उत्तराखंड

आंधी-बारिश और ओलावृष्टि से धान की फसल तबाह, 19 गांवों में शत-प्रतिशत नुकसान, किसानों ने मांगा मुआवजा

Kavita2
11 Oct 2026 5:19 PM IST
आंधी-बारिश और ओलावृष्टि से धान की फसल तबाह, 19 गांवों में शत-प्रतिशत नुकसान, किसानों ने मांगा मुआवजा
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तराई क्षेत्र। आंधी, बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की सालभर की मेहनत पर पानी फेर दिया है। खेतों में तैयार खड़ी धान की फसल तेज हवाओं और बारिश के कारण जमीन पर बिछ गई है। इससे किसानों के सामने फसल के नुकसान के साथ कटाई और मड़ाई का खर्च बढ़ने की चिंता भी खड़ी हो गई है। तहसील प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्र में करीब 6,950 हेक्टेयर धान की फसल प्रभावित हुई है। इनमें 19 गांवों में शत-प्रतिशत नुकसान दर्ज किया गया है। किसानों ने सरकार से वास्तविक क्षति का आकलन कर मुआवजा देने और कटाई-मड़ाई के लिए विशेष आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।

6950 हेक्टेयर धान की फसल प्रभावित

तराई क्षेत्र में मौसम की मार से धान की खेती को व्यापक नुकसान पहुंचा है। आंधी, बारिश और ओलावृष्टि के कारण खेतों में खड़ी फसल गिर गई है।

तहसील प्रशासन की रिपोर्ट में करीब 6,950 हेक्टेयर धान की फसल प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है।

यह आंकड़ा नुकसान के बड़े दायरे को दर्शाता है। धान की फसल प्रभावित होने से किसानों के सामने उत्पादन और आर्थिक नुकसान की चिंता बढ़ गई है।

हालांकि, कुल प्रभावित किसानों की संख्या और नुकसान की अनुमानित धनराशि का विवरण उपलब्ध नहीं है।

19 गांवों में शत-प्रतिशत नुकसान

प्रशासनिक रिपोर्ट के अनुसार, क्षेत्र के 19 गांवों में धान की फसल को शत-प्रतिशत नुकसान हुआ है।

इन गांवों के किसानों के लिए मौसम की यह मार गंभीर आर्थिक चुनौती बन सकती है।

धान की खेती में किसान बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी और अन्य कृषि कार्यों पर खर्च करते हैं। ऐसे में फसल तैयार होने के समय नुकसान होने से खेती में लगाई गई पूंजी प्रभावित होती है।

हालांकि, इन 19 गांवों के नाम और प्रत्येक गांव में प्रभावित कृषि क्षेत्र का अलग-अलग विवरण उपलब्ध नहीं है।

खेतों में बिछ गई धान की फसल

तेज आंधी और बारिश के कारण धान की फसल खेतों में गिर गई है।

धान की फसल जब जमीन पर बिछ जाती है, तो उसकी कटाई सामान्य परिस्थितियों की तुलना में कठिन हो सकती है।

खेतों में गिरी फसल को काटने में अधिक समय और श्रम लगने की संभावना रहती है।

बारिश के बाद खेतों में नमी बढ़ने से भी कटाई की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

किसानों की चिंता है कि इस स्थिति में फसल की कटाई और मड़ाई पर सामान्य से अधिक खर्च करना पड़ सकता है।

कटाई-मड़ाई का खर्च बढ़ने की आशंका

तराई क्षेत्र के किसान सामान्य तौर पर धान की कटाई कंबाइन और हार्वेस्टर मशीनों से कराते हैं।

इन मशीनों के उपयोग से कटाई का काम अपेक्षाकृत कम समय में पूरा किया जा सकता है।

लेकिन खेतों में फसल गिरने के बाद मशीनों से कटाई करना कठिन हो सकता है।

ऐसी स्थिति में किसानों को अतिरिक्त श्रम या वैकल्पिक कटाई व्यवस्था की जरूरत पड़ सकती है।

इससे कटाई-मड़ाई का खर्च बढ़ने की आशंका है।

हालांकि, खर्च में वास्तविक रूप से कितनी बढ़ोतरी होगी, इसका कोई आधिकारिक आकलन सामने नहीं आया है।

किसानों की सालभर की मेहनत पर संकट

धान की खेती किसानों के लिए महत्वपूर्ण कृषि गतिविधि है। फसल तैयार करने में लंबे समय तक मेहनत और संसाधनों की जरूरत होती है।

खेत की तैयारी से लेकर बुआई, सिंचाई और फसल की देखभाल तक कई चरणों में खर्च करना पड़ता है।

ऐसे में कटाई से पहले आंधी, बारिश और ओलावृष्टि से नुकसान होना किसानों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है।

इस बार खेतों में धान की फसल बिछने के कारण किसान नुकसान के साथ अतिरिक्त कटाई खर्च को लेकर भी चिंतित हैं।

वास्तविक क्षति का आकलन करने की मांग

प्रभावित किसानों ने सरकार से फसल की वास्तविक क्षति का आकलन कराने की मांग की है।

किसानों का कहना है कि नुकसान के आधार पर उन्हें मुआवजा दिया जाना चाहिए।

तहसील प्रशासन की रिपोर्ट में करीब 6,950 हेक्टेयर धान की फसल प्रभावित होने और 19 गांवों में शत-प्रतिशत नुकसान की जानकारी दी गई है।

हालांकि, किसानों को मुआवजा देने के संबंध में किसी सरकारी घोषणा का विवरण उपलब्ध नहीं है।

ऐसे में प्रभावित किसानों के लिए प्रशासनिक आकलन और उसके आधार पर होने वाली अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

विशेष आर्थिक सहायता की मांग

किसानों ने केवल फसल नुकसान का मुआवजा ही नहीं, बल्कि कटाई-मड़ाई के लिए विशेष आर्थिक सहायता देने की भी मांग की है।

उनका कहना है कि खेतों में फसल गिरने के कारण कटाई का खर्च बढ़ने की आशंका है।

सामान्य परिस्थितियों में कंबाइन और हार्वेस्टर से कटाई कराने वाले किसानों को इस बार अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

ऐसे में किसानों ने सरकार से कटाई-मड़ाई के अतिरिक्त खर्च को ध्यान में रखते हुए आर्थिक मदद उपलब्ध कराने की मांग की है।

ओलावृष्टि से भी फसल को नुकसान

आंधी और बारिश के साथ हुई ओलावृष्टि ने भी धान की फसल को प्रभावित किया है।

ओले गिरने से फसल के पौधों और बालियों को नुकसान पहुंच सकता है।

इसके अलावा तेज हवाओं के कारण फसल के जमीन पर गिरने की समस्या बढ़ सकती है।

मौसम की इन परिस्थितियों से धान की गुणवत्ता और उत्पादन प्रभावित होने की आशंका रहती है।

हालांकि, इस क्षेत्र में ओलावृष्टि से अलग से कितने हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई, इसका विवरण उपलब्ध नहीं है।

प्रशासनिक रिपोर्ट में सामने आया नुकसान

तहसील प्रशासन की रिपोर्ट में फसल नुकसान का दायरा सामने आया है।

रिपोर्ट के अनुसार, करीब 6,950 हेक्टेयर धान की फसल प्रभावित हुई है, जबकि 19 गांवों में शत-प्रतिशत नुकसान दर्ज किया गया है।

इन आंकड़ों के आधार पर क्षेत्र में मौसम से हुए कृषि नुकसान की गंभीरता का पता चलता है।

हालांकि, प्रशासन की ओर से मुआवजा वितरण की प्रक्रिया या समयसीमा को लेकर कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।

प्रभावित किसान अब अपनी मांगों पर सरकारी निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

किसानों के सामने दोहरी आर्थिक चुनौती

मौसम की मार झेल रहे किसानों के सामने दोहरी आर्थिक चुनौती खड़ी हो गई है।

एक ओर धान की फसल को नुकसान पहुंचा है, वहीं दूसरी ओर कटाई-मड़ाई का खर्च बढ़ने की आशंका है।

फसल के जमीन पर गिरने से कटाई की प्रक्रिया कठिन हो सकती है।

यदि अतिरिक्त मजदूरी या अन्य संसाधनों की जरूरत पड़ती है, तो किसानों की लागत बढ़ सकती है।

इस स्थिति में किसानों ने सरकार से नुकसान का वास्तविक आकलन कर राहत उपलब्ध कराने की मांग की है।

मुआवजे और राहत पर टिकी किसानों की उम्मीद

तराई क्षेत्र में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि से धान की फसल को हुए नुकसान ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।

तहसील प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार, करीब 6,950 हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई है और 19 गांवों में शत-प्रतिशत नुकसान हुआ है।

खेतों में फसल गिरने के कारण कटाई-मड़ाई का खर्च बढ़ने की भी आशंका है।

प्रभावित किसानों ने सरकार से वास्तविक नुकसान का आकलन कर उचित मुआवजा देने और कटाई-मड़ाई के लिए विशेष आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।

अब किसानों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई और राहत संबंधी निर्णय पर है।

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