्षेत्रों में जनसंवाद किया।

पार्टी नेतृत्व की आपत्ति के बावजूद कार्यक्रम आयोजित किए जाने के बाद कांग्रेस के भीतर मतभेद सार्वजनिक हो गए।

हाईकमान ने सामूहिक कार्यक्रमों पर दिया जोर

कांग्रेस नेतृत्व का कहना है कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सभी वरिष्ठ नेताओं को एकजुट होकर पार्टी के कार्यक्रमों में शामिल होना चाहिए।

पार्टी की ओर से हरीश रावत को व्यक्तिगत स्तर पर यात्रा निकालने के बजाय संगठन के तय कार्यक्रमों को प्राथमिकता देने के लिए कहा गया था।

कांग्रेस नेतृत्व चुनावी तैयारियों में सामूहिक रणनीति और संगठनात्मक समन्वय को महत्वपूर्ण मान रहा है।

दूसरी ओर हरीश रावत अपनी जनसंवाद यात्रा को जनता से संपर्क स्थापित करने और कार्यकर्ताओं से बातचीत करने का माध्यम बता रहे हैं।

इसी मुद्दे पर पार्टी नेतृत्व और पूर्व मुख्यमंत्री के बीच मतभेद सामने आए हैं।

यात्रा में वरिष्ठ नेताओं की गैरमौजूदगी भी चर्चा में

हरीश रावत की जनसंवाद यात्रा के दौरान उत्तराखंड कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं की गैरमौजूदगी भी चर्चा का विषय बनी रही।

रिपोर्टों के अनुसार, पार्टी के दो प्रमुख नेताओं ने इस कार्यक्रम से दूरी बनाए रखी। इसके बाद कांग्रेस के भीतर अलग-अलग राजनीतिक रुख को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं।

हालांकि, किसी नेता की यात्रा में अनुपस्थिति को पार्टी से नाराजगी या गुटबाजी का निश्चित प्रमाण नहीं माना जा सकता।

फिलहाल कांग्रेस नेतृत्व ने आगामी चुनाव की तैयारियों में सभी नेताओं को साथ लेकर चलने और संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने पर जोर दिया है।

हरीश रावत का कांग्रेस से छह दशक पुराना संबंध

हरीश रावत उत्तराखंड कांग्रेस के प्रमुख वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं। वह राज्य के मुख्यमंत्री रहने के साथ केंद्र सरकार में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं।

उनका राजनीतिक जीवन कांग्रेस संगठन से जुड़ा रहा है। रावत ने अपने हालिया बयान में भी पार्टी के साथ लंबे संबंधों को प्रमुखता से याद किया।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस के साथ उनका संबंध करीब छह दशक पुराना है। इस दौरान कई राजनीतिक उतार-चढ़ाव आए, लेकिन उन्होंने पार्टी के भीतर रहकर अपनी भूमिका निभाई।

रावत के अनुसार, उनके राजनीतिक जीवन में यह पहला अवसर है जब उन्हें औपचारिक रूप से अपना पक्ष स्पष्ट करने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।

विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की बढ़ी चुनौती

उत्तराखंड में वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में कांग्रेस के लिए संगठनात्मक तैयारियों के साथ वरिष्ठ नेताओं के बीच तालमेल बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।

प्रदेश में भाजपा सत्ता में है और कांग्रेस आगामी चुनाव के लिए अपनी राजनीतिक रणनीति तैयार कर रही है।

इस बीच हरीश रावत की यात्रा और पार्टी नेतृत्व की आपत्ति का मामला कांग्रेस के अंदर चर्चा का विषय बना हुआ है।

पार्टी के सामने अब यह सवाल है कि व्यक्तिगत राजनीतिक कार्यक्रमों और संगठन के सामूहिक अभियानों के बीच किस तरह समन्वय स्थापित किया जाए।

अब आलाकमान के अगले कदम पर नजर

हरीश रावत ने स्पष्ट किया है कि वह पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी बात रखने को तैयार हैं। उन्होंने स्वयं भी मिलने का समय मांगा है।

फिलहाल कुमारी सैलजा के साथ उनकी प्रस्तावित मुलाकात टल गई है। पार्टी की ओर से इस मामले में आगे क्या निर्णय लिया जाएगा, इसे लेकर कोई औपचारिक घोषणा सामने नहीं आई है।

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर सामने आए इस विवाद का समाधान किस प्रकार होता है, इस पर राजनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है। हरीश रावत का 60 साल के राजनीतिक जीवन को लेकर दिया गया बयान फिलहाल चर्चा का प्रमुख विषय है।

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